केस सारांश: Joshy KJ v. State of Kerala
| पहलू | विवरण |
| अदालत / न्यायाधीश | केरल उच्च न्यायालय — जस्टिस ए. बदरुद्दीन |
| प्रासंगिक कानून | POCSO Act धारा 3(b)/4, IPC धारा 375(b)/376, 354B, 506(i) |
| मुख्य कानूनी सिद्धांत | योनि के बाहरी हिस्से पर किसी वस्तु/डिवाइस को स्पर्श/प्रेस करना भी ‘Penetratative Sexual Assault’ और ‘Rape’ की श्रेणी में आता है। |
| अंतिम निर्णय | आरोपी की अपील खारिज; निचली अदालत की 10 साल की सजा बरकरार। |
POCSO Act: केरल हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कानूनी फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि किसी नाबालिग लड़की के गुप्तांग/योनि के द्वार (Vaginal Opening / Vulva) पर वाइब्रेटिंग डिवाइस या कोई वस्तु रखना कानूनी रूप से ‘पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट’ (POCSO Act) और रेप (IPC Section 375) के तहत अपराध माना जाएगा।
जस्टिस ए. बदरुद्दीन (Justice A Badharudeen) की एकल पीठ ने कहा कि इन अपराधों को सिद्ध करने के लिए कानून में गहरे प्रवेश (Deeper Penetration) के सबूत की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि दोनों कानूनों में *”किसी भी सीमा तक प्रवेश” (To Any Extent) शब्द का प्रयोग किया गया है।
‘किसी भी सीमा तक प्रवेश’ (To Any Extent) की व्याख्या
अदालत ने Joshy KJ v. State of Kerala मामले में 28 जुलाई को फैसला सुनाते हुए IPC धारा 375(b) और POCSO एक्ट की धारा 3(b) की व्याख्या की:
- कानूनी दायरा: यदि कोई वस्तु योनि के बाहरी हिस्से जैसे Labia Majora या Vulva (जो योनि का ही भाग हैं) पर रखी जाती है, तो कानून की नजर में यह ‘प्रवेश’ (Insertion) की शर्त को पूरा करता है।
- गहरे प्रवेश की आवश्यकता नहीं: अभियुक्त का यह तर्क खारिज कर दिया गया कि डिवाइस से शरीर के भीतर गहरा प्रवेश नहीं हुआ था। कोर्ट ने कहा कि चालू अवस्था में वाइब्रेटिंग मशीन को पीड़िता के गुप्तांग पर जबरन रखना ही अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त है।
मामले की पृष्ठभूमि (Case Background)
- घटना (जुलाई 2019): 17 वर्षीय पीड़िता एक कॉस्मेटोलॉजी सेंटर में काम करती थी, जहां आरोपी मैनेजर के रूप में कार्यरत था। आरोपी ने उसे एक ट्रीटमेंट रूम में ले जाकर कपड़े उतरवाए और लिंग के आकार वाले एक्सेसरी से जुड़े वाइब्रेटिंग डिवाइस को जबरन उसके गुप्तांग पर रखा।
- धमकी और देरी: आरोपी ने पीड़िता को किसी से न बताने की धमकी दी। डर और बदनामी के भय से पीड़िता ने शिकायत दर्ज कराने में समय लिया।
- ट्रायल कोर्ट का फैसला: पोक्सो कोर्ट ने आरोपी को पोक्सो एक्ट, IPC धारा 375B (रेप), 354B (विवस्त्र करने के इरादे से हमला) और 506(i) (आपराधिक धमकी) का दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
हाई कोर्ट द्वारा बचाव पक्ष के तर्कों का खंडन
| बचाव पक्ष का तर्क | केरल हाई कोर्ट का निष्कर्ष |
| प्रवेश (Penetration) साबित नहीं हुआ | कानून में ‘किसी भी सीमा तक’ (To any extent) शब्द है। योनि के द्वार (Vulva) पर डिवाइस स्पर्श/प्रेस करना भी ‘प्रवेश’ माना जाएगा। |
| चिकित्सीय साक्ष्य (Medical Evidence) का अभाव | पीड़िता का बयान सुसंगत और विश्वसनीय है, जो ऐसे मामलों में दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त है। |
| FIR दर्ज कराने में 2 साल की देरी | आरोपी की धमकियों और मालिक के डर के कारण हुई देरी की पीड़िता ने तार्किक और संतोषजनक व्याख्या की है। |

