Sunday, August 16, 2026
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Delhi News: सुपारी के गलत वर्गीकरण…सीमा शुल्क में गड़बड़ी का आरोप, यह कहा हाईकोर्ट ने

Delhi News: हाईकोर्ट ने सीमा शुल्क के उद्देश्य से सुपारी के कथित गलत वर्गीकरण से संबंधित वरिष्ठ सीमा शुल्क अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाली एक याचिका पर केंद्रीय सतर्कता आयोग से जवाब मांगा है।

सीबीआईसी से चार सप्ताह के भीतर हलफानामा मांगा

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति रजनीश कुमार गुप्ता की पीठ ने याचिका पर केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को नोटिस जारी किया, इसमें सीमा शुल्क के उद्देश्य से सुपारी के कथित गलत वर्गीकरण के मुद्दे को हल करने की भी मांग की गई थी। अदालत ने कहा, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) से चार सप्ताह के भीतर व्यापक हलफनामा दायर किया जाना चाहिए कि पिछले आदेश में उठाए गए मुद्दों के संबंध में किसी स्पष्टीकरण की आवश्यकता है या नहीं। याचिका की विचारणीयता का प्रश्न खुला रखा गया है और आठ मई को सुनवाई की अगली तारीख पर इस पर विचार किया जाएगा।

कथित तौर पर बड़े पैमाने पर गलत वर्गीकरण हुआ

सीमा शुल्क हाउस एजेंट (सीएचए) ने अपनी याचिका में दावा किया कि सुपारी पर 100 प्रतिशत या 50 प्रतिशत मूल सीमा शुल्क लगेगा या नहीं, इस पर अस्पष्टता के परिणामस्वरूप कथित तौर पर बड़े पैमाने पर गलत वर्गीकरण हुआ है। इससे टैक्स की चोरी हो रही है और सरकार को महत्वपूर्ण वित्तीय नुकसान हो रहा है। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को सूचित किया कि उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए केंद्रीय सतर्कता आयोग और सरकार के अन्य उच्च अधिकारियों के पास भी शिकायतें दर्ज की गई हैं, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण के बावजूद इस अस्पष्टता के आधार पर कथित तौर पर बड़े पैमाने पर शुल्क चोरी में लगे हुए हैं। याचिका में वरिष्ठ कस्टम अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं।

बार-बार शिकायतों के बावजूद अफसरों ने नहीं लिया निर्णय

याचिकाकर्ता बजरंग लाल शर्मा का प्रतिनिधित्व करने वाली वकील कामिनी लाउ ने कहा कि इस मुद्दे ने याचिकाकर्ता जैसे सीएचए के लिए भारी मुश्किलें पैदा कर दी हैं क्योंकि वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ बार-बार शिकायतों के बावजूद कोई निर्णय नहीं लिया गया है। याचिकाकर्ता, कई सीएचए के साथ, सीमा शुल्क अधिकारियों के एक समूह से बार-बार उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं।

आयातित सुपारी की कथित गलत घोषणा…

राष्ट्रीय सीमा शुल्क लक्ष्य केंद्र (एनसीटीसी) को उबली हुई सुपारी, एपीआई सुपारी, चिकनी सुपारी और स्वादयुक्त सुपारी जैसे विभिन्न नामों के तहत आयातित सुपारी की कथित गलत घोषणा और गलत वर्गीकरण के संबंध में कई शिकायतें मिलीं।
याचिका में दावा किया गया कि इस गलत वर्गीकरण ने आयातकों को केवल 50 प्रतिशत बीसीडी का भुगतान करके 100 प्रतिशत मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) से बचने की अनुमति दी और विदेश व्यापार महानिदेशालय द्वारा निर्धारित न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईपी) शर्तों को भी दरकिनार कर दिया।

मार्च 2022 को सीवीसी को भेजी गई थी शिकायत

याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता ने मार्च 2022 में केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को एक शिकायत सौंपी थी, जिसमें एक वरिष्ठ कस्टम अधिकारी के खिलाफ अन्य लोगों की मिलीभगत से शुल्क चोरी में कथित संलिप्तता के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई थी क्योंकि गलत वर्गीकरण के माध्यम से माल की चल रही निकासी से महत्वपूर्ण राजस्व हानि हो रही थी। यह दावा किया गया कि प्रतिवादी विभाग कोई प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहे। इससे टैक्स चोरी घोटाला अनियंत्रित रूप से जारी रहा। याचिका में केंद्र के अलावा वित्त मंत्रालय, सीबीआईसी, सीवीसी और सतर्कता, सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद शुल्क महानिदेशालय को प्रतिवादी बनाया गया है।

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