हाईकोर्ट के मुख्य निष्कर्ष और कानूनी तर्क
- क्षेत्रीय भाषा में कॉपी करना भी गैर-कानूनी: न्यायमूर्ति के. कुमारेश बाबू ने प्रतिवादी की दलीलों को खारिज करते हुए कहा:“प्रतिवादी द्वारा क्षेत्रीय भाषा में ध्वन्यात्मक और दृश्य रूप से समान ट्रेडमार्क/डिवाइस का उपयोग करने का प्रयास, उसे वादी के स्थापित ट्रेडमार्क का उल्लंघन करने का अधिकार नहीं देता है, जिसकी बाजार में अच्छी प्रतिष्ठा और साख है।” — मद्रास हाईकोर्ट
- पूर्व उपयोगकर्ता (Prior User) का सिद्धांत: अदालत ने दस्तावेजों का अवलोकन कर पाया कि प्रतिवादी ने 2023 में ‘प्रस्तावित उपयोग’ (Proposed to be used) के आधार पर आवेदन किया था, जबकि वादी कंपनी काफी समय पहले से ही इस ट्रेडमार्क का उपयोग कर रही थी। कानून में पहले से इस्तेमाल करने वाले (Prior User) के अधिकारों को प्राथमिकता दी जाती है।
- ट्रेड ड्रेस और कॉपीराइट का उल्लंघन: हाईकोर्ट ने माना कि केवल नाम ही नहीं, बल्कि तालों का समग्र रूप (Overall Appearance), रंग संयोजन (Colour Combination) और कलात्मक कार्य भी वादी के उत्पाद से हूबहू चुराया गया है, जो कॉपीराइट का भी उल्लंघन है।
चेन्नई: मद्रास हाईकोर्ट ने बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights – IPR), ट्रेडमार्क उल्लंघन और ट्रेड ड्रेस की सुरक्षा को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
न्यायमूर्ति के. कुमारेश बाबू की एकल पीठ ने 7 सितंबर 2026 के अपने आदेश में प्रतिवादी विकास मंडोथ की अंतरिम रोक हटाने (Vacate Injunction) की अर्जियों को खारिज करते हुए ‘GLOBE’ ट्रेडमार्क के तमिल रूपांतरण और तालों की पैकेजिंग/ट्रेड ड्रेस के उपयोग पर लगी अंतरिम रोक को पूर्ण (Absolute) कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी प्रतिष्ठित और पंजीकृत ट्रेडमार्क के ध्वन्यात्मक (Phonetically) और दृश्य रूप से समान (Visually Similar) संस्करण को किसी क्षेत्रीय भाषा (Vernacular Language) में अनुवादित या रूपांतरित करके उपयोग करना ट्रेडमार्क का सीधा उल्लंघन है। केवल भाषा बदलने मात्र से किसी को मूल ब्रांड की ख्याति (Goodwill & Reputation) का अनुचित लाभ उठाने का अधिकार नहीं मिल जाता [विकास बनाम शंघाई हुआनकियू (Vikas v. Shanghai Huanqiu)]।
उच्च न्यायालय की प्रमुख विधिक टिप्पणियां
1. क्षेत्रीय भाषा में समान ट्रेडमार्क का उपयोग भी उल्लंघन ट्रेडमार्क के ध्वन्यात्मक और दृश्य तत्वों का विश्लेषण करते हुए न्यायमूर्ति के. कुमारेश बाबू ने कहा: “प्रतिवादी द्वारा किसी क्षेत्रीय भाषा में ध्वन्यात्मक और दृश्य रूप से समान ट्रेडमार्क/डिवाइस का उपयोग करने का प्रयास उसे वादी के ट्रेडमार्क का उल्लंघन करने का अधिकार नहीं देता है, जिसने बाजार में एक मजबूत प्रतिष्ठा और साख (Goodwill) स्थापित की है।”
2. पूर्व उपयोगकर्ता (Prior User) का अधिकार सर्वोपरि
- अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर पाया कि वादी कंपनी वैश्विक और भारतीय बाजार में ‘GLOBE’ ट्रेडमार्क की पूर्व और निरंतर उपयोगकर्ता (Prior and continuous user) है।
- प्रतिवादी ने 2023 में जब ट्रेडमार्क आवेदन दाखिल किया था, तो उसमें स्पष्ट लिखा था कि यह मार्क “उपयोग हेतु प्रस्तावित” (Proposed to be used) है। इसलिए प्रतिवादी का पूर्व उपयोगकर्ता होने का दावा निराधार साबित हुआ।
3. ट्रेड ड्रेस और कॉपीराइट का उल्लंघन
