CBI vs Kejriwal: दिल्ली शराब नीति मामले (Delhi Excise Policy Case) में सीबीआई और अरविंद केजरीवाल के बीच चल रही कानूनी जंग अब “हितों के टकराव” (Conflict of Interest) और “सोशल मीडिया कैंपेन” के आरोपों तक पहुंच गई है।
हाईकोर्ट के जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच के सामने सीबीआई ने लिखित दलीलें पेश करते हुए आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल और उनके समर्थक जज के खिलाफ एक “विषाक्त ऑनलाइन अभियान” (Vitriolic Online Campaign) चला रहे हैं ताकि उन्हें मामले की सुनवाई से पीछे हटने (Recusal) के लिए मजबूर किया जा सके।
केजरीवाल का आरोप: जज के बच्चे सरकारी वकील हैं
- अरविंद केजरीवाल ने एक अतिरिक्त हलफनामे में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ गंभीर सवाल उठाए हैं।
- हितों का टकराव: केजरीवाल का दावा है कि जज के बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में वकील हैं और उन्हें सॉलिसिटर जनरल (जो इस केस में सीबीआई की ओर से पेश हो रहे हैं) के माध्यम से काम मिलता है।
- RTI का हवाला: आप नेता ने RTI से मिली जानकारी के आधार पर आरोप लगाया कि जज के बेटे को सरकार की ओर से काफी कानूनी काम आवंटित किया गया है।
- पिछला रिकॉर्ड: केजरीवाल ने यह भी तर्क दिया कि इसी जज ने पहले उनकी गिरफ्तारी को सही ठहराया था और मनीष सिसोदिया व के. कविता की जमानत याचिकाएं भी खारिज की थीं।
सीबीआई का पलटवार: यह अराजक प्रथा है
- सीबीआई ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे संस्थागत अखंडता (Institutional Integrity) पर हमला बताया।
- दबाव बनाने की तकनीक: सीबीआई ने कहा कि सोशल मीडिया पर “भ्रामक और अपमानजनक” जानकारी फैलाकर जज को शर्मिंदा करने की कोशिश की जा रही है।
- गलत मिसाल: एजेंसी ने तर्क दिया कि अगर “ऑर्केस्ट्रेटेड सोशल मीडिया कैंपेन” के आधार पर जज हटने लगे, तो यह बहुत गलत मिसाल होगी। कल को कोई भी अपराधी इसी तरह की बेतुकी दलीलें देकर अपनी पसंद का जज चुनने की कोशिश करेगा।
- राजनीतिक पैंतरा: सीबीआई के अनुसार, अगर इस तर्क को माना जाए तो देश का कोई भी जज किसी नेता का केस नहीं सुन पाएगा यदि उसका कोई रिश्तेदार सरकारी पैनल में है।
सोशल मीडिया और RTI का ‘दुरुपयोग
- सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि यह सब एक योजना के तहत किया गया।
- सुनियोजित ट्वीट: जैसे ही कोर्ट ने Recusal अर्जी पर जवाब मांगा, सोशल मीडिया (X) पर पहले से तैयार जानकारी शेयर की जाने लगी।
- RTI आवेदक: सीबीआई ने दावा किया कि जिस व्यक्ति ने RTI फाइल की, वह केस में पक्षकार नहीं है, लेकिन हर सुनवाई में मौजूद रहता है और केजरीवाल के इशारे पर जानकारी को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहा है।
केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| बिंदु | विवरण |
| मुख्य विवाद | क्या जज के बच्चों का सरकारी पैनल में होना ‘हितों का टकराव’ है? |
| सीबीआई का स्टैंड | यह जज को डराने और दबाव में लेने का प्रयास है। |
| न्यायिक टिप्पणी | जज सोशल मीडिया पर चल रहे झूठ का जवाब नहीं दे सकते, इसलिए कोर्ट को कड़ा संदेश देना चाहिए। |
| अगला कदम | जस्टिस शर्मा ने केजरीवाल के अतिरिक्त हलफनामे को रिकॉर्ड पर ले लिया है। |
न्यायपालिका बनाम डिजिटल नैरेटिव
यह मामला केवल एक शराब नीति घोटाले का नहीं रह गया है, बल्कि यह इस बात पर बहस छेड़ता है कि क्या सोशल मीडिया पर चलने वाले अभियान अदालतों के फैसलों या जजों की बेंच को प्रभावित कर सकते हैं। सीबीआई ने साफ कर दिया है कि वह केजरीवाल के इन आरोपों को ‘अराजक’ मानती है और इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर एक सीधा खतरा मानती है।

