Friday, November 6, 2026
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Pending cases: झारखंड हाईकोर्ट ने 61 लंबित मामलों में से 32 के फैसले सुनाए…यूं पकड़ी रफ्तार, सभी काे किया हैरान

Pending cases: झारखंड हाईकोर्ट ने उन 61 मामलों में से 32 मामलों के फैसले सुना दिए हैं, जिनमें निर्णय छह माह से अधिक समय पहले सुरक्षित रखे गए थे।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी के बाद बदला माहाैल

झारखंड हाईकोर्ट हाल के महीनों में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में इसलिए आया क्योंकि कई मामलों—खासकर गंभीर आपराधिक मामलों, उम्रकैद और फांसी सजा से जुड़े मामलों में फैसले वर्षों तक लंबित पड़े थे।

वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत सिन्हा ने पीठ काे दी जानकारी

सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत सिन्हा ने बताया कि “अब तक 32 फैसले दिए जा चुके हैं और बाकी फैसले एक महीने में सुना दिए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट का मौखिक निर्देश हाईकोर्ट के जजों तक पहुंचा दिया गया है और वे लंबित फैसलों पर काम कर रहे हैं।” पीठ ने कहा कि वह मामले को व्यापक दृष्टिकोण से देखेगी और जनवरी में अगली सुनवाई तय की, साथ ही इसे अन्य लंबित मामलों के साथ टैग किया।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियां और पृष्ठभूमि

8 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के जजों को अपने लंबित फैसले लिखने के लिए छुट्टियाँ लेने का सुझाव दिया था, क्योंकि दर्जनों मामलों में लंबे समय से निर्णय लंबित थे। सिन्हा ने पहले बताया था कि 31 जनवरी तक कुल 61 मामलों में फैसले लंबित थे जबकि निर्णय छह महीने से भी पहले सुरक्षित रखे गए थे। शीर्ष अदालत यह मामला उन याचिकाओं पर सुन रही है जिनमें झारखंड के दूरदराज आदिवासी क्षेत्रों के छात्र शिकायत कर रहे थे कि 2023 से उनके मामलों में कोई फैसला नहीं आया, जबकि मामला ‘होमगार्ड नियुक्ति’ से संबंधित था।

होमगार्ड भर्ती मामला: वर्षों से फैसला लंबित

झारखंड सरकार ने 2017 में निकाली गई 1,000 से अधिक होमगार्ड पदों की भर्ती रद्द कर दी, जबकि याचिकाकर्ताओं के नाम मेरिट लिस्ट में थे। हाईकोर्ट ने 2021 से सुनवाई की और 6 अप्रैल 2023 को फैसला सुरक्षित रख लिया, लेकिन निर्णय नहीं आया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से लंबित मामलों की स्थिति रिपोर्ट (criminal + civil) देने को कहा था।

फांसी व उम्रकैद वाले मामलों में तेज़ी

21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि हाईकोर्ट ने 10 दोषियों के मामलों में फैसला सुना दिया, जिनमें से 6 दोषी फांसी की सजा पाए थे। यह कदम उन दोषियों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में देरी की शिकायत करने के बाद उठाया गया। 14 जुलाई को नोटिस जारी होने के बाद हाईकोर्ट ने एक हफ्ते में फैसले सुना दिए। 13 मई को जीवन कैद वालों की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हाईकोर्ट जज “बिना वजह छुट्टियाँ ले रहे हैं”, और उनके परफॉर्मेंस ऑडिट की बात कही थी।

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