Friday, October 16, 2026
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PhD Struggler: दिन में कॉलेज में प्रोफेसर, रात में कैब ड्राइवर…शिक्षा व्यवस्था को आईना दिखाती डॉ. राजा की बेबसी आंखें खोल देंगी, यहां पढ़ें

PhD Struggler: देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था और संविदा (Contract) शिक्षकों के शोषण पर एक बेहद भावुक और आंखें खोल देने वाली कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

प्रेसिडेन्सी कॉलेज में कांट्रैक्ट लेक्चरर पद पर कार्यरत

चेन्नई के प्रतिष्ठित प्रेसिडेन्सी कॉलेज (Presidency College) में कांट्रैक्ट लेक्चरर के रूप में कार्यरत डॉ. ई. तिरुमलाई राजा (Dr. E Tirumalai Raja) की आपबीती ने एक बार फिर भारत में उच्च शिक्षित युवाओं की बेरोजगारी और कम वेतन के गंभीर मुद्दे को बहस के केंद्र में ला दिया है। इंग्लिश लिटरेचर में PhD, MPhil, MA, साइकोलॉजी में MSc, BEd और यूजीसी (UGC) जर्नल्स में दर्जनों रिसर्च पेपर… ये किसी भी शिक्षाविद के लिए एक शानदार और सुरक्षित करियर की गारंटी होने चाहिए थे। लेकिन आज भारत में कड़वी हकीकत यह है कि इतनी डिग्रियों के बाद भी एक प्रोफेसर को अपने परिवार का पेट पालने के लिए कॉलेज की ड्यूटी के बाद रात में कैब (Ola/Uber) चलानी पड़ रही है।

डिग्रियों का अंबार, लेकिन सैलरी सिर्फ ₹30,000

भारतीय रेलवे लेखा सेवा (IRAS) के एक वरिष्ठ अधिकारी अनंत रूपनगुडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर डॉ. राजा की शैक्षणिक उपलब्धियों का प्रोफाइल शेयर करते हुए शिक्षा जगत से उन्हें एक स्थायी (Permanent) नौकरी दिलाने में मदद की अपील की, जिसके बाद यह मामला देश के सामने आया।

डॉ. राजा का शैक्षणिक और प्रशासनिक रिकॉर्ड किसी भी यूनिवर्सिटी के लिए गर्व की बात हो सकता है।

शैक्षणिक डिग्रियां: उन्होंने इंग्लिश लिटरेचर में PhD (विषय: “Black Humour in Indo-Anglian Writing”), MPhil, और MA किया है। इसके अलावा उनके पास MSc (साइकोलॉजी), BEd और DTEd (डिप्लोमा इन टीचर एजुकेशन) जैसी कई अन्य उच्च डिग्रियां हैं।

प्रशासनिक अनुभव: वे केवल पढ़ाते नहीं हैं, बल्कि कॉलेजों में IQAC (Internal Quality Assurance Cell) कोऑर्डिनेटर, एग्जामिनेशन सेल कोऑर्डिनेटर, ग्रीवांस रीड्रेसल कोऑर्डिनेटर और नेशनल सर्विस स्कीम (NSS) व यूथ रेड क्रॉस के प्रोग्राम ऑफिसर भी रह चुके हैं।

रिसर्च और लेक्चर: उन्होंने यूजीसी-लिस्टेड जर्नल्स में कई लेख लिखे हैं, डिजिटल ह्यूमैनिटीज, लिटरेरी स्टडीज और इंग्लिश कम्युनिकेशन पर दर्जनों राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सेमिनारों में मुख्य वक्ता (Keynote Speaker) के रूप में व्याख्यान दिया है।

क्लासरूम से कैब की सीट तक का संघर्ष

इतनी भारी-भरकम योग्यताओं और सालों के शिक्षण अनुभव के बावजूद, डॉ. राजा को भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक स्थायी असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी नहीं मिल सकी।

नामक्कल में ₹20,000 की नौकरी:शुरुआती दिनों में नामक्कल (तमिलनाडु) के एक कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में काम करते हुए उन्हें हर महीने महज ₹20,000 मिलते थे, जिससे घर चलाना असंभव था।

चेन्नई में ₹30,000 का मानदेय:वर्तमान में वे चेन्नई के प्रेसिडेन्सी कॉलेज में कॉन्ट्रैक्ट पर पढ़ा रहे हैं, जहां उन्हें ₹30,000 प्रति माह मानदेय मिलता है। चेन्नई जैसे महानगर में इस सैलरी में रहना एक बड़ी चुनौती है।

सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा: शिक्षा नीति पर उठे गंभीर सवाल

डॉ. राजा की कहानी वायरल होने के बाद इंटरनेट पर नेटिजन्स और शिक्षाविदों का गुस्सा फूट पड़ा है। लोगों का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति का संघर्ष नहीं है, बल्कि देश के हजारों ‘अतिथि विद्वानों’ (Guest Lecturers) और संविदा शिक्षकों की सामूहिक नियति है:

नौकरी की असुरक्षा: भारत के सरकारी और निजी कॉलेजों में नेट (NET), स्लेट (SLET) और पीएचडी क्वालिफाइड शिक्षकों को बेहद कम वेतन पर सालों-साल कॉन्ट्रैक्ट पर रखा जाता है, जहां उन्हें न तो पीएफ (PF) जैसी सुविधाएं मिलती हैं और न ही नौकरी की कोई सुरक्षा (Job Security) होती है।

सिस्टम पर तंज: सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा, “जो व्यक्ति युवाओं का भविष्य संवार रहा है, उसका अपना भविष्य अंधकार में है। जब एक पीएचडी होल्डर को कैब चलानी पड़े, तो समझ जाना चाहिए कि हमारी डिग्री और शिक्षा नीति के मूल्यांकन में कहीं कोई बहुत बड़ी खराबी है।”

क्रेडेंशियल शीट: डॉ. ई. तिरुमलाई राजा (शैक्षणिक एवं विधिक स्थिति)

शैक्षणिक और प्रशासनिक श्रेणियांविवरण और वर्तमान विधिक-आर्थिक रिकॉर्ड
नाम और वर्तमान पदडॉ. ई. तिरुमलाई राजा, कॉन्ट्रैक्ट लेक्चरर (प्रेसिडेन्सी कॉलेज, चेन्नई)
सर्वोच्च शैक्षणिक योग्यताPhD (इंग्लिश लिटरेचर), MPhil, MSc (साइकोलॉजी), BEd
अतिरिक्त विधिक/शैक्षणिक कार्यIQAC कोऑर्डिनेटर, यूनिवर्सिटी प्रश्नपत्र निर्माता, NSS प्रोग्राम ऑफिसर
मासिक आय (टीचिंग से)₹30,000 प्रति माह (अस्थायी/संविदा पद)
पूरक आय का साधनकॉलेज के बाद पार्ट-टाइम कॉल टैक्सी/कैब ड्राइविंग

यदि एक पीएचडी स्कॉलर और रिसर्चर को सम्मानजनक वेतन और स्थायी रोजगार नहीं मिल पा रहा है, तो यह आने वाली पीढ़ी को शोध और अकादमिक क्षेत्र से पूरी तरह विमुख कर देगा। सरकारों को कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम को खत्म कर शिक्षाविदों को उनका वाजिब हक और सम्मान देना ही होगा, वरना क्लासरूम खाली हो जाएंगे और कैब की लाइनें लंबी होती जाएंगी।

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