Wednesday, July 22, 2026
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Khaki Chapter: जब कानून के रखवाले ही लुटेरे बन जाएं, तो नागरिक सहम जाता है…जानिए कमरे में बंद कर यात्री को लूटनेवाले तीन खाकी वालों का केस

Khaki Chapter: सुप्रीम कोर्ट ने खाकी की आड़ में आम नागरिकों को डराने-धमकाने और अवैध वसूली (Extortion) करने वाले पुलिसकर्मियों पर बेहद सख्त टिप्पणी की है।

तीन पुलिसकर्मी की अग्रिम जमानत की याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने बॉम्बे हाई कोर्ट के एक पुराने फैसले को ‘अस्पष्ट’ (Cryptic) बताते हुए पलट दिया। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रेन में सफर कर रहे एक यात्री से जबरन वसूली करने के आरोपी तीन पुलिसकर्मियों की अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) को तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि जब कानून लागू करने वाले ही जबरन वसूली करने लगें, तो देश का नागरिक पूरे सिस्टम को शक की निगाह से देखने लगता है और बेहद असहाय महसूस करता है।

खाकी के सामने घुटने टेकने को मजबूर होता है नागरिक: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने पुलिसिया तंत्र के दुरुपयोग और पीड़ित नागरिक की बेबसी को बयां करते हुए अपने आदेश में कहा, जब कानून के रखवाले ही जबरन वसूली करने वाले (Extortionists) बन जाते हैं, तो आम नागरिक हैरान-परेशान रह जाता है और एक धर्मसंकट में फंस जाता है। पुलिस की इस वर्दीधारी सत्ता का विरोध करने का मतलब है, तुरंत बदले की कार्रवाई को दावत देना। ऐसे में पीड़ित नागरिक के पास वर्दी के इस खुले दुरुपयोग के सामने चुपचाप घुटने टेकने (Succumb Meekly) के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता।

क्या था पूरा मामला? (दूरंतो एक्सप्रेस में रेलवे पुलिस का खेल)

मामला: यह मामला मुंबई के एक रेलवे स्टेशन का है, जहां एक पिता अपनी बेटी के साथ यात्रा कर रहे थे।

चेकिंग के नाम पर थमाई धमकी: शिकायतकर्ता अपनी बेटी के साथ मुंबई से ‘हापा दूरंतो एक्सप्रेस’ (Hapa Duronto Express) में सफर करने वाले थे। उनके साढू (Brother-in-law) उन्हें स्टेशन छोड़ने आए थे। तभी रेलवे स्टेशन पर तैनात एंटी-सबोटॉज (तोड़फोड़ विरोधी दस्ता) के पुलिसकर्मियों ने तीनों को रोक लिया।

सोना और कैश मिला: बैग की तलाशी के दौरान पुलिसकर्मियों को 14 ग्राम का सोने का बिस्कुट (Gold Bar) और 31,900 रुपये कैश मिले। यात्री ने सोने और कैश का बिल्कुल सही और संतोषजनक स्पष्टीकरण (Explanation) भी दिया।

कमरे में बंद कर लूटा: इसके बावजूद, वर्दी पहने एक पुलिसकर्मी ने तीनों को पास के एक बंद कमरे में ले जाकर बंद कर दिया। वहां उन्हें गंदी गालियां दी गईं और डराया-धमकाया गया। आखिर में पुलिसकर्मियों ने सोने का बिस्कुट वापस करने के बदले उनका पूरा कैश (31,900 रुपये) जबरन छीन लिया।

बॉम्बे हाई कोर्ट की ‘लापरवाही’ पर सुप्रीम कोर्ट हैरान

यात्री की शिकायत पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज हुई थी। निचली अदालत (Sessions Court) ने आरोपियों की जमानत खारिज कर दी थी, लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत दे दी।

यह थी हाई कोर्ट के जमानत देते समय दलील

  • सीसीटीवी (CCTV) फुटेज में पुलिसकर्मी अपनी आईडी कार्ड पहने दिख रहे हैं।
  • फुटेज में शिकायतकर्ता और उसकी बेटी के चेहरे पर ‘तनाव या परेशानी का कोई निशान’ (Signs of Distress) नहीं दिख रहा था।
  • एफआईआर दर्ज कराने में देरी हुई और पुलिसकर्मियों का पुराना सर्विस रिकॉर्ड बेदाग रहा है।

हाईकोर्ट का तर्क सुप्रीम अदालत में खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के इस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने खुद फुटेज देखकर कहा, हम हैरान हैं कि हाई कोर्ट को फुटेज में कोई तनाव नहीं दिखा, जबकि चेहरों के भाव फुटेज में साफ भी नहीं हैं। हमने देखा कि दो वयस्क आगे चल रहे हैं और उनमें से एक घबराहट में पागलों की तरह हाथ हिलाकर (Gesturing Frantically) इशारा कर रहा है, जबकि बच्ची उनके पीछे-पीछे घिसट रही है। यह साफ तौर पर मानसिक तनाव का संकेत है। पुलिसकर्मियों के कमरे में बिताया गया समय इस अपराध को अंजाम देने के लिए काफी था।”

विश्लेषण: खाकी के दुरुपयोग पर कोर्ट के कड़े रुख के मायने

कानूनी बिंदुसुप्रीम कोर्ट का स्टैंड और इसका संदेश
अग्रिम जमानत पर कड़ाईसुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि वर्दी का रौब दिखाकर आम जनता को लूटने वाले लोक सेवकों (Public Servants) को अग्रिम जमानत जैसी कानूनी सुरक्षा आसानी से नहीं मिलनी चाहिए।
CCTV फुटेज की व्याख्याकोर्ट ने माना कि पुलिस के डर से सहमा हुआ नागरिक कैमरे के सामने रोएगा नहीं। हाथ के इशारे और चाल-ढाल भी पीड़ित के डर को साबित करने के लिए काफी हैं।
कानून के शासन की बहालीयह फैसला रेलवे स्टेशनों, एयरपोर्ट या हाइवे पर चेकिंग के नाम पर आम यात्रियों को ब्लैकमेल करने वाले भ्रष्ट पुलिसकर्मियों के लिए एक बहुत बड़ा सबक है।

बॉटमलाइन (The Bottom Line)

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला देश के हर नागरिक को यह भरोसा दिलाता है कि भले ही स्थानीय स्तर पर पुलिस अपनी सत्ता का दुरुपयोग कर ले, लेकिन देश की सर्वोच्च अदालत इस वर्दीधारी गुंडागर्दी को बर्दाश्त नहीं करेगी। पुलिस का काम नागरिक की जेब काटना नहीं, बल्कि उसकी सुरक्षा का अहसास कराना है। आरोपियों को अब जेल जाकर नियमित जमानत (Regular Bail) के लिए आवेदन करना होगा और मुकदमे का सामना करना होगा।

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