Supreme Court View
Direct recruits in HSJ: सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि हायर ज्यूडिशियल सर्विस (HJS) में जिला जज के पदों पर प्रमोटी जजों के लिए कोई विशेष कोटा या वेटेज नहीं बनाया जा सकता।
मन में कसक—को आधार बनाकर अनुमति नहीं दे सकते
CJI बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने कहा कि प्रमोटी और डायरेक्ट भर्ती के बीच महसूस होने वाली “हार्टबर्न”—यानी मन में कसक—को आधार बनाकर किसी कृत्रिम वर्गीकरण की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि देशभर में ऐसा कोई पैटर्न नहीं है जिससे दिखे कि डायरेक्ट रिक्रूट जिला जजों का प्रतिनिधित्व अत्यधिक हो रहा है। कोर्ट ने कहा कि एक बार जब अलग-अलग स्रोतों (नियमित प्रमोशन, LDCE, और डायरेक्ट भर्ती) से आए अधिकारी एक संयुक्त कैडर में प्रवेश कर जाते हैं, तो उनकी भर्ती का ‘जन्म-चिह्न’ समाप्त हो जाता है। seniority केवल वार्षिक रोस्टर से तय होगी।
“Civil Judge के रूप में लंबी सेवा—HJS में अलग पहचान की वजह नहीं बन सकती”
कोर्ट ने कहा कि सेलेक्शन ग्रेड और सुपर टाइम स्केल केवल कैडर के भीतर मेरिट-कम-सीनियरिटी से तय होंगे, न कि निचली अदालतों में की गई लंबी सेवा से। CJI ने कहा, “सिविल जज के रूप में सेवा की अवधि, जिला जज कैडर में अलग पहचान देने का आधार नहीं बन सकती।”
प्रमोशन के रास्ते पहले से मौजूद—रजनीश केस का हवाला दिया
कोर्ट ने बताया कि इन-सर्विस जजों के पास उन्नति के काफी अवसर हैं, रजनीश फैसले के बाद वे डायरेक्ट रिक्रूटमेंट से भी जिला जज बन सकते हैं। Civil Judge (Senior Division) के प्रमोशन में सर्विस अवधि की शर्त कम कर दी गई है। कोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत आकांक्षाएं किसी भी सेवा में सामान्य होती हैं, पर सीनियरिटी नियम आकांक्षाओं से नहीं चल सकते। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये दिशा-निर्देश सामान्य हैं, किसी खास इंटर-से विवाद को दोबारा नहीं खोलेंगे। भविष्य में इन गाइडलाइंस में बदलाव की जरूरत हो तो किया जा सकता है।
जिला जज भर्ती—SC ने आर्टिकल 142 के तहत जारी कीं बड़ी गाइडलाइंस
सुप्रीम कोर्ट ने जिला जजों की भर्ती और सीनियरिटी तय करने के लिए 4-पॉइंट वार्षिक रोस्टर अनिवार्य किया:
- वार्षिक रोस्टर (4-Point Roster)
हर वर्ष कैडर में नियुक्तियां इस क्रम में होंगी—2 Regular Promotees (RP),1 LDCE (Limited Departmental Competitive Exam), 1 Direct Recruit (DR)।
- सीनियरिटी उसी साल के रोस्टर से मिलेगी, बशर्ते…
यदि भर्ती प्रक्रिया उसी साल पूरी हो जाती है और उसके बाद किसी अन्य स्रोत से नियुक्ति नहीं हुई है, तो देर से नियुक्त व्यक्ति को भी उसी वर्ष के रोस्टर की सीनियरिटी मिलेगी।
- यदि भर्ती प्रक्रिया देर से शुरू हुई…
तो नियुक्त व्यक्ति को उसी वर्ष की रोस्टर सीनियरिटी मिलेगी जिस वर्ष भर्ती प्रक्रिया पूरी हुई।
- यदि DR या LDCE को योग्य उम्मीदवार न मिले…
तो उनकी सीटें प्रमोटी से भरी जा सकती हैं, लेकिन उन्हें केवल बाद के RP स्लॉट में ही समायोजित किया जाएगा।
- राज्यों को नियम संशोधित करने का निर्देश
राज्यों और हाई कोर्ट्स को कहा गया कि वे इन गाइडलाइंस को अपने HJS नियमों में शामिल करें।
Amicus ने जो 4 सुझाव दिए थे—कोर्ट ने सभी अस्वीकार किए
वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ भटनागर (एमिकस क्यूरी) ने प्रमोटी जजों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने के लिए 4 सुझाव दिए थे:
(1) 1:1 कोटा प्रस्ताव- प्रमोटी जिला जज और डायरेक्ट रिक्रूट जिला जज के लिए बराबर कोटा बनाया जाए।
(2) 50:50 जोन ऑफ कंज़िडरेशन– सेलेक्शन ग्रेड और सुपर टाइम स्केल के लिए 50% सबसे सीनियर प्रमोटी, 50% सबसे सीनियर डायरेक्ट रिक्रूट को शामिल किया जाए।
(3) सेवा आधारित वेटेज– सिविल जज के रूप में हर 5 साल की सेवा पर 1 साल की अतिरिक्त सीनियरिटी (अधिकतम 3 साल) का वेटेज दिया जाए।
(4) तीन अलग सीनियरिटी लिस्ट– आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट की सिफारिश— Regular Promotee, LDCE Promotee, Direct Recruit के लिए अलग 3 सूची बनाई जाएं।
सभी सुझाव को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी सुझावों को खारिज कर दिया, कहते हुए कि प्रमोटी और डायरेक्ट रिक्रूट में कृत्रिम विभाजन नहीं किया जा सकता।
मामला आखिर बड़े बेंच तक क्यों गया?
एमिकस ने बताया था कि कई राज्यों में JMFC पद से शुरू करने वाले जज प्रिंसिपल जिला जज तक भी नहीं पहुंच पाते, जिससे करियर स्टैग्नेशन होता है, और प्रतिभाशाली युवाओं का जुडिशरी में आने का उत्साह कम होता है। कुछ पक्षों ने इसका विरोध किया कि इससे डायरेक्ट भर्ती वालों के अवसर प्रभावित होंगे। इस विवाद को स्थायी समाधान देने के लिए केस को 5-judge संविधान पीठ के पास भेजा गया था।





