Wednesday, June 17, 2026
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Justice for Advocate: इलाज से इनकार, या संविधान का अपमान?…सुप्रीम आदेशों की धज्जियां, अस्पतालों ने क्यों कहा— यहां बेड नहीं, आगे जाओ?

Justice for Advocate: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की एक महिला वकील मधु राजपूत पर उनके पति द्वारा तलवार से किए गए जानलेवा हमले के मामले में स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognisance) लिया है।

एडवोकेट मधु राजपूत दिल्ली के न्यायालयों में प्रैक्टिस करती है

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने घटना को अत्यंत गंभीर बताते हुए तत्काल कई निर्देश जारी किए हैं। यह घटना 26 अप्रैल 2026 के रात की है, जब एडवोकेट मधु राजपूत को उनके पति ने उनके कार्यालय में बुरी तरह चाकू और तलवार से गोद दिया। इस मामले में कोर्ट ने न केवल हमले, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता पर भी सवाल उठाए हैं। एडवोकेट मधु राजपूत दिल्ली के न्यायालयों में प्रैक्टिस करती है।

अस्पतालों की संवेदनहीनता पर जांच के आदेश

  • कोर्ट को सूचित किया गया कि घायल वकील को हमले के बाद गंभीर हालत में कई अस्पतालों में ले जाया गया, लेकिन उन्होंने भर्ती करने से मना कर दिया।
  • इनकार करने वाले अस्पताल: कोर्ट ने नोट किया कि GTB, RK और कैलाश अस्पतालों ने कथित तौर पर इलाज देने से मना कर दिया था। अंत में उन्हें AIIMS ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया।
  • CJI का सवाल: “अस्पतालों ने आपातकालीन उपचार (Emergency Treatment) से इनकार क्यों किया?” कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि इस पहलू की भी जांच की जाए और रिपोर्ट सौंपी जाए।

पुलिस और जांच के लिए निर्देश

  • महिला अधिकारी को जांच: कोर्ट ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को आदेश दिया है कि इस केस की जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी (SP या Deputy SP रैंक) को सौंपी जाए, जो अधिमानतः एक महिला अधिकारी हो।
  • फरार आरोपियों की तलाश: मुख्य आरोपी (पति) को गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन वकील के ससुराल वाले, जिन पर भी आरोप हैं, अभी फरार हैं।

बच्चों की सुरक्षा और वित्तीय सहायता

  • वकील की तीन नाबालिग बेटियां (12 वर्ष, 4 वर्ष और 1 वर्ष) हैं, जिन्हें पिता ने हमले के बाद छोड़ दिया था।
    -वित्तीय मदद: कोर्ट ने NALSA (राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण) को निर्देश दिया है कि कल तक पीड़िता को इलाज और बच्चों की देखभाल के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाए।
  • बच्चों की कस्टडी: कोर्ट ने आदेश दिया कि बच्चे फिलहाल अपने नाना-नानी (Maternal Grandparents) की कस्टडी में ही रहेंगे। पुलिस को अन्य बच्चों का पता लगाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया है।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
पीड़िताएडवोकेट मधु राजपूत (दिल्ली)।
बेंचCJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची।
धाराएंBNSS की धारा 109(1) (हत्या का प्रयास) के तहत मामला दर्ज।
मुख्य मुद्दावकील पर क्रूर हमला और अस्पतालों द्वारा इलाज से इनकार।
अगला कदमअगली सुनवाई पर दिल्ली पुलिस को स्टेटस रिपोर्ट पेश करनी होगी।

सिस्टम की जवाबदेही तय होगी

सुप्रीम कोर्ट का यह हस्तक्षेप न केवल कानूनी बिरादरी के एक सदस्य की सुरक्षा के लिए है, बल्कि यह उन अस्पतालों के लिए भी एक चेतावनी है जो आपातकालीन स्थिति में मरीजों को भर्ती करने से इनकार करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि जीवन के अधिकार (Article 21) के तहत त्वरित चिकित्सा सहायता प्राप्त करना हर नागरिक का अधिकार है।

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