- अदालत ने माना कि प्रतिवादी ने न केवल नाम का अनुवाद किया, बल्कि वादी के तालों की कलात्मक कृति (Artistic Work), रंग संयोजन (Colour Combination), समग्र ट्रेड ड्रेस और पैकेजिंग की भी नकल की, जिससे आम खरीदारों के बीच भ्रम (Deceptive Similarity) पैदा होने की पूरी संभावना है।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि (तालियों पर ‘GLOBE’ ट्रेडमार्क विवाद)
- वादी पक्ष: शंघाई हुआनकियू लॉक मेकिंग कंपनी लिमिटेड और प्रिंस इम्पेक्स के प्रोप्राइटर वलाराम (Plaintiffs)। वादी पक्ष ‘GLOBE’ ट्रेडमार्क के तहत तालों का निर्माण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिक्री करता है।
- विवाद की उत्पत्ति: वादी ने आरोप लगाया कि प्रतिवादी (विकास मंडोथ) तालों पर तमिल भाषा में लिखे “Globe” शब्द और समान डिज़ाइन के साथ अपने उत्पाद बेच रहा है, जिससे उपभोक्ताओं में धोखा और वादी के व्यावसायिक हितों को नुकसान पहुंच रहा है।
- पूर्व अंतरिम आदेश: 28 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट ने प्रतिवादी के खिलाफ एकपक्षीय अंतरिम निषेधाज्ञा (Ex-parte Injunction) पारित की थी, जिसे रद्द कराने के लिए प्रतिवादी ने अर्जी दाखिल की थी।
प्रतिवादी के तर्क और कोर्ट का खंडन
- प्रतिवादी का बचाव: विकास मंडोथ ने तर्क दिया कि उसने उत्पाद की प्रकृति के अनुसार स्वतंत्र रूप से तमिल मार्क तैयार किया था और उसका मार्क पंजीकृत है, इसलिए उसे इस्तेमाल से नहीं रोका जा सकता।
- हाईकोर्ट का निष्कर्ष
- कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रेडमार्क पंजीकरण मालिक को उपयोग का अधिकार देता है, लेकिन कानून दूसरे पक्ष को उस पंजीकरण को रद्द/सुधार (Rectification/Cancellation) कराने का अधिकार भी देता है।
- ट्रेडमार्क रजिस्ट्री के समक्ष प्रतिवादी के मार्क के खिलाफ आपत्ति और रद्दीकरण की कार्यवाही पहले से लंबित है। ऐसे विवादित बिंदुओं का अंतिम फैसला ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर होगा।
हाईकोर्ट का अंतिम आदेश
- निषेधाज्ञा की पुष्टि: उच्च न्यायालय ने पूर्व में दिए गए निषेधाज्ञा आदेश को पूर्ण रूप से प्रभावी (Absolute) बनाए रखा।
- कलात्मक कृति व ट्रेड ड्रेस पर संरक्षण: प्रतिवादी को ‘GLOBE’ के तमिल संस्करण, संबंधित रंग संयोजन और वादी के ट्रेड ड्रेस वाले ताले बेचने से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: ट्रेडमार्क वाद (अंतरिम निषेधाज्ञा एवं ट्रेड ड्रेस उल्लंघन विवाद)
- प्रासंगिक कानून: व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 (Trade Marks Act, 1999) की धारा 29 (ट्रेडमार्क उल्लंघन) एवं धारा 27(2) (पासिंग ऑफ); कॉपीराइट अधिनियम, 1957 (कलात्मक कृति व ट्रेड ड्रेस संरक्षण)
- विधिक प्रतिनिधित्व:
- वादी पक्ष की ओर से: अधिवक्ता रमेश गणपति
- प्रतिवादी (मंडोथ) की ओर से: अधिवक्ता जयेश कुमार डागा
- पीठ: न्यायमूर्ति के. कुमारेश बाबू (मद्रास उच्च न्यायालय)
Property Rights: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court) |
| पीठासीन न्यायाधीश | न्यायमूर्ति के. कुमारेश बाबू (Justice K Kumaresh Babu) |
| वादी (Plaintiffs) | शंघाई हुआनक्यू लॉक मेकिंग कंपनी लि. (Shanghai Huanqiu) एवं अन्य |
| प्रतिवादी (Defendant) | विकास मंदोत (Vikas Mandoth) |
| मुख्य विवाद | “GLOBE” ट्रेडमार्क और ताले के ट्रेड ड्रेस/रंग संयोजन का तमिल भाषा में इस्तेमाल। |
| अदालत का फैसला | अंतरिम रोक (Injunction) बरकरार; स्थानीय भाषा में मिलता-जुलता नाम इस्तेमाल करने से रोका गया। |

