मामला सारांश (At a Glance)
| पहलू | विवरण |
| याचिकाकर्ता | सिमी एस. (पूर्व सचिव, बार काउंसिल ऑफ केरल) |
| माननीय न्यायाधीश | न्यायमूर्ति ज़ियाद रहमान ए.ए. (Justice Ziyad Rahman A.A.) |
| मुद्दा | दबाव में दिया इस्तीफा वापस लेने के बावजूद फर्जी रिकॉर्ड बनाकर पद से हटाना |
| संबंधित कानून | केरल सेवा नियम (KSR), पार्ट I का नियम 23 |
| हाई कोर्ट का आदेश | फर्जीवाड़े के लिए BCI पदाधिकारियों को फटकार, इस्तीफा स्वीकृति रद्द और सचिव की तत्काल बहाली का निर्देश |
Bar Council of Kerala: केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने बार काउंसिल ऑफ केरल (BCK) के पूर्व पदाधिकारियों और समिति सदस्यों को सचिव के पद से हटाने के लिए दस्तावेजों में हेरफेर करने और फर्जी रिकॉर्ड तैयार करने के लिए कड़ी फटकार लगाई है।
न्यायमूर्ति ज़ियाद रहमान ए.ए. (Justice Ziyad Rahman A.A.) ने BCK की सचिव सिमी एस. (Simy S.) की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने पाया कि सचिव द्वारा अपना इस्तीफा वापस लेने के बावजूद उन्हें ड्यूटी पर लौटने से रोकने के लिए एक “कपटपूर्ण साजिश” रची गई थी।
हाई कोर्ट की प्रमुख और सख्त टिप्पणियां
- दस्तावेजों के साथ धोखाधड़ी और हेरफेर:“रिकॉर्ड से याचिकाकर्ता के वैध अधिकारों को छीनने के लिए उत्तरदाताओं (1 से 4) द्वारा दस्तावेजों में हेरफेर और मनगढ़ंत रिकॉर्ड तैयार करने के एक सुनियोजित और कपटपूर्ण प्रयास का संकेत मिलता है… एक वैधानिक निकाय (Statutory Body) होने के बावजूद उसके जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा ऐसा गैर-कानूनी तरीका अपनाया जाना एक गंभीर मामला है। ऐसे किसी निकाय से इस स्तर की धोखाधड़ी की उम्मीद नहीं की जा सकती।”
- अध्यक्ष (Chairman) को अकेले निर्णय लेने का अधिकार नहीं:
- अदालत ने स्पष्ट किया कि अध्यक्ष केवल समिति का एक सदस्य होता है। उसके पास अकेले इस्तीफा स्वीकार करने की कोई विशेष शक्ति नहीं है जो समिति को बाध्य करे।
- इसलिए, अध्यक्ष द्वारा इस्तीफा स्वीकार किए जाने की बात कानूनन अमान्य है और वह सचिव को अपना इस्तीफा वापस लेने के अधिकार से वंचित नहीं कर सकती।
- रात के समय 75 किमी दूर दस्तावेज भेजने का फर्जी दावा:
- प्रतिवादियों ने दावा किया था कि बैठक समाप्त होने (रात 8:30 बजे) के बाद उसी दिन इस्तीफा अध्यक्ष के चावक्कड़ स्थित निवास (जो कार्यालय से 75 किमी दूर है) भेजा गया और वहां उन्होंने इसे स्वीकार किया।
- कोर्ट ने कहा कि रात के समय इतनी दूरी तय करके उसी दिन स्वीकृति हस्ताक्षर पाना व्यावहारिक रूप से असंभव है। इसके अलावा, आवक-जावक (Inward/Outward) रजिस्टरों में इसकी कोई प्रविष्टि (Entry) न होना इस हेरफेर की पुष्टि करता है।
मामले का पृष्ठभूमि विवरण (Case Background)
- दबाव में दिया गया इस्तीफा: याचिकाकर्ता (सिमी एस.) ने समिति सदस्यों के दबाव में आकर इस्तीफा दिया था। बैठक के मिनट्स तैयार करने के लिए उन्होंने अपने फोन पर बैठक रिकॉर्ड की थी, जिसे गैर-कानूनी बताकर उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई का डर दिखाया गया और इस्तीफा लिया गया।
- अगले ही दिन इस्तीफा वापसी: याचिकाकर्ता ने अगले ही दिन अपना इस्तीफा वापस लेने का पत्र सौंप दिया।
- अस्वीकृति और नई नियुक्ति: हालांकि, बार काउंसिल ने यह दावा करते हुए इस्तीफा वापस लेने से मना कर दिया कि अध्यक्ष ने इसे पहले ही स्वीकार कर लिया था और समिति ने इसकी पुष्टि (Ratification) कर दी थी। इसके बाद उनकी जगह एक नए व्यक्ति को सचिव नियुक्त कर दिया गया।
केरल सेवा नियम (KSR) और कोर्ट का फैसला
अदालत ने केरल सर्विस रूल्स (KSR) के नियम 23 (Rule 23 Chapter III Part I KSR) का हवाला देते हुए फैसला सुनाया:
- इस्तीफा वापसी का अधिकार: इस्तीफा तब तक प्रभावी नहीं होता जब तक कि इसे सक्षम प्राधिकारी द्वारा वैध रूप से स्वीकार न कर लिया जाए और कर्मचारी को सेवामुक्त ना कर दिया जाए। याचिकाकर्ता ने वैध स्वीकृति से पहले ही अपना इस्तीफा वापस ले लिया था।
- अधिसूचनाएं रद्द: कोर्ट ने चेयरमैन द्वारा भेजे गए उन दोनों पत्रों को रद्द कर दिया जिनमें इस्तीफा स्वीकार करने और इस्तीफा वापसी की याचिका खारिज करने की बात कही गई थी।
- पुनर्बहाली का आदेश: हाई कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ केरल (BCK) को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता की जगह नियुक्त किए गए नए व्यक्ति को हटाकर सिमी एस. को तुरंत सचिव के पद पर पुनर्बहाल (Rejoin) किया जाए।

