Wednesday, November 4, 2026
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Court News: Uniform Civil Code को लेकर किस प्रदेश में दी जा रही चुनौती, पढ़िए…

Court News: उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) अधिनियम और उसके नियमों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है।

लगातार यूसीसी को दी जा रही चुनौती

नैनीताल उच्च न्यायालय में यूसीसी को लेकर एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है। इसमें उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद से यूसीसी को लगातार चुनौती दी जा रही है। डॉ. उमा भट्ट, उत्तराखंड महिला मंच की कमला पंत और समाजवादी लोक मंच के मुनीश कुमार ने यूसीसी अधिनियम और उसके नियमों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए एक जनहित याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट की वकील वृंदा ग्रोवर इस मामले की पैरवी कर रही हैं।

आरोप: युवाओं के अपने जीवन साथी चुनने के अधिकार का उल्लंघन

याचिकाकर्ताओं ने यूसीसी को पूरी तरह से जनविरोधी, असंवैधानिक और निजता का उल्लंघन बताया है और तर्क दिया है कि यह कानून महिलाओं के खिलाफ भेदभाव और समाज में असमानता को बढ़ावा देगा। उन्होंने यह भी कहा है कि इस कानून के जरिए संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19 और 21 का उल्लंघन किया गया है. याचिका में आगे आरोप लगाया गया है कि यह कानून युवाओं के अपने जीवन साथी चुनने के अधिकार का उल्लंघन करता है।

यूसीसी के कुछ प्रावधानों के बारे में अफवाहों को खारिज कर दिया

इससे पहले, उत्तराखंड सरकार के गृह विभाग ने यूसीसी के कुछ प्रावधानों के बारे में अफवाहों को खारिज कर दिया, विशेष रूप से उन दावों को कि बाहरी लोग अधिवास प्रमाण पत्र के लिए पात्र होंगे, उन्हें गलत और भ्रामक बताया। गृह विभाग ने कहा, “यह देखने में आया है कि कुछ लोग यूसीसी के कुछ प्रावधानों के बारे में सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से भ्रामक और गलत जानकारी फैला रहे हैं, जैसे कि बाहरी लोगों को यूसीसी के तहत विवाह पंजीकरण कराने पर राज्य का निवास प्रमाण पत्र (निवास) मिल जाएगा। यह एक गलत और भ्रामक तथ्य है।

विवाह पंजीकरण का अधिवास प्रमाण पत्र से कोई संबंध नहीं

उत्तराखंड सरकार ने स्पष्ट किया कि विवाह पंजीकरण का अधिवास प्रमाण पत्र से कोई संबंध नहीं है और यूसीसी में विवाह या अन्य पंजीकरण के आधार पर अधिवास देने का कोई प्रावधान नहीं है। गृह विभाग ने यह भी चेतावनी दी कि यूसीसी के बारे में भ्रामक जानकारी और अफवाहें फैलाने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 353 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने जनता से जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने और अफवाहें फैलाने से बचने का आग्रह किया। यदि किसी को यूसीसी के किसी भी प्रावधान के बारे में संदेह है या स्पष्टीकरण की आवश्यकता है, तो वे आधिकारिक चैनलों के माध्यम से उत्तराखंड सरकार के गृह विभाग से संपर्क कर सकते हैं।

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