Wednesday, October 28, 2026
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Westend Green Farms: बिना सुनवाई और रिकॉर्ड जांचे सीमांकन नहीं…दिल्ली हाई कोर्ट का DDA को निर्देश

Westend Green Farms: रजोकरी और समालका गांवों में “स्टॉर्म वॉटर ड्रेन” (बरसाती नाले) के सीमांकन को लेकर चल रहे विवाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने भू-स्वामियों के पक्ष में आदेश दिया है।

कोर्ट ने माना कि बिना उचित प्रक्रिया का पालन किए किसी की जमीन को नाले का हिस्सा बताना गलत है। यह आदेश उन संपत्ति मालिकों के लिए एक बड़ी जीत है जो सरकारी अधिकारियों द्वारा बिना पूर्व सूचना या रिकॉर्ड मिलान के की जाने वाली ‘डेमोलेशन’ या ‘सीमांकन’ की कार्रवाई से डरे हुए थे। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि “ड्यू प्रोसेस” (कानूनी प्रक्रिया) का पालन अनिवार्य है।

यह है मामले की मुख्य बातें

  • याचिकाकर्ताओं की दलील: नीति पवार और ललित गुलाटी एंड संस (HUF) की ओर से पेश वकील सुमित गहलोत ने दलील दी कि DDA ने सीमांकन की प्रक्रिया के दौरान उन्हें शामिल नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी मालिकाना हक के दस्तावेजों (Title Documents) को देखे बिना ही उनकी निजी जमीन को नाले की जमीन बता रहे हैं।
  • जस्टिस संजीव नरूला का आदेश (नीति पवार केस): कोर्ट ने कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता की 11 बीघा से अधिक जमीन प्रस्तावित नाले के बगल में है, इसलिए उन्हें अपनी आपत्ति दर्ज कराने और दस्तावेज पेश करने का अधिकार है।
  • जस्टिस जसमीत सिंह का आदेश (ललित गुलाटी केस): कोर्ट ने 2 जनवरी, 2026 को किए गए पिछले सीमांकन पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह भू-स्वामियों को सुने बिना किया गया था। अब DDA को इस सीमांकन की दोबारा समीक्षा करनी होगी।

हाई कोर्ट के कड़े निर्देश

  • दस्तावेजों का सत्यापन: DDA को निर्देश दिया गया है कि वह राजस्व रिकॉर्ड (Revenue Records) और स्वीकृत बिल्डिंग प्लान (Sanctioned Building Plan) की गहनता से जांच करे।
  • सुनवाई की तारीख: सभी याचिकाकर्ताओं को 5 मार्च, 2026 को सुबह 11:30 बजे DDA के उप-निदेशक (भूमि प्रबंधन) के समक्ष पेश होने को कहा गया है।
  • सीमांकन में बदलाव: यदि दस्तावेजों की जांच के बाद यह पाया जाता है कि पहले किया गया सीमांकन गलत था, तो DDA को कानून के अनुसार उसमें सुधार (Modification) करना होगा।

विवाद का केंद्र: स्टॉर्म वॉटर ड्रेन (Storm Water Drain)

DDA का दावा है कि वह केवल अपनी जमीन और ग्राम सभा की जमीन पर स्थित नाले का सीमांकन कर रहा है। वहीं, निवासियों का कहना है कि “नाले की पहचान” की आड़ में उनकी वैध निजी संपत्तियों पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है।

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