हाईकोर्ट द्वारा उठाए गए मुख्य सवाल और टिप्पणियां
- “200 किमी/घंटा की रफ्तार पर कोई कंट्रोल नहीं”:जस्टिस विजयाराघवन ने राज्य के वकील को संबोधित करते हुए कहा:“यह लड़का 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गाड़ी चला रहा था और आपके AI कैमरे ने इसे पकड़ा भी था। आपके पास ऐसी कोई व्यवस्था होनी चाहिए जिससे ऐसी गाड़ियों को तुरंत रोका जा सके। 100 या 200 किमी/घंटा की रफ्तार से चलने वाले किसी भी व्यक्ति के पास वाहन पर नियंत्रण रखने की क्षमता नहीं होती। यदि कोई 220 किमी/घंटा की रफ्तार से गाड़ी चलाता है, तो क्या आप उसे तुरंत सूचित करते हैं? क्या इसके लिए कोई अलर्ट मॉड्यूल है?”
- पिछले 2 महीनों का ओवर-स्पीडिंग डेटा मांगा:अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह पिछले दो महीनों के दौरान 150 किमी/घंटा से अधिक की गति से चलने वाले सभी ओवर-स्पीडिंग मामलों का पूरा ब्योरा प्रस्तुत करे। कोर्ट ने पूछा कि क्या इन उल्लंघनों की रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को दी गई थी और क्या उन पर कोई दंडात्मक/रोकथाम कार्रवाई की गई।
- रात के समय सुपरकार्स और हाई-परफॉर्मेंस गाड़ियों का खतरा:पीठ ने एरनाकुलम और आसपास की सड़कों पर आधी रात के बाद हाई-परफॉर्मेंस कारों को खतरनाक गति से दौड़ाने पर चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि गति चालकों के लिए कोई प्रोत्साहन (Incentive) नहीं होनी चाहिए और इसके लिए एक विशेषज्ञ प्रबंधन टीम बनाई जानी चाहिए।
- जिला सड़क सुरक्षा समितियों और ‘ब्लैक स्पॉट्स’ पर सवाल:जस्टिस जयकुमार और जस्टिस विजयाराघवन ने पूछा कि क्या केरल भर में जिला सड़क सुरक्षा समितियां (District Road Safety Committees) नियमित बैठकें कर रही हैं? दुर्घटना-संभावित क्षेत्रों (Black Spots) को ठीक करने के लिए क्या व्यावहारिक कदम उठाए जा रहे हैं?
- इंटीग्रेटेड रोड सेफ्टी मॉनिटरिंग सिस्टम का सुझाव:हाईकोर्ट ने केरल स्टेट आईटी मिशन (Kerala State IT Mission) और अन्य तकनीकी एजेंसियों को शामिल करके एक एकीकृत सड़क सुरक्षा निगरानी प्लेटफॉर्म विकसित करने का सुझाव दिया। अदालत ने कहा कि उसे औपचारिक जवाब के बजाय इस मुद्दे से निपटने के लिए ठोस और व्यावहारिक समाधान चाहिए।
कोच्चि: सड़क सुरक्षा और यातायात प्रबंधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI-enabled Traffic Monitoring Enforcement), मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत अत्यधिक गति (Reckless & Dangerous Driving under Section 183/184) पर वास्तविक समय में नियंत्रण (Real-Time Interception), कोचीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (CIAL) मार्ग पर 200 किमी/घंटा से अधिक की रफ्तार से दौड़ती लक्जरी स्पोर्ट्स कारों द्वारा उत्पन्न जोखिम, तथा जिला सड़क सुरक्षा समितियों (District Road Safety Committees) की निष्क्रियता पर केरल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया है।
न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी. और न्यायमूर्ति के.वी. जयकुमार की खंडपीठ ने 15 अक्टूबर 2026 को सड़क सुरक्षा से संबंधित स्वतः संज्ञान याचिकाओं की सुनवाई करते हुए पिछले सप्ताहांत एर्नाकुलम के नेदुंबसेरी (CIAL रोड) पर हुए भीषण मिनी कूपर कार हादसे पर गहरा शोक और रोष व्यक्त किया। 19 वर्षीय युवक द्वारा चलाई जा रही तेज रफ्तार मिनी कूपर कार ने एक स्कूटर को टक्कर मार दी थी, जिसमें तीन निर्दोष युवकों की मौके पर ही मौत हो गई थी। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि राज्य प्रशासन अत्यधिक रफ्तार को ट्रैक कर समय रहते कार्रवाई करता, तो इस भयानक त्रासदी को टाला जा सकता था।
उच्च न्यायालय के प्रमुख न्यायिक निष्कर्ष एवं तीखी टिप्पणियां
1. ‘200 किमी/घंटा की रफ्तार AI कैमरे ने देखी, फिर भी रोकने का कोई तंत्र क्यों नहीं?’
