Saturday, June 20, 2026
HomeLatest NewsAPO Qualification: कानून के छात्र ध्यान दें…बाद में मिली डिग्री से नहीं...

APO Qualification: कानून के छात्र ध्यान दें…बाद में मिली डिग्री से नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी, राजस्थान सेवा आयोग केस में पढ़ें

APO Qualification: सुप्रीम कोर्ट जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने सरकारी नौकरियों में पात्रता (Eligibility) को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति स्पष्ट की है।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

विवरणसुप्रीम कोर्ट का आदेश
पात्रता की तिथिऑनलाइन आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि।
बाद में मिली डिग्रीइसे पात्रता के लिए स्वीकार नहीं किया जाएगा।
नियमों की व्याख्याकेवल एक ही व्याख्या संभव है—जो विज्ञापन में दी गई है।
प्रभावराजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की अपील स्वीकार, छात्रों की याचिका खारिज।

APO के पदों के लिए निकाली गई भर्ती से जुड़ा मामला

कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें अपात्र कानून के छात्रों (Ineligible Law Students) को राज्य लोक सेवा आयोग (RPSC) की प्रारंभिक परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई थी। जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी भी उम्मीदवार के पास आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि तक आवश्यक शैक्षणिक योग्यता होनी चाहिए। बाद में प्राप्त की गई डिग्री या योग्यता के आधार पर उम्मीदवार को उस परीक्षा में शामिल होने का अधिकार नहीं मिलता। यह मामला राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा ‘असिस्टेंट प्रॉसिक्यूशन ऑफिसर’ (APO) के पदों के लिए निकाली गई भर्ती से जुड़ा है।

मुख्य विवाद: आवेदन की तिथि बनाम इंटरव्यू की तिथि

  • इस मामले में सबसे बड़ा कानूनी सवाल यह था कि पात्रता का निर्धारण कब होना चाहिए।
  • उम्मीदवारों का तर्क: यदि कोई व्यक्ति इंटरव्यू (साक्षात्कार) शुरू होने से पहले डिग्री प्राप्त कर लेता है, तो उसे पात्र माना जाना चाहिए।
  • सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि पात्रता का निर्धारण विज्ञापन (Advertisement) के नियमों के अनुसार आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि पर ही होगा। कोर्ट ने कहा कि भर्ती के विज्ञापन और ‘राजस्थान अभियोजन अधीनस्थ सेवा नियम, 1978’ के संयुक्त पठन से स्पष्ट है कि पात्रता की जांच आवेदन के समय दिए गए दस्तावेजों के आधार पर की जाती है।

राजस्थान हाई कोर्ट के रुख को बताया गलत

  • हाई कोर्ट ने पहले छात्रों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा था कि यदि नियमों की दो व्याख्याएं संभव हों, तो वह व्याख्या चुनी जानी चाहिए जो उम्मीदवारों के हित में हो। सुप्रीम कोर्ट ने इससे असहमति जताया।
  • नियमों की स्पष्टता: जब विज्ञापन की शर्तें स्पष्ट हों, तो प्रतियोगिता बढ़ाने या पूल बड़ा करने के नाम पर नियमों को मोड़ा नहीं जा सकता।
  • प्रशासनिक बोझ: यदि इंटरव्यू तक डिग्री प्राप्त करने वालों को अनुमति दी गई, तो यह चयन प्रक्रिया को अनिश्चित बना देगा और आयोग पर बाद में प्राप्त योग्यताओं को ट्रैक करने का अनावश्यक प्रशासनिक बोझ डालेगा।

मामले का घटनाक्रम (Timeline of the Case)

  • 7 मार्च, 2024: RPSC ने APO पदों के लिए आवेदन मांगे। कानून के अंतिम वर्ष के छात्रों ने भी आवेदन कर दिया।
  • अगस्त 2024: छात्रों ने अपनी LLB की डिग्री प्राप्त की (आवेदन की अंतिम तिथि के बाद)।
  • 29 नवंबर, 2024: RPSC ने स्पष्ट किया कि जो छात्र आवेदन के समय अंतिम वर्ष में थे या जिनके पास तब डिग्री नहीं थी, वे पात्र नहीं हैं।
  • 15 जनवरी, 2025: राजस्थान हाई कोर्ट ने छात्रों को राहत देते हुए उन्हें प्रारंभिक परीक्षा में बैठने की अनुमति दी।
  • 4 मई, 2026: सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को पूरी तरह पलट दिया।

कोर्ट का कड़ा संदेश

कोर्ट ने रेखांकित किया कि विज्ञापन की सातवीं धारा स्पष्ट रूप से कहती है कि पात्रता (आयु, शिक्षा आदि) में कमी पाए जाने पर आवेदन कभी भी रद्द किया जा सकता है। बाद में दस्तावेज जमा करने (Subsequent supplementation) का कोई प्रावधान नियमों में नहीं है।

सरकारी नौकरी की तैयारी करने वालों के लिए सबक

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उन लाखों उम्मीदवारों के लिए एक चेतावनी है जो इस उम्मीद में आवेदन करते हैं कि चयन प्रक्रिया पूरी होने तक वे अपनी डिग्री हासिल कर लेंगे। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि सरकारी भर्ती में ‘कट-ऑफ डेट’ (आवेदन की अंतिम तिथि) पत्थर की लकीर है। यदि आपके पास उस दिन आवश्यक डिग्री नहीं है, तो आप कानूनी रूप से उस पद के योग्य नहीं माने जाएंगे।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
clear sky
32.2 ° C
32.2 °
32.2 °
53 %
1.7kmh
3 %
Sat
44 °
Sun
43 °
Mon
44 °
Tue
45 °
Wed
39 °

Recent Comments