Delhi Bar Election: दिल्ली बार काउंसिल (BCD) के चुनावों को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
काउंसिल ने सख्त रुख अपनाया
20, 21 और 22 फरवरी 2026 को होने वाले इन चुनावों के लिए काउंसिल ने सख्त रुख अपनाया है। दिल्ली और एनसीआर के किसी भी सार्वजनिक स्थान, मेट्रो पिलर, बिजली के खंभों या निजी संपत्तियों पर चुनाव से जुड़े पोस्टर, होर्डिंग और कैनवास बोर्ड लगाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। काउंसिल की विशेष समिति ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर चुनाव के दौरान लॉजिस्टिक और नागरिक सुविधाएं मुहैया कराने की मांग की है। काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि ‘आदर्श आचार संहिता’ को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सभी अवैध प्रचार सामग्री को तुरंत हटाया जाए।
90 हजार मतदाता, सरकार से मांगी ये सुविधाएं
- फ्री बस सर्विस: काउंसिल ने मांग की है कि मतदान के दिनों में तीस हजारी, साकेत, कड़कड़डूमा, पटियाला हाउस और राउज एवेन्यू कोर्ट से दिल्ली हाई कोर्ट तक स्पेशल DTC बसें चलाई जाएं, ताकि वकीलों को आने-जाने में दिक्कत न हो।
- मेडिकल और सुरक्षा: किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मतदान केंद्र पर एम्बुलेंस, फायर टेंडर और डॉक्टरों की टीम (नर्स और पैरामेडिक्स के साथ) तैनात करने का अनुरोध किया गया है।
- स्वच्छता और पानी: भारी भीड़ को देखते हुए अलग-अलग पॉइंट्स पर 20 मोबाइल टॉयलेट और पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था करने को कहा गया है।
हाई कोर्ट परिसर में ही होगा मतदान
इससे पहले वकील सुरेंद्र कुमार ने एक याचिका दायर कर मांग की थी कि केवल हाई कोर्ट के बजाय द्वारका, साकेत और कड़कड़डूमा जैसी जिला अदालतों में भी पोलिंग सेंटर बनाए जाएं। उन्होंने तर्क दिया था कि 1.05 लाख से ज्यादा मतदाता होने के कारण एक जगह भारी भीड़ और सुरक्षा की समस्या हो सकती है। हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने इस याचिका को ‘प्रत्यावेदन’ (Representation) के तौर पर विशेष समिति के पास विचार के लिए भेज दिया है। बार काउंसिल की विशेष समिति (धारा 8-A के तहत गठित) ने चेयरमैन चेतन शर्मा के नेतृत्व में यह पत्र जारी किया है। समिति ने जोर दिया है कि चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए पोस्टर-फ्री चुनाव जरूरी है।

