Wednesday, August 5, 2026
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Unclaimed Wealth: क्या आपको पता है…44 लाख लोग खोज चुके हैं अपना लावारिस धन, आप भी हो जाएं तैयार, पूरी खबर पढ़ें

Unclaimed Wealth: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कहा, UDGAM (Unclaimed Deposits – Gateway to Access Information) पोर्टल नागरिकों को एक ही स्थान पर कई बैंकों में जमा लावारिस धन (Unclaimed Deposits) खोजने की सुविधा प्रदान कर रहा है।

UDGAM और लावारिस धन के मुख्य आंकड़े (Key Data Points)

विवरणसांख्यिकी / जानकारी
UDGAM पोर्टल सर्चलगभग 44 लाख (अब तक)।
DEA Fund में राशि (2021)₹39,264.25 करोड़।
DEA Fund (2019)₹18,381 करोड़ (तेजी से बढ़ती राशि)।
अगली सुनवाई19 मई, 2026।

एक प्रभावी तंत्र बनाने की मांग

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और विजय बिश्नोई की पीठ पत्रकार सुचेता दलाल द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मृत जमाकर्ताओं के कानूनी वारिसों को लावारिस धन के बारे में सूचित करने के लिए एक प्रभावी तंत्र बनाने की मांग की गई है। लावारिस जमा राशि का मुद्दा देश में कितना बड़ा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि Depositor Education and Awareness (DEA) Fund में मार्च 2021 तक लगभग ₹39,264 करोड़ जमा थे।

RBI का पक्ष: UDGAM पोर्टल की सफलता

  • इंटरएक्टिव सुविधा: RBI ने बताया कि UDGAM एक इंटरएक्टिव पोर्टल है जहाँ पंजीकृत उपयोगकर्ता कई बैंकों में फैले लावारिस खातों की खोज कर सकते हैं।
  • सक्रियता: अब तक इस पोर्टल पर लगभग 44 लाख सर्च किए जा चुके हैं, जो दिखाता है कि लोग अपने या अपने परिजनों के सोए हुए खातों को खोजने में रुचि ले रहे हैं।

याचिकाकर्ता की दलील: एक ही जगह मिले सारी जानकारी

  • वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने याचिकाकर्ता की ओर से दो महत्वपूर्ण कमियां गिनाईं।
  • अपूर्ण डेटाबेस: उन्होंने तर्क दिया कि UDGAM केवल बैंकों को कवर करता है, जबकि लोगों का पैसा पोस्ट ऑफिस (Post Office) और बीमा (Insurance) कंपनियों में भी लावारिस पड़ा है।
  • एकीकरण (Integration) की मांग: भूषण ने मांग की कि एक ऐसा ‘सेंट्रलाइज्ड’ तंत्र होना चाहिए जहाँ एक ही सर्च से बैंक, पोस्ट ऑफिस और इंश्योरेंस—तीनों की जानकारी मिल सके। वर्तमान में इन्हें आपस में जोड़ा नहीं गया है।

सुप्रीम कोर्ट का रुख और सरकार को निर्देश

  • कोर्ट ने इस मामले में सरकार की सुस्ती पर सवाल उठाए हैं।
  • पॉलिसी की आवश्यकता: इससे पहले 17 मार्च को हुई सुनवाई में कोर्ट ने पूछा था कि मृत व्यक्तियों के खातों का विवरण वारिसों को क्यों नहीं दिया जा सकता? कोर्ट ने सरकार को इस पर एक स्पष्ट नीति (Policy) बनाने का निर्देश दिया था।
  • नया हलफनामा: केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि वे एक अपडेटेड हलफनामा तैयार कर रहे हैं। कोर्ट ने केंद्र को एक सप्ताह के भीतर यह हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।

DEA Fund क्या है? (Understanding DEA Fund)

2014 में स्थापित यह फंड उन खातों की राशि रखता है जो 10 साल या उससे अधिक समय से निष्क्रिय (Dormant) हैं। यदि कोई वास्तविक वारिस सामने आता है, तो उचित सत्यापन के बाद इस फंड से पैसा वापस कर दिया जाता है।

वित्तीय पारदर्शिता की ओर कदम

सुप्रीम कोर्ट में चल रही यह सुनवाई भारत के बैंकिंग इतिहास में ‘वारिसों के अधिकारों’ के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है। यदि पोस्ट ऑफिस और इंश्योरेंस डेटाबेस को भी UDGAM के साथ जोड़ दिया जाता है, तो आम नागरिकों के लिए अपने पूर्वजों की संपत्ति खोजना बेहद सरल हो जाएगा।

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