Witnesses Case: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गवाही देने वाले गवाहों को उनके पूर्व बयान इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेजना अनिवार्य होगा, ताकि किसी भी पक्ष को सुनवाई में नुकसान न हो।
“तकनीक के युग में गवाही ऑनलाइन—पर किसी पक्ष को नुकसान नहीं होना चाहिए”
जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए एक आपराधिक मामले में सामने आई प्रक्रिया संबंधी कमी का संज्ञान लेते हुए दिया। पीठ ने कहा कि आज तकनीक के तेजी से बढ़ने के साथ कई मामलों में गवाहों की गवाही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से रिकॉर्ड की जा रही है। ऐसे में समस्या यह आती है कि गवाह अदालत में मौजूद नहीं होता, इसलिए उसे उसका पुराना बयान या लिखित दस्तावेज दिखाना मुश्किल हो जाता है।
कोर्ट ने कहा
“ऐसी स्थिति में कोई भी पक्ष असुविधा में नहीं रहना चाहिए। इसलिए ट्रायल कोर्ट यह सुनिश्चित करे कि गवाह को उसका पूर्व लिखित बयान या दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजा जाए।”
पीठ ने स्पष्ट कहा
“जहां भी गवाह की गवाही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होनी है, और उसे किसी पुराने बयान या लिखित दस्तावेज से टकराना (confront) हो, ट्रायल कोर्ट उस बयान/दस्तावेज की प्रति इलेक्ट्रॉनिक रूप से गवाह को भेजे।”
कनाडा से गवाही दे रही गवाह को दस्तावेज न दिखा पाने पर निर्देश
यह निर्देश एक ऐसे मामले में आया, जहां इकलौती आंखोंदेखी गवाह कनाडा से वीडियो लिंक के जरिए गवाही दे रही थी। डिफेंस उसके पहले दिए गए विरोधाभासी बयान दिखाना चाहता था, लेकिन अदालत उसके सामने दस्तावेज नहीं रख पाई। इसके चलते बचाव पक्ष प्रभावी जिरह नहीं कर सका। इस स्थिति को गंभीर प्रक्रिया-दोष मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश की ट्रायल कोर्ट्स के लिए यह बाध्यकारी दिशा-निर्देश जारी किए।

