Aravalli Hill range: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली रिज मामले की सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने जोर देकर कहा कि ग्रीन कवर (हरियाली) के मुद्दे पर एक ‘समग्र दृष्टिकोण’ (Holistic Approach) अपनाने की आवश्यकता है। अदालत ने कहा कि हमें इस मानसिकता से बाहर निकलने की ज़रूरत है कि केवल राष्ट्रीय राजधानी को ही हरियाली और पारिस्थितिक सुरक्षा की आवश्यकता है, और अन्य राज्य कम महत्वपूर्ण हैं।
“दिल्ली में ऐसा क्या खास है?”
- सुनवाई के दौरान जब पीठ को बताया गया कि विभिन्न समितियाँ देश भर में और दिल्ली में हरियाली के मुद्दों को देख रही हैं, तो कोर्ट ने तीखे सवाल किए।
- समानता का मुद्दा: पीठ ने पूछा, “अगर केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) पूरे देश के पर्यावरण संरक्षण को संभाल सकती है, तो वह दिल्ली को क्यों नहीं संभाल सकती? दिल्ली में ऐसा क्या खास है?”
- क्षेत्राधिकार का टकराव: कोर्ट ने यह जानने की कोशिश की कि देश में ग्रीन कवर से संबंधित कितनी वैधानिक और गैर-वैधानिक संस्थाएं कार्यरत हैं और उनके कार्य क्षेत्र क्या हैं।
दिल्ली रिज मैनेजमेंट बोर्ड (DRMB) की स्थिति
- अदालत ने पिछले साल 11 नवंबर के अपने फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें केंद्र को निर्देश दिया गया था।
- वैधानिक दर्जा: दिल्ली रिज मैनेजमेंट बोर्ड (DRMB) को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत वैधानिक दर्जा दिया जाए।
- सिंगल-विंडो अथॉरिटी: इसे रिज और ‘मॉर्फोलॉजिकल रिज’ से संबंधित सभी मामलों के लिए एकल खिड़की प्राधिकरण बनाया जाए।
- गठन: केंद्र ने बताया कि पिछले साल 1 दिसंबर को DRMB के गठन की अधिसूचना जारी कर दी गई है, जिसमें केंद्र, दिल्ली सरकार, शहरी व वन विभाग और NGO के प्रतिनिधि शामिल हैं।
अदालत का अगला निर्देश
- सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दो सप्ताह के भीतर एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें निम्नलिखित विवरण माँगे गए हैं। वन और हरित क्षेत्रों के प्रबंधन से जुड़ी सभी समितियों (वैधानिक या गैर-वैधानिक) का विवरण। उनके संचालन के क्षेत्र और यह जानकारी कि क्या उनके कार्यों में कोई ‘ओवरलैपिंग’ (एक ही काम को दो संस्थाएं करना) तो नहीं है। वह वैधानिक ढांचा जिसके तहत इन निकायों का गठन किया गया है।
क्या है ‘दिल्ली रिज’?
यह दिल्ली में अरावली पहाड़ी श्रृंखला का विस्तार है, जो एक चट्टानी, पहाड़ी और जंगली क्षेत्र है। प्रशासनिक कारणों से इसे चार क्षेत्रों (दक्षिण, दक्षिण-मध्य, मध्य और उत्तर) में विभाजित किया गया है, जो लगभग 7,784 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। इसे दिल्ली का ‘फेफड़ा’ (Lungs of Delhi) भी कहा जाता है।

