A Dead Man’s Statement: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए स्पेशल DGP (लॉ एंड ऑर्डर) से जवाब तलब किया है।
मामला इतना हैरान करने वाला है कि पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति का बयान दर्ज करने का दावा किया है, जिसकी मृत्यु बयान दर्ज होने की तारीख से लगभग चार महीने पहले ही हो चुकी थी। यह मामला लुधियाना पुलिस कमिश्नरेट के डेहलों पुलिस स्टेशन से जुड़ा है। अदालत एक हत्या के मामले में आरोपी मनवीर सिंह (31) की अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
मामले की विचित्र टाइमलाइन (The Impossible Timeline)
- बचाव पक्ष के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता विनोद घई ने कोर्ट के सामने पुलिस की ‘जांच’ की पोल खोलते हुए यह तथ्य रखे।
- व्यक्ति की मृत्यु: पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार जिस गवाह का बयान 19 सितंबर, 2025 को दर्ज किया गया था, उसकी मृत्यु असल में 29 मई, 2025 को ही हो चुकी थी।
- पुलिस का दावा: जांच एजेंसी ने इस ‘मृत व्यक्ति’ के बयान को सबूत के तौर पर पेश किया, जो कानूनी और तार्किक रूप से असंभव है।
केस की पृष्ठभूमि (The Murder Mystery)
- FIR: यह मामला 18 अगस्त, 2025 को दर्ज किया गया था।
- गुमशुदगी से हत्या तक: शुरुआत में 72 वर्षीय रूपिंदर कौर की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। वे दिल्ली एयरपोर्ट के लिए निकली थीं लेकिन वापस नहीं आईं।
- गुप्त सूचना: 9 सितंबर, 2025 को पुलिस ने दावा किया कि सुखजीत सिंह (सह-आरोपी) ने रूपिंदर कौर की हत्या कर दी और सबूत मिटा दिए।
- याचिकाकर्ता की भूमिका: मनवीर सिंह का नाम बाद में सुखजीत के बयान और कुछ वित्तीय लेन-देन के आधार पर जोड़ा गया। मनवीर का कहना है कि उसके खिलाफ कोई सीधा सबूत नहीं है और पुलिस ने झूठे सबूत गढ़े हैं।
हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी और निर्देश
- जस्टिस सुमीत गोयल ने इस स्थिति को अस्पष्ट और समझ से बाहर (Inexplicable) बताया।
- स्पेशल DGP को आदेश: कोर्ट ने पंजाब के स्पेशल DGP (लॉ एंड ऑर्डर) को खुद मामले की जांच करने और हलफनामे (Affidavit) के जरिए रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
- CBI जांच का विकल्प: कोर्ट ने यह विकल्प खुला रखा है कि क्या इस पूरे फर्जीवाड़े और हत्या के मामले की जांच CBI को सौंप देनी चाहिए।
- SHO की पेशी: संबंधित थाना प्रभारी (SHO) को अगली सुनवाई (18 मई, 2026) पर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में मौजूद रहने का आदेश दिया गया है।
केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| बिंदु | विवरण |
| गवाह की मृत्यु | 29 मई, 2025 |
| पुलिस द्वारा दर्ज बयान | 19 सितंबर, 2025 |
| याचिकाकर्ता | मनवीर सिंह (अग्रिम जमानत की मांग) |
| आरोप | सबूतों का फर्जीवाड़ा (Fabrication of Evidence) |
| अगली सुनवाई | 18 मई, 2026 |
सिस्टम पर बड़ा सवाल
यह मामला न केवल पंजाब पुलिस की साख पर बट्टा लगाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे जांच एजेंसियां कभी-कभी ‘केस बनाने’ के चक्कर में बुनियादी तथ्यों और मानवीय सीमाओं को भी नजरअंदाज कर देती हैं। यदि कोई पुलिस अधिकारी एक मृत व्यक्ति का बयान दर्ज दिखा सकता है, तो पूरी जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता संदिग्ध हो जाती है।

