Sunday, June 28, 2026
HomeLaw Firms & Assoc.Ease of Justice: अब अदालतों में मुकदमों के लिए होंगे वेटिंग हॉल…निचली...

Ease of Justice: अब अदालतों में मुकदमों के लिए होंगे वेटिंग हॉल…निचली अदालतों के कायाकल्प को ₹401 करोड़, जानिए बदलाव, पढ़ें

Ease of Justice: केंद्रीय कानून मंत्रालय ने देश की निचली अदालतों (जिला और अधीनस्थ न्यायपालिका) के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए ₹401.50 करोड़ की पहली किस्त जारी कर दी है।

केंद्र प्रायोजित योजना की तरफ से फंड जारी

यह कदम “न्याय की सुगमता” (Ease of Justice) के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उठाया गया है। इसी के साथ, न्यायिक बुनियादी ढांचे की निगरानी के लिए एक नई उच्च स्तरीय समिति का गठन भी किया गया है। कानून मंत्रालय द्वारा जारी यह फंड केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) का हिस्सा है। इसका उद्देश्य राज्य सरकारों के प्रयासों में मदद करना है ताकि देश भर की निचली अदालतों को आधुनिक और नागरिक-केंद्रित बनाया जा सके।

योजना का विस्तार और नई सुविधाएं

  • कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने एक वर्चुअल बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।
  • कार्यकाल विस्तार: इस योजना की वर्तमान अवधि 31 मार्च, 2026 को समाप्त हो रही थी, लेकिन अब इसे अगले 5 वर्षों के लिए बढ़ाया जा रहा है। वित्त मंत्रालय ने इसे फिलहाल 30 सितंबर, 2026 तक अस्थायी विस्तार दे दिया है।
  • वेटिंग हॉल (Waiting Hall): पहली बार इस केंद्रीय योजना में ‘वादकारियों (Litigants) के लिए प्रतीक्षालय’ का नया घटक जोड़ा गया है। इससे अदालतों में आने वाले आम लोगों को बैठने और प्रतीक्षा करने की बेहतर सुविधा मिलेगी।
  • नागरिक-केंद्रित न्याय: मंत्री ने जोर दिया कि न्याय प्रणाली को नागरिकों के अनुकूल बनाना सरकार की प्राथमिकता है।

ऐतिहासिक संदर्भ और फंड की आवश्यकता

न्याय विभाग के सचिव नीरज वर्मा ने बताया कि विभाग 1993-94 से इस दिशा में काम कर रहा है। अदालतों में जजों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ कोर्ट रूम, आवासीय इकाइयों और डिजिटल बुनियादी ढांचे की मांग भी तेजी से बढ़ी है।

Also Read; Exclusive NIA Court: हर 10-15 NIA केस पर होगी एक विशेष अदालत…एक महीने में एक फैसला आना ही चाहिए, पढ़िए नई गाइडलाइन

न्यायिक बुनियादी ढांचा सलाहकार समिति (JIAC)

  • बुनियादी ढांचे के विकास को व्यवस्थित करने के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया।
  • अध्यक्षता: सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस अरविंद कुमार को इस समिति का अध्यक्ष बनाया गया है।
  • उद्देश्य: यह समिति पूरे भारत में एक “एकीकृत ढांचागत पारिस्थितिकी तंत्र” (Unified Infrastructural Ecosystem) सुनिश्चित करेगी, ताकि सभी राज्यों की अदालतों में सुविधाओं का स्तर समान हो।

मामले का सारांश (Quick Highlights)

विवरणतथ्य / अपडेट
जारी राशि₹401.50 करोड़ (पहली किस्त)।
समिति के अध्यक्षजस्टिस अरविंद कुमार (सुप्रीम कोर्ट)।
नया घटकवादकारियों के लिए आधुनिक वेटिंग हॉल।
योजना की अवधिअगले 5 वर्षों के लिए विस्तार प्रस्तावित।
मुख्य लक्ष्यजिला और अधीनस्थ अदालतों का आधुनिकीकरण।

सुलभ न्याय की ओर एक ठोस कदम

निचली अदालतें न्याय प्रणाली की नींव होती हैं जहां आम नागरिक सबसे पहले पहुंचता है। कानून मंत्रालय द्वारा फंड जारी करना और CJI द्वारा एक विशेष सलाहकार समिति का गठन करना यह दर्शाता है कि कार्यपालिका और न्यायपालिका दोनों ही अदालतों की जर्जर स्थिति को सुधारने के लिए गंभीर हैं। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर न केवल जजों की कार्यक्षमता बढ़ाएगा, बल्कि आम जनता के लिए कोर्ट आने के अनुभव को भी कम कष्टदायक बनाएगा।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
overcast clouds
40.9 ° C
40.9 °
40.9 °
28 %
3.4kmh
100 %
Sun
42 °
Mon
44 °
Tue
40 °
Wed
30 °
Thu
33 °

Recent Comments