केस का संक्षिप्त ब्योरा (Case Snapshot)
| पहलू | विधिक विवरण |
| संबंधित अदालत | इलाहाबाद उच्च न्यायालय (प्रयागराज) |
| माननीय पीठ | जस्टिस अतुल श्रीधरन एवं जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र |
| केस का प्रकार | समीक्षा याचिका (Review Petition in Land Acquisition Matter) |
| याचिकाकर्ता | बरेली विकास प्राधिकरण (Bareilly Development Authority – BDA) |
| मुख्य कानूनी मुद्दा | टाइप की गई कॉपी में फर्जी क्लॉज़ जोड़कर कोर्ट से आदेश हासिल करना (Fraud on Court) |
| अदालत की कार्रवाई | धोखाधड़ी का फैसला रद्द; वकीलों पर Perjury का केस दर्ज करने व लाइसेंस रद्द करने का आदेश। |
Fraud on Court-II: अदालत के साथ “धोखाधड़ी (Fraud on Court)” करके अपने मुवक्किल के पक्ष में फैसला हासिल करने के एक गंभीर मामले में इलाहाबाद हाईकोर्टने बेहद सख्त रुख अपनाया है। हाई कोर्ट ने दोषी पाए गए दो वकीलों के खिलाफ झूठे साक्ष्य/बयान देने (Perjury) के आरोप में आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया है।
जस्टिस अतुल श्रीधरन (Justice Atul Sreedharan) और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र (Justice Kshitij Shailendra) की खंडपीठ ने बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) द्वारा दायर समीक्षा याचिका (Review Petition) को स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया। कानूनी पेशे में आ रही नैतिक गिरावट पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए अदालत ने बार (Bar) को आत्मनिरीक्षण (Introspection) करने की सलाह दी और एक तीखी टिप्पणी की [बरेली विकास प्राधिकरण बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य]।
हाई कोर्ट की कड़ी और तीखी टिप्पणियां
अदालत के साथ धोखाधड़ी और वकालत के पेशे पर सवाल
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पेशे के गिरते स्तर पर सवाल
• "क्या बार के सदस्यों के अलावा कोई और आज इस पेशे को
'उदात्त/महान पेशा' (Noble Profession) कहता है?"
टाइपिंग की गलती या धोखाधड़ी?
• 2016 के मूल अवॉर्ड में जो ब्याज दर (9% व 15%)
थी ही नहीं, उसे टाइप कॉपी में जोड़ना धोखा है।
उदात्त पेशे” (Noble Profession) पर तीखा सवाल
सुनवाई के दौरान जस्टिस अतुल श्रीधरन की अगुवाई वाली पीठ ने टिप्पणी की, अक्सर कहा जाता है कि वकालत का पेशा एक उदात्त/महान पेशा (Noble Profession) है। हालांकि, बार (Bar) को इस बात पर गहराई से आत्मनिरीक्षण करने की आवश्यकता है कि क्या बार के सदस्यों के अलावा कोई और अब वकालत के पेशे को ‘उदात्त पेशा’ कहता है?
