Sunday, November 8, 2026
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Passport Validity:आपराधिक अदालतें पासपोर्ट की वैधता अवधि तय नहीं कर सकतीं; उनका काम आरोपी की विदेश यात्रा करने पर फैसला देना है, केस पढ़ें

केस एवं प्रक्रियात्मक सारांश (Case Matrix Overview)

विधिक/प्रशासनिक बिंदुविवरण (अगस्त 2026)
माननीय पीठन्यायमूर्ति कृष्णा राव (कलकत्ता उच्च न्यायालय)
संबंधित कानूनPassports Act, 1967 एवं CrPC / BNSS (जमानत एवं यात्रा शर्तें)
मुख्य विधिक सिद्धांतपासपोर्ट रीन्यू करना एक प्रशासनिक प्रक्रिया है; आपराधिक अदालतें विदेश यात्रा की अनुमति नियंत्रित करती हैं, न कि पासपोर्ट की वैधता अवधि।
अदालत का निर्णय1 साल के बजाय 10 साल की सामान्य अवधि के लिए पासपोर्ट नवीनीकरण का आदेश।

Passport Validity: कलकत्ता हाईकोर्ट ने पासपोर्ट को एक “सिविल दस्तावेज” (Civil Document) बताते हुए फैसला सुनाया है कि आपराधिक अदालतें (Criminal Courts) केवल यह तय कर सकती हैं कि मुकदमे का सामना कर रहा कोई आरोपी विदेश यात्रा कर सकता है या नहीं, लेकिन वे उसके पासपोर्ट की वैधता अवधि (Validity Period) तय नहीं कर सकतीं।

न्यायमूर्ति कृष्णा राव की पीठ ने ने क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय को भ्रष्टाचार के एक मामले में आरोपी व्यक्ति के पासपोर्ट का नवीनीकरण केवल एक वर्ष के बजाय मानक 10 वर्षों की सामान्य अवधि के लिए करने का आदेश दिया है।

हाई कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां

  • पासपोर्ट एक ‘सिविल दस्तावेज’ और कोर्ट की सीमित भूमिका:“पासपोर्ट एक नागरिक/सिविल दस्तावेज है जो इसके धारक को वीजा मांगने और अन्य कानूनों व आदेशों के अधीन अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार करने में सक्षम बनाता है। जो व्यक्ति जमानत पर है या मुकदमे का सामना कर रहा है, वह वास्तव में देश छोड़ सकता है या नहीं, यह आपराधिक अदालत के अधिकार क्षेत्र में है… हालांकि, इससे आगे पासपोर्ट की वैधता की अवधि निर्धारित करने में अदालत को हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है।”
  • पासपोर्ट अथॉरिटी की जिम्मेदारी: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि trial court ने विदेश यात्रा पर कोई सीधी रोक नहीं लगाई है और केवल यह शर्त रखी है कि विदेश जाने से पहले अनुमति लेनी होगी, तो पासपोर्ट अधिकारियों को नियम के अनुसार आवेदन को गुण-दोष (Merits) पर जांच कर 10 वर्ष की सामान्य अवधि के लिए नवीनीकृत करना चाहिए।

मामला क्या था? (Case Background)

  1. रांची ट्रेल कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
    • याचिकाकर्ता रांची की एक निचली अदालत में भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत उसने अपना पासपोर्ट ट्रायल कोर्ट में जमा कराया हुआ था।
    • पासपोर्ट की वैधता समाप्त होने पर उसने सितंबर 2025 में ट्रायल कोर्ट से इसे रिनीव कराने के लिए रिलीज करने की मांग की। 9 अक्टूबर 2025 को ट्रायल कोर्ट ने इस शर्त पर पासपोर्ट रिलीज कर दिया कि आरोपी इसका दुरुपयोग नहीं करेगा, बिना अनुमति विदेश नहीं जाएगा और नवीनीकरण के 5 दिनों के भीतर इसे वापस जमा कराएगा।
  2. पासपोर्ट अधिकारियों की अड़चन (November 2025)
    • जब उसने 17 अक्टूबर 2025 को नवीनीकरण के लिए आवेदन किया, तो पासपोर्ट अधिकारियों ने 3 नवंबर 2025 को एक संचार भेजा जिसमें कहा गया कि वह अदालत से एक विशिष्ट आदेश लाए जिसमें उसकी विदेश यात्रा की अवधि और पासपोर्ट की वैधता अवधि (Validity Duration) का उल्लेख हो, अन्यथा 1993 की अधिसूचना (1993 Notification) के तहत केवल 1 वर्ष के लिए ही पासपोर्ट रिनीव किया जाएगा।
  3. याचिकाकर्ता के वकीलों के तर्क
    • याचिकाकर्ता के वकीलों (वरिष्ठ अधिवक्ता अभ्रजीत मित्रा और अधिवक्ता अनुराग बगारिया) ने तर्क दिया कि पासपोर्ट अधिनियम सामान्यतः 10 वर्षों के लिए पासपोर्ट जारी करता है। ट्रायल कोर्ट पहले ही पासपोर्ट रिनीव करने की अनुमति दे चुका है, ऐसे में पासपोर्ट अथॉरिटी ट्रायल कोर्ट के आदेश के ऊपर ‘अपीलीय प्राधिकरण’ (Appellate Authority) बनकर अतिरिक्त शर्तें नहीं थोप सकती।

⚖️ हाई कोर्ट का अंतिम फैसला

हाई कोर्ट ने माना कि पासपोर्ट नवीनीकृत होने के बावजूद आरोपी व्यक्ति ट्रायल कोर्ट की अनुमति के बिना भारत से बाहर नहीं जा पाएगा और पासपोर्ट वैसे भी नवीनीकरण के 5 दिनों के भीतर ट्रायल कोर्ट में ही जमा रहेगा।

अदालत ने पासपोर्ट अधिकारियों को आदेश की प्रति मिलने के 3 सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता के पासपोर्ट को 10 वर्ष की सामान्य अवधि के लिए नवीनीकृत करने का निर्देश दिया। साथ ही आरोपी को सख्त हिदायत दी कि वह पासपोर्ट रीन्यू होते ही 5 दिनों के भीतर इसे ट्रायल कोर्ट में जमा कराए।

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