Saturday, July 25, 2026
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Judicial File Misplace: यूपी के रामपुर में CJM कार्यालय से Complaint Case की फाइल गायब…क्लर्क पर आरोप, आगे देखिए यह हुआ

Judicial File Misplace: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने न्यायिक फाइलों के रखरखाव में लापरवाही को लेकर एक कड़ा संदेश दिया है।

हाईकोर्ट के जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता ने महावीर सागर बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में क्लर्क की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने अपने खिलाफ की गई विभागीय कार्रवाई को चुनौती दी थी। कोर्ट ने रामपुर जिला अदालत के एक क्लर्क के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को बरकरार रखते हुए कहा कि न्यायिक फाइलों का गुम होना न्याय प्रशासन पर सीधा प्रहार है और ऐसे मामलों से “लोहे के हाथ” (Iron Hand) से निपटने की जरूरत है।

मामला क्या था? (Background of the Case)

  • घटना: यह मामला 2005 का है, जब रामपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के कार्यालय से एक शिकायत मामले (Complaint Case) की फाइल गायब हो गई थी।
  • कार्रवाई: जांच में दोषी पाए जाने के बाद, 2007 में क्लर्क महावीर सिंह की चार वेतन वृद्धियां (Increments) संचयी प्रभाव (Cumulative effect) के साथ रोकने का आदेश दिया गया था।
  • अपील: क्लर्क ने इस सजा के खिलाफ 2011 में अपील की थी जिसे खारिज कर दिया गया, जिसके बाद उसने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी: प्रशासनिक शुचिता सर्वोपरि

  • जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता ने न्यायिक रिकॉर्ड की सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा।
  • गंभीर आरोप: “न्यायपालिका के रिकॉर्ड से किसी न्यायिक फाइल का गुम होना या गलत जगह रखा जाना बहुत गंभीर आरोप है। यह न्याय के प्रशासन को प्रभावित करता है।”
  • कठोर कार्रवाई: कोर्ट ने जोर देकर कहा कि ऐसे मामलों को “लोहे की छड़” (Iron Rod) यानी अत्यधिक सख्ती के साथ संभाला जाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो।

क्लर्क की दलीलें और कोर्ट का जवाब

  • क्लर्क का तर्क: क्लर्क के वकील ने दलील दी कि जांच अधिकारी ने यह तय किए बिना ही क्लर्क को दोषी मान लिया कि वास्तव में फाइल गुम होने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति कौन था।
  • कोर्ट का निष्कर्ष: हाई कोर्ट ने पाया कि जांच के दौरान क्लर्क और अन्य कर्मचारियों को फाइल ढूंढने का पर्याप्त अवसर दिया गया था। प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया गया और क्लर्क को सुनवाई का पूरा मौका मिला।
  • आनुपातिक सजा: कोर्ट ने माना कि दी गई सजा ( increments रोकना) उसके दोष के अनुपात में सही है और इसमें हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
याचिकाकर्तामहावीर सागर (तत्कालीन क्लर्क, रामपुर कोर्ट)।
आरोपCJM कोर्ट से न्यायिक फाइल का गुम होना।
सजा4 इंक्रीमेंट (वेतन वृद्धि) पर रोक।
कोर्ट का संदेशन्यायिक फाइलों की सुरक्षा के लिए कर्मचारी सीधे तौर पर जवाबदेह हैं।

न्यायिक जवाबदेही

इलाहाबाद हाई कोर्ट का यह फैसला जिला अदालतों के कर्मचारियों के लिए एक चेतावनी है। न्यायिक फाइलें केवल कागज का पुलिंदा नहीं, बल्कि किसी व्यक्ति के न्याय का आधार होती हैं। उनकी गुमशुदगी न केवल न्यायिक प्रक्रिया को रोकती है, बल्कि जनता का न्यायपालिका पर से भरोसा भी कम करती है।

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