MISSING RECORD: सुप्रीम कोर्ट ने अदालती फाइलों से कार्यवाही के रिकॉर्ड (Record of Proceedings) गायब होने की घटना पर कड़ा रुख अपनाया है।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पांचोली की पीठ ने इसे एक “गंभीर और जानबूझकर की गई कोशिश” बताते हुए सुप्रीम कोर्ट के महासचिव को ‘फैक्ट-फाइंडिंग’ जांच (तथ्य खोजने वाली जांच) करने का निर्देश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
सुप्रीम कोर्ट गोवा में प्रस्तावित ‘महादेई टाइगर रिजर्व’ से संबंधित एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई कर रहा था। सुनवाई के दौरान पीठ ने पाया कि केस की फाइल (Paperbooks) से 8 सितंबर 2025 का अदालती आदेश गायब था। कोर्ट ने टिप्पणी की कि अब फाइलों से रिकॉर्ड का गायब होना एक आम बात होती जा रही है। बेंच ने कड़े शब्दों में कहा, “ऐसा लगता है कि यह स्पष्ट कारणों से किया गया एक जानबूझकर किया गया प्रयास है।”
टाइगर रिजर्व पर क्या है कानूनी विवाद?
यह सुनवाई बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ के जुलाई 2023 के उस आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर हो रही थी, जिसमें गोवा सरकार को 3 महीने के भीतर महादेई वन्यजीव अभयारण्य और उसके आसपास के क्षेत्रों को ‘टाइगर रिजर्व’ घोषित करने का निर्देश दिया गया था।
अब तक की कार्यवाही
- 8 सितंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मुद्दे की जांच ‘केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति’ (CEC) द्वारा की जानी चाहिए।
- CEC की रिपोर्ट: गुरुवार को कोर्ट ने नोट किया कि CEC ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।
- अगला कदम: कोर्ट ने ‘गोवा फाउंडेशन’ सहित सभी प्रतिवादियों को अपना पक्ष रखने के लिए 2 सप्ताह का समय दिया है।
क्यों महत्वपूर्ण है महादेई अभयारण्य?
गोवा के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित यह अभयारण्य 208 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और कर्नाटक की सीमा से सटा है। हाईकोर्ट ने ‘गोवा फाउंडेशन’ की याचिका पर फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत ‘टाइगर कंजर्वेशन प्लान’ तैयार करने का आदेश दिया था।
जांच का आदेश
CJI सूर्यकांत ने महासचिव को निर्देश दिया है कि इस प्रशासनिक चूक या छेड़छाड़ की विस्तृत जांच की जाए और इसकी रिपोर्ट सीधे मुख्य न्यायाधीश को सौंपी जाए।

