Friday, October 9, 2026
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Transgender Rights: Transgender Persons Amendment Act 2026…Self-Identification to Medical Certification का यह है मामला

Transgender Rights: केरल हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश देते हुए दो ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को अपनी हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) जारी रखने की अनुमति दे दी है।

हाईकोर्ट के जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने उन याचिकाओं पर सुनवाई की जिनमें आरोप लगाया गया था कि नए कानून के लागू होने के बाद अस्पतालों ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों का इलाज रोक दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति का चल रहा इलाज अचानक बंद कर दिया जाता है, तो इसके “बेतुके परिणाम” (Absurd Results) हो सकते हैं। यह मामला नए ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं से जुड़ा है।

कोर्ट का मुख्य निर्देश (Interim Relief)

  • अदालत ने मानवीय और चिकित्सा आधार पर राहत दी।
  • निरंतरता: “कोर्ट का मानना है कि न्याय के हित में, यदि याचिकाकर्ताओं की हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी पहले ही शुरू हो चुकी है, तो उसे बिना किसी हस्तक्षेप के पूरा होने तक जारी रखा जाना चाहिए।”
  • कानूनी कमी: जज ने टिप्पणी की कि कानून (Statute) बनाते समय इस तरह की चिकित्सा निरंतरता का ध्यान रखा जाना चाहिए था।

नए कानून (2026 Act) पर विवाद

  • याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरुंधति काटजू ने दलील दी।
  • NALSA फैसले का उल्लंघन: 2014 के ऐतिहासिक NALSA फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने ‘स्व-पहचान’ (Self-identification) को मौलिक अधिकार माना था। नया 2026 का कानून इसे हटाकर ‘अनिवार्य चिकित्सा प्रमाणन’ (Mandatory Medical Certification) जोड़ता है, जो असंवैधानिक है।
  • इलाज पर असर: याचिकाकर्ताओं ने बताया कि निजी अस्पतालों ने नए संशोधन के डर से उनका इलाज बीच में ही बंद कर दिया है।

पश्चिमी देशों की नकल पर कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान एक दिलचस्प बहस हुई जब केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) पी. श्रीकुमार ने अमेरिका जैसे देशों का उदाहरण दिया जहाँ स्व-पहचान एक बड़ा मुद्दा बन गया है।

  • विधायिका का इरादा: जस्टिस थॉमस ने कहा कि शायद विधायिका का इरादा पश्चिमी देशों की “नकल” (Aping) को रोकना हो सकता है, जहाँ बच्चे खुद को बिल्ली या कुत्ता बताने लगते हैं और कोई उन पर सवाल नहीं उठा सकता।
  • स्व-पहचान बनाम प्रक्रिया: कोर्ट ने सुझाव दिया कि शायद नया कानून केवल “स्व-अनुमानित पहचान” (Self-perceived identity) के खिलाफ है और इसके लिए कुछ चिकित्सा प्रक्रियाओं को आवश्यक मानता है।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

विषयविवरण
याचिकाकर्तादो ट्रांसजेंडर व्यक्ति जिनका इलाज रुक गया था।
कानूनी चुनौतीअनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत स्व-पहचान के अधिकार की मांग।
अंतरिम राहतचल रही हार्मोन थेरेपी पर कोई रोक नहीं लगेगी।
अगली सुनवाईजून 2026 के दूसरे सप्ताह में निर्धारित।

गरिमा और स्वास्थ्य का संतुलन

केरल हाई कोर्ट का यह आदेश उन ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए एक बड़ी राहत है जो पहले से ही चिकित्सा संक्रमण (Medical Transition) की प्रक्रिया में हैं। हालांकि अदालत ने नए कानून पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई है, लेकिन उसने यह सुनिश्चित किया है कि कानूनी बदलावों के कारण किसी के चल रहे स्वास्थ्य उपचार और शारीरिक गरिमा के साथ समझौता न हो।

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