टाइपिंग की गलती (Typographical Error) और धोखे में अंतर होता है
वकीलों द्वारा इसे अनजाने में हुई टाइपिंग की गलती बताए जाने पर कोर्ट ने इसे सिरे से खारिज कर दिया, टाइपिंग की गलती से वर्तनी (Spelling) या गणना (Calculation) की गलती हो सकती है। लेकिन जब 2016 के मूल अवॉर्ड में 9% और 15% ब्याज का कोई जिक्र ही नहीं था, तो टाइप की गई कॉपी में उसे जोड़ना अनजाने में हुई गलती नहीं थी, बल्कि अधिवक्ताओं द्वारा किया गया दुराचरण (Misfeasance) था। वे भली-भांति जानते थे कि वे क्या कर रहे हैं।
क्षमा याचिका (Apology) खारिज
कोर्ट ने कहा कि पश्चाताप से पैदा हुई माफी और पकड़े जाने के डर से मांगी गई माफी में फर्क होता है। यदि वकीलों को सिर्फ माफी देकर छोड़ दिया जाएगा, तो समाज में यह गलत संदेश जाएगा कि “जब तक पकड़े न जाओ तब तक चालाकी (Sharp practice) ठीक है।”
क्या था पूरा मामला? (Case Background)
- 2024 का आदेश: भू-अर्जन (Land Acquisition) मामले में वकीलों ने 2016 के एक भूमि अधिग्रहण आदेश की टाइप की गई कॉपी (Typed Copy) कोर्ट में जमा की थी। इसमें उन्होंने खुद से एक क्लॉज़ जोड़ दिया था, जिसमें 9% (पहले वर्ष) और 15% (आगे के वर्षों) की दर से ब्याज देने की बात लिखी गई थी। इसी टाइप कॉपी पर भरोसा करके हाई कोर्ट ने 24 मई 2024 को BDA को ब्याज भुगतान का आदेश दिया था।
- BDA की समीक्षा याचिका (Review Plea): BDA ने समीक्षा याचिका दायर कर कोर्ट को दिखाया कि 2016 के मूल सरकारी आदेश (Original Award) में केवल “नियमानुसार ब्याज” (Interest as per rules) लिखा था, उसमें 9% या 15% जैसी कोई दर दर्ज ही नहीं थी।
- धोखाधड़ी का पर्दाफाश: कोर्ट ने पाया कि वकीलों ने आर्थिक लाभ कमाने और मुवक्किल को गैर-कानूनी फायदा पहुंचाने के लिए मनगढ़ंत क्लॉज़ जोड़ा था।
उच्च न्यायालय का अंतिम आदेश और निर्देश
कोर्ट द्वारा दिए गए सख्त निर्देश
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2024 का आदेश वापस
• 24 मई 2024 के गलत
आदेश को रद्द किया।
अतिरिक्त ब्याज की वसूली
• BDA भू-राजस्व बकाया (Land Revenue Arrears)
की तरह अतिरिक्त भुगतान वसूले।
CrPC 340 के तहत मामला
• रजिस्ट्रार जनरल को Perjury का
केस दर्ज करने का निर्देश।
वकालत लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश
• Bar Council of India व State Bar Council में
लाइसेंस रद्द करने की शिकायत।
- पुराना आदेश रद्द: कोर्ट ने 24 मई 2024 का अपना पिछला फैसला वापस (Recall) ले लिया।
- अतिरिक्त ब्याज की वसूली: BDA को निर्देश दिया गया कि वह लाभार्थियों को दिए गए अतिरिक्त ब्याज के पैसे की वसूली भू-राजस्व के बकाया (Arrears of Land Revenue) के रूप में तुरंत शुरू करे।
- Perjury (झूठी गवाही/धोखाधड़ी) की कार्यवाही: यह मानते हुए कि वकीलों का यह कृत्य आईपीसी की धारा 199 (BNS/IPC के तहत) का प्रथम दृष्टया अपराध है, रजिस्ट्रार जनरल को CrPC की धारा 340 के तहत जांच कर सक्षम मजिस्ट्रेट के सामने शिकायत दर्ज करने का निर्देश दिया गया।
- लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश: रजिस्ट्रार जनरल को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) और स्टेट बार काउंसिल में दोनों वकीलों के प्रैक्टिस लाइसेंस रद्द करने हेतु शिकायत दर्ज कराने का आदेश दिया गया।
- अन्य अदालतों के लिए निर्देश: जहां-जहां इस 2024 के गलत फैसले का हवाला देकर अन्य याचिकाकर्ताओं ने राहत मांगी है, वहां इस नए आदेश की प्रति संबंधित पीठों के समक्ष रखने का निर्देश दिया गया।
बॉटमलाइन (The Bottom Line)
इलाहाबाद हाई कोर्ट का यह ऐतिहासिक आदेश न्यायपालिका की गरिमा की रक्षा के लिए एक नजीर है। यह उन सभी तत्वों के लिए एक कड़ा संदेश है जो फर्जीवाड़े या चालाकी के जरिए अदालतों को गुमराह कर अनुचित लाभ पाने की कोशिश करते हैं।

