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The Backdoor Entry: बिना विज्ञापन और इंटरव्यू वाली नौकरी कभी नियमित नहीं होगी…नौकरियों में बैकडोर एंट्री पर बड़ा प्रहार, पढ़िए

The Backdoor Entry: सुप्रीम कोर्ट ने मदन सिंह बनाम हरियाणा राज्य मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सरकारी नौकरियों में बैकडोर एंट्री (चोरी-छिपे प्रवेश) पर कड़ा रुख अपनाया है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पमिदिघंटम श्री नरसिम्हा और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के 2018 के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने ‘उमादेवी’ मामले के पुराने सिद्धांतों को दोहराते हुए पारदर्शिता पर जोर दिया।

2014 की नीतियों का विश्लेषण (The Legal Scrutiny)

हरियाणा सरकार ने जून और जुलाई 2014 में ग्रुप बी, सी और डी कर्मचारियों को पक्का करने के लिए कई अधिसूचनाएं जारी की थीं। सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें दो श्रेणियों में बांटा। पहली श्रेणी के अंतर्गत उचित (Valid) अधिसूचनाएं (16 और 18 जून, 2014) वाले उन कर्मचारियों के लिए थीं जो पहले की नीतियों में छूट गए थे। वे स्वीकृत पदों (Sanctioned Posts) पर काम कर रहे थे और पात्रता मानदंडों को पूरा करते थे। कोर्ट ने इन्हें सही ठहराया और इन कर्मचारियों के नियमितीकरण को बहाल रखा। दूसरी श्रेणी के तहत अवैध (Arbitrary) अधिसूचनाएं (7 जुलाई, 2014) में शामिल उन लोगों को पक्का करने की बात थी जिनका चयन बिना किसी विज्ञापन या इंटरव्यू के हुआ था। इसमें ‘भविष्य की कट-ऑफ डेट’ (31 दिसंबर 2018) तय की गई थी। नतीजा कोर्ट ने इन्हें रद्द कर दिया।

कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: चयन प्रक्रिया पर संदेह

  • अदालत ने बिना विज्ञापन नियुक्ति को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
  • पारदर्शिता का अभाव: “बिना विज्ञापन के नियुक्ति का दावा ही नियुक्ति के तरीके पर संदेह पैदा करता है। रिकॉर्ड की अनुपस्थिति आत्मविश्वास पैदा नहीं करती।”
  • भविष्य की कट-ऑफ: कोर्ट ने कहा कि भविष्य की तारीख तय करना तर्कहीन है क्योंकि यह नियमित भर्ती के अवसरों को ब्लॉक करता है।

मानवीय दृष्टिकोण: आर्टिकल 142 का उपयोग

  • हालांकि कोर्ट ने जुलाई 2014 की नीति को अवैध माना, लेकिन कई सालों से काम कर रहे कर्मचारियों के प्रति सहानुभूति दिखाते हुए अनुच्छेद 142 (Article 142) के तहत विशेष शक्तियों का उपयोग किया।
  • नौकरी से नहीं निकाला जाएगा: जो कर्मचारी जुलाई 2014 की नीति के तहत पहले से कार्यरत हैं, उन्हें पद से नहीं हटाया जाएगा।
  • पे-स्केल में बदलाव: उन्हें पक्का (Regularize) तो नहीं किया जाएगा, लेकिन उन्हें उनके पद के लिए लागू न्यूनतम वेतनमान (Lowest Pay Scale) पर रखा जाएगा।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
मुख्य सिद्धांतसरकारी नौकरी में नियुक्ति के लिए सार्वजनिक विज्ञापन और इंटरव्यू अनिवार्य है।
अवैध नीति7 जुलाई 2014 की अधिसूचना (बिना पारदर्शी चयन वाली)।
राहत16-18 जून 2014 वाली नीतियों को वैध माना गया।
सुरक्षापुराने कर्मचारियों को नौकरी से नहीं निकाला जाएगा, पर न्यूनतम वेतन मिलेगा।

मेरिट बनाम जुगाड़

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उन लाखों युवाओं के लिए बड़ी जीत है जो पारदर्शी भर्ती परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि राज्य सरकारें अपनी शक्तियों का उपयोग वोट बैंक की राजनीति के लिए बैकडोर नियुक्तियों को वैध बनाने में नहीं कर सकतीं। नियमितीकरण का अधिकार केवल उन्हीं को है जिनकी शुरुआती नियुक्ति कानूनन सही थी।

IN THE SUPREME COURT OF INDIA
PAMIDIGHANTAM SRI NARASIMHA J. ATUL S. CHANDURKAR J.
CIVIL APPELLATE JURISDICTION
CIVIL APPEAL NO.1996 OF 2024
(@ SLP (C) NO.18125 OF 2025)
MADAN SINGH AND OTHERS
VERSUS
STATE OF HARYANA AND OTHERS

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