Supreme Court View
Section 8 provisions: प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 8 की व्याख्या करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 6 फरवरी को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
स्पेशल कोर्ट को यह दिया गया दिशानिर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि संपत्ति की कुर्की (attachment) की पुष्टि के खिलाफ अपील अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष लंबित है, तो स्पेशल कोर्ट जब्ती की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ा सकता। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरैश और न्यायमूर्ति एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने कहा कि धारा 8(3) के तहत पारित पुष्टि आदेश को यदि धारा 26 के तहत अपीलीय अधिकरण में चुनौती दी गई है, तो धारा 8(7) की कार्यवाही पर “निहित रोक” (deemed embargo) लागू हो जाती है। जब तक अपील का अंतिम निपटारा नहीं हो जाता, तब तक जब्ती पर निर्णय नहीं दिया जा सकता।
यह था मामला
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धारा 5(1) के तहत संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की थीं, जिन्हें बाद में धारा 8(3) के तहत पुष्टि मिल गई। आरोपी ने इस पुष्टि आदेश को धारा 26 के तहत अपीलीय अधिकरण में चुनौती दी। इसी बीच स्पेशल कोर्ट ने धारा 8(7) के तहत जब्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाई, जिसे हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा। इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। पीठ ने स्पष्ट कहा कि स्पेशल कोर्ट को अपीलीय अधिकरण के निर्णय की प्रतीक्षा करनी चाहिए थी। इस आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां
- धारा 8(7) और 8(8) स्वतंत्र प्रावधान हैं, लेकिन 8(7) तभी लागू होगा जब 8(3) का आदेश अंतिम रूप से तय हो जाए।
- अपील लंबित रहने के दौरान जब्ती पर फैसला देना अपील के अधिकार को निष्प्रभावी (infructuous) बना देगा।
- “Material before it” का अर्थ सीमित है—सिर्फ आकस्मिक परिस्थितियों और वैध दावों की जांच तक।
- धारा 8(8) के तहत आवेदन 2016 के नियम 2(b) और 3A की शर्तें पूरी होने पर ही स्वीकार होगा।
असर क्या होगा?
इस फैसले से स्पष्ट हो गया है कि PMLA मामलों में अपील का अधिकार प्रभावी और सुरक्षित रहेगा। अब अपील लंबित रहते हुए संपत्ति की जब्ती पर अंतिम फैसला नहीं दिया जा सकेगा, जिससे अभियुक्तों और दावेदारों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
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