Thursday, November 5, 2026
HomeScam NoseKejriwal vs. Judiciary-2: जज के बच्चे केंद्र के वकील, मुझे न्याय की...

Kejriwal vs. Judiciary-2: जज के बच्चे केंद्र के वकील, मुझे न्याय की उम्मीद नहीं… केजरीवाल ने कहा- बापू के रास्ते पर चलकर अब चुप रहूंगा, सत्याग्रह करुंगा

Kejriwal vs. Judiciary-2: अरविंद केजरीवाल द्वारा जारी किया गया वीडियो संदेश और पत्र दिल्ली आबकारी नीति मामले में एक बड़ा संवैधानिक मोड़ ले आया है।

केजरीवाल ने सीधे तौर पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उनके सामने पेश होने से इनकार कर दिया है। केजरीवाल ने इसे महात्मा गांधी के ‘सत्याग्रह’ का नाम दिया है, जहां वे अन्याय के खिलाफ ‘शांतिपूर्ण असहयोग’ का मार्ग अपना रहे हैं। दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को केस से हटाने (Recusal) की याचिका खारिज होने के बाद, केजरीवाल ने अब एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए न्यायिक प्रक्रिया के इस हिस्से से खुद को अलग कर लिया है।

केजरीवाल के दो बड़े आरोप (Two Key Allegations)

  • केजरीवाल ने वीडियो के जरिए अपनी चिंता के दो मुख्य कारण बताए हैं।
  • वैचारिक जुड़ाव (Ideological Bias): केजरीवाल का आरोप है कि जज ‘अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद’ के कार्यक्रमों में शामिल रही हैं, जो उनकी कट्टर विरोधी विचारधारा (RSS) से जुड़ा संगठन है। उन्होंने सवाल किया, “मैं उस विचारधारा का घोर विरोधी हूँ, क्या मुझे वहां न्याय मिलेगा?”
  • हितों का टकराव (Conflict of Interest): उन्होंने दावा किया कि जस्टिस शर्मा के दोनों बच्चे केंद्र सरकार (CBI) के पैनल में वकील हैं। उनके केस का आवंटन सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता करते हैं, जो इस केस में केजरीवाल के खिलाफ खड़े हैं। केजरीवाल के अनुसार, यह सीधा ‘Conflict of Interest’ है।

गांधीवादी ‘सत्याग्रह’ का आह्वान

  • केजरीवाल ने अपने फैसले को एक कानूनी विद्रोह के बजाय ‘नैतिक स्टैंड’ के रूप में पेश किया है।
  • संवाद से सत्याग्रह: उन्होंने कहा कि बापू के अनुसार पहले ‘संवाद’ (Dialogue) करना चाहिए, जो उन्होंने रिक्यूजल याचिका के जरिए किया। जब संवाद विफल रहा, तो उन्होंने ‘असहयोग’ का रास्ता चुना।
  • न वकील, न पेशी: उन्होंने घोषणा की कि जस्टिस शर्मा की बेंच के सामने न तो वे खुद पेश होंगे और न ही उनका कोई वकील दलीलें पेश करेगा।

दिल्ली हाई कोर्ट का पक्ष (Court’s Rejection of Bias Claims)

  • इससे पहले, हाई कोर्ट ने केजरीवाल के इन तर्कों को यह कहते हुए खारिज कर दिया था।
  • पेशेवर स्वतंत्रता: जजों के परिवार के सदस्य अपना करियर चुनने के लिए स्वतंत्र हैं। केवल इसलिए कि वे सरकारी पैनल में हैं, यह नहीं माना जा सकता कि जज निष्पक्ष नहीं रहेंगे।
  • सबूतों का अभाव: कोर्ट ने कहा कि आरोप केवल अनुमान (Conjecture) पर आधारित हैं और कोई प्रत्यक्ष संबंध स्थापित नहीं किया गया है।
  • राजनीतिक बयान नहीं: जज द्वारा किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लेना उन्हें पूर्वाग्रही नहीं बनाता, जब तक कि उन्होंने कोई राजनीतिक बयान न दिया हो।

घटनाक्रम के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
तिथि27 अप्रैल, 2026 (सोमवार)।
कदमजस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की कोर्ट की कार्यवाही का बहिष्कार।
आधारवैचारिक मतभेद और जज के बच्चों का केंद्र सरकार से जुड़ा होना।
कानूनी विकल्पकेजरीवाल इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं।
भविष्य की स्थितिकोर्ट अब केजरीवाल की अनुपस्थिति में कानून के अनुसार कार्यवाही आगे बढ़ा सकता है।

न्यायपालिका की साख और व्यक्तिगत अधिकार

केजरीवाल का यह ‘सत्याग्रह’ न्यायपालिका के लिए एक जटिल स्थिति पैदा करता है। जहाँ एक तरफ कानून कहता है कि आरोपी को अपनी पसंद का जज चुनने का अधिकार नहीं है, वहीं दूसरी तरफ ‘न्याय होता हुआ दिखना चाहिए’ का सिद्धांत केजरीवाल के तर्कों को चर्चा का विषय बना देता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सुप्रीम कोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप करता है या हाई कोर्ट ‘एकतरफा’ (Ex-parte) सुनवाई करते हुए आदेश पारित करता है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
broken clouds
22.4 ° C
22.4 °
22.4 °
81 %
2.6kmh
73 %
Wed
22 °
Thu
30 °
Fri
29 °
Sat
29 °
Sun
30 °

Recent Comments