Monday, November 2, 2026
HomeLaworder Hindiक्राउड-कंट्रोल SOP: NEET-UG प्रदर्शन में घायल IIT छात्र बोला-पुलिस कर्मियों के लिए...

क्राउड-कंट्रोल SOP: NEET-UG प्रदर्शन में घायल IIT छात्र बोला-पुलिस कर्मियों के लिए नेम बैज और क्राउड-कंट्रोल SOP अनिवार्य करने की मांग

केस का संक्षिप्त ब्योरा (Case Snapshot)

पहलूविधिक विवरण
संबंधित अदालतभारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India)
मूल याचिकाहिमांशु बनाम भारत संघ व अन्य (Himanshu v. Union of India & Ors.)
याचिकाकर्ता (हस्तक्षेप)तोशिवा यादव (IIT पटना की छात्रा)
याचिकाकर्ता की अधिवक्ताएडवोकेट नेहा राठी (Advocate Neha Rathi)
मुख्य मांगपुलिस अधिकारियों के लिए अनिवार्य नेम बैज, भीड़ नियंत्रण SOP, और निष्पक्ष जांच।
अगली सुनवाई तिथि3 अगस्त 2026

क्राउड-कंट्रोल SOP: 20 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में NEET-UG 2026 विवाद के विरोध में आयोजित “संसद चलो” प्रदर्शन के दौरान पुलिस लाठीचार्ज में घायल हुई आईआईटी पटना (IIT Patna) की छात्रा तोशिवा यादव ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

यह हस्तक्षेप याचिका (Intervention Application) सुप्रीम कोर्ट में लंबित मुख्य याचिका ‘हिमांशु बनाम भारत संघ व अन्य’ के तहत एडवोकेट नेहा राठी के माध्यम से दाखिल की गई है। छात्रा ने याचिका दायर कर विरोध-प्रदर्शनों के दौरान तैनात पुलिस अधिकारियों के लिए नाम पट्टिका (Name Badges/Identification) पहनना अनिवार्य करने और भीड़ नियंत्रण के लिए एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure – SOP) तैयार करने के निर्देश देने की मांग की है।

याचिकाकर्ता के मुख्य तर्क और आरोप

प्रदर्शनों के दौरान पुलिस जवाबदेही पर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी
       │
┌────────┐
        ▼        
नेम प्लेट/बिना पहचान बल प्रयोग पर सवाल                        
• बिना नेम प्लेट वाले पुलिसकर्मियों और सादे कपड़ों             
  में लोगों द्वारा हिंसा करने से जवाबदेही तय नहीं होती।           

अत्यधिक व अनुचित बल प्रयोग के आरोप
• प्रदर्शनकारियों पर कीलों लगी लाठियों, पेलेट गन 
और इलेक्ट्रिक शॉक वाले डंडों के इस्तेमाल का आरोप।

बिना पहचान के बल प्रयोग से जवाबदेही खत्म होती है

याचिका में तर्क दिया गया है कि नागरिकों के खिलाफ हिंसक या दंडात्मक कार्रवाई के दौरान बिना पहचान वाले पुलिसकर्मियों या सादे कपड़ों में मौजूद व्यक्तियों की भागीदारी पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यूनिफॉर्म में मौजूद पुलिसकर्मियों के साथ या उनकी उपस्थिति में बिना पहचान वाले लोगों द्वारा बल प्रयोग किया जाना गंभीर चिंता का विषय है। कौन अधिकारी या व्यक्ति बल प्रयोग में शामिल था, इसकी स्वतंत्र जांच आवश्यक है ताकि कोई भी आरोपी पहचान न होने का फायदा उठाकर जवाबदेही से बच न सके।

गंभीर चोटें और पुलिसिया बर्बरता के दावे

  • सिर पर गंभीर चोट: याचिकाकर्ता छात्रा ने बताया कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन से लौटते समय बिना नेम प्लेट वाले पुलिसकर्मियों ने उस पर हमला किया, जिससे उसके सिर के पिछले हिस्से में गहरा घाव हुआ और टांके लगाने पड़े।
  • घातक हथियारों का इस्तेमाल: याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने कीलों वाली लाठियों, पेलेट गन (Pellet Guns), शॉक बैटन (Shock Batons) और कथित तौर पर विद्युतीकृत (Electrified) बैरिकेड्स का इस्तेमाल किया, जिससे कई अभ्यर्थी बेहोश हो गए और गंभीर रूप से घायल हुए।
  • महिला अभ्यर्थियों के साथ दुर्व्यवहार: याचिका में आरोप है कि महिला प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की गई और एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने एक महिला दर्शक को थप्पड़ भी मारा।

याचिका में प्रस्तावित प्रमुख सुधार (Safeguards Proposed)

  1. अनिवार्य नेम प्लेट: भीड़ नियंत्रण के लिए तैनात सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए नाम और आईडी नंबर (Identification Number) प्रदर्शित करना अनिवार्य किया जाए।
  2. समान और सार्वजनिक SOP: भीड़ नियंत्रण के लिए एक पारदर्शी, uniform और सार्वजनिक रूप से सुलभ मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाई जाए।
  3. तत्काल चिकित्सा सुविधा: पुलिस कार्रवाई में घायल नागरिकों के लिए तुरंत चिकित्सा जांच और उपचार अनिवार्य किया जाए।
  4. बल प्रयोग की अनिवार्य रिपोर्टिंग: पुलिस द्वारा बल प्रयोग के हर मामले की अनिवार्य रिपोर्टिंग दर्ज की जाए।
  5. संवैधानिक अधिकारों का सम्मान: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धाराओं 148 से 151 के तहत भीड़ हटाने की शक्ति का प्रयोग मनमाने ढंग से नहीं किया जा सकता, क्योंकि अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) के तहत शांतिपूर्ण प्रदर्शन मौलिक अधिकार है।

सुप्रीम कोर्ट का वर्तमान रुख

  • सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह NEET-UG प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और अन्य राज्य सरकारों से जवाब तलब किया है।
  • कोर्ट ने सख्त निर्देश दिया था कि छात्रों के खिलाफ कोई भी दंडात्मक/कठोर कार्रवाई (No Coercive Action) न की जाए और उस दिन की सभी CCTV फुटेज व आधिकारिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं।
  • कोर्ट पेलेट गन से घायल हुए छात्रों की एक अलग याचिका पर भी सुनवाई कर रहा है। इन सभी मामलों की अगली सुनवाई 3 अगस्त [2026] को होगी।

बॉटमलाइन (The Bottom Line)

शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान नागरिकों की सुरक्षा और पुलिस की जवाबदेही तय करने के दृष्टिकोण से यह याचिका बेहद महत्वपूर्ण है। 3 अगस्त 2026 को होने वाली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार से इस संबंध में कड़े दिशा-निर्देश जारी किए जाने की संभावना है।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
clear sky
29.7 ° C
29.7 °
29.7 °
58 %
3.3kmh
4 %
Mon
29 °
Tue
31 °
Wed
31 °
Thu
30 °
Fri
30 °

Recent Comments