न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी. ने राज्य सरकार के वकील को संबोधित करते हुए सवाल किया: “यह लड़का 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गाड़ी चला रहा था और आपके AI कैमरों ने इसे चिन्हित भी किया था। आपके पास ऐसा कोई तरीका होना चाहिए जिससे ऐसे वाहनों को तत्काल रोका जा सके। यदि तेज गति वाले वाहनों को ट्रैक करने और रिपोर्ट करने की उचित व्यवस्था समय पर की गई होती, तो यह दुर्घटना कभी नहीं होती (Such an accident would not have happened)।”
2. भौतिक विज्ञान और उच्च-प्रदर्शन (High-Performance) कारों का नियंत्रण:
पीठ ने रात के समय सार्वजनिक सड़कों पर दौड़ाई जाने वाली सुपरकारों और लक्जरी वाहनों के जोखिम को रेखांकित किया:
- न्यायमूर्ति विजयराघवन ने कहा:“इतनी अत्यधिक गति से वाहन चलाने वाले इन लोगों में से किसी के पास भी ऐसे वाहनों को नियंत्रित करने की क्षमता नहीं होती। यदि कोई वाहन 100 किमी/घंटा की रफ्तार से भी जा रहा हो और चालक अचानक ब्रेक लगा दे, तब भी वह तुरंत नहीं रुक सकता। यदि कोई व्यक्ति 220 किमी/घंटा की रफ्तार से गाड़ी चला रहा है, तो क्या आप उसे तुरंत सूचित करते हैं? क्या आपके पास इसके लिए कोई रियल-टाइम मॉड्यूल है?”
- अदालत ने आधी रात के बाद एर्नाकुलम और हवाई अड्डा मार्गों पर रेसिंग और स्टंट ड्राइविंग पर गंभीर चिंता जताई और कहा कि रफ्तार चालकों के लिए कोई प्रोत्साहन (Speed should not be an incentive) नहीं बननी चाहिए।
3. ‘हमें औपचारिक हलफनामा नहीं, व्यावहारिक समाधान चाहिए’:
- न्यायमूर्ति के.वी. जयकुमार ने राज्य को चेताते हुए स्पष्ट निर्देश दिया:“हमें इस गंभीर मुद्दे से निपटने के लिए व्यावहारिक समाधान (Practical Solutions) चाहिए, कोई औपचारिक काउंटर-एफिडेविट (Formal Counter) नहीं।”
- पीठ ने एक विशेषज्ञ प्रबंधन टीम गठित करने का निर्देश दिया जो तेज गति को नियंत्रित करने के आधुनिक तकनीकी उपाय सुझा सके।
4. दो महीने में 150+ किमी/घंटा रफ्तार वाले उल्लंघनों का पूरा रिकॉर्ड तलब:
अदालत ने राज्य के परिवहन और पुलिस विभाग को पिछले दो महीनों का डेटा पेश करने का आदेश दिया:
- पिछले 60 दिनों में AI कैमरों द्वारा पकड़े गए उन सभी मामलों का विवरण जिनमें वाहन 150 किमी/घंटा से अधिक की गति से चल रहे थे।
- इन उल्लंघनों की जानकारी संबंधित प्राधिकारियों और फील्ड पुलिस को कब दी गई, और उन पर क्या दंडात्मक कार्रवाई या वाहन जब्ती की गई।
5. जिला सड़क सुरक्षा समितियों और ‘ब्लैक स्पॉट्स’ की स्थिति पर सवाल:
- अदालत ने पूछा कि क्या पूरे केरल के सभी जिलों में जिला सड़क सुरक्षा समितियां (District Road Safety Committees) वास्तव में गठित हैं?
- वे कितनी बार बैठकें आयोजित करती हैं?
- दुर्घटना-संभावित क्षेत्रों (Accident-Prone Zones) और ब्लैक स्पॉट्स (Black Spots) की पहचान कर उन्हें सुधारने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं?
एकीकृत सड़क सुरक्षा निगरानी प्रणाली (IRMS) का सुझाव
खंडपीठ ने राज्य में केवल चालान काटने वाले निष्क्रिय कैमरों के स्थान पर सक्रिय डिजिटल सर्विलांस विकसित करने पर बल दिया:
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│ हाईकोर्ट द्वारा प्रस्तावित इंटीग्रेटेड सेफ्टी फ्रेमवर्क │
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【रियल-टाइम अलर्ट एवं इंटरसेप्शन】 【विशेषज्ञ प्रबंधन टीम का गठन】 【केरल IT मिशन का तकनीकी एकीकरण】
• AI कैमरे द्वारा 120-150+ किमी/घंटा • परिवहन विशेषज्ञों और ट्रैफिक इंजीनियर्स • केरल राज्य आईटी मिशन और तकनीकी
की गति दर्ज होते ही अगले पुलिस चेक- की टीम जो गति नियंत्रण के वैज्ञानिक उपाय एजेंसियों को जोड़कर एक केंद्रीकृत
पॉइंट/हाइवे पेट्रोल को तुरंत अलर्ट। सुझाएगी (स्पीड गवर्नर/सख्त निगरानी)। लाइव डैशबोर्ड तैयार करना।
विधिक एवं विधायी विश्लेषण: क्या कहता है कानून?
- मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (संशोधित 2019):
- धारा 183: अत्यधिक गति से वाहन चलाना (Driving at excessive speed)।
- धारा 184: खतरनाक तरीके से वाहन चलाना (Dangerous Driving)।
- धारा 136A (इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और प्रवर्तन): केंद्र सरकार के 2019 संशोधन के तहत राज्य सरकारों का यह कानूनी कर्तव्य है कि वे राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य राजमार्गों और प्रमुख शहरी सड़कों पर इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग सिस्टम (जैसे स्पीड कैमरे, स्पीड गन, ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकॉग्निशन – ANPR) स्थापित करें और उनका उपयोग न केवल चालान भेजने बल्कि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए करें।
- संविधान का अनुच्छेद 21 (सुरक्षित सड़कों और जीवन का अधिकार):
- सर्वोच्च न्यायालय ने एस. राजशेखरन बनाम भारत संघ (सड़क सुरक्षा जनहित याचिका) में माना है कि सुरक्षित सड़कें और गैर-लापरवाह यातायात व्यवस्था नागरिकों के जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) का अनिवार्य अंग है।
- सार्वजनिक मार्ग पर 200 किमी/घंटा की गति से वाहन दौड़ने देना और राज्य के पास उसे रोकने की कोई त्वरित तकनीक न होना राज्य की प्रशासनिक विफलता दर्शाता है।
- BNS की प्रासंगिक धाराएं (लापरवाही से मृत्यु):
- तेज रफ्तार से जान लेने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) (लापरवाही से मृत्यु कारित करना) और धारा 281 (सार्वजनिक मार्ग पर उतावलेपन से वाहन चलाना) लागू होती हैं, परंतु अदालत का जोर इस बात पर है कि दुर्घटना होने के बाद सजा देने से बेहतर दुर्घटना को होने से पहले रोकना है।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: स्वतः संज्ञान (सड़क सुरक्षा एवं अत्यधिक गति नियंत्रण) बनाम मुख्य सचिव, केरल राज्य व अन्य [रिट याचिका (सिविल) – केरल उच्च न्यायालय]
- पीठ: न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी. और न्यायमूर्ति के.वी. जयकुमार (खंडपीठ)
- आदेश की तिथि: 15 अक्टूबर 2026
- अगली सुनवाई की तिथि: 25 अक्टूबर 2026
- संबद्ध घटना: नेदुंबसेरी (CIAL हवाई अड्डा मार्ग, एर्नाकुलम) पर मिनी कूपर कार दुर्घटना (3 युवाओं की मौत)
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
- मोटर वाहन अधिनियम, 1988 — धारा 136A (इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन), धारा 183, 184 (अत्यधिक व खतरनाक गति) एवं धारा 215B (जिला सड़क सुरक्षा समितियां)
- भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) — धारा 106 एवं धारा 281
- भारत का संविधान — अनुच्छेद 21 (जीवन और सड़क सुरक्षा का अधिकार) एवं अनुच्छेद 226
- अदालत के प्रमुख अंतरिम निर्देश:
- पिछले दो महीनों में 150 किमी/घंटा से अधिक रफ्तार वाले सभी उल्लंघनों और उन पर की गई कार्रवाई का ब्यौरा पेश किया जाए।
- रियल-टाइम अलर्ट और तेज गति वाले वाहनों को इंटरसेप्ट करने के लिए केरल IT मिशन के साथ मिलकर तकनीकी रोडमैप प्रस्तुत किया जाए।
- जिला सड़क सुरक्षा समितियों की बैठकों और ब्लैक स्पॉट्स के सुधार पर 25 अक्टूबर 2026 तक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल की जाए।
AI-enabled Traffic: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | केरल उच्च न्यायालय (Kerala High Court) |
| पीठ | न्यायमूर्ति राजा विजयाराघवन वी. एवं न्यायमूर्ति के.वी. जयकुमार |
| घटना का स्थान/समय | कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट (CIAL) रोड, एरनाकुलम (हालिया सप्ताहांत) |
| दुर्घटना का विवरण | 19 वर्षीय चालक द्वारा ~200 किमी/घंटा की गति से मिनी कूपर चलाकर एक स्कूटर को टक्कर मारना; 3 लोगों की मृत्यु। |
| कोर्ट का कड़ा सवाल | AI कैमरों ने 200+ किमी/घंटा की गति रिकॉर्ड की, लेकिन तेज रफ्तार गाड़ियों को तुरंत इंटरसेप्ट (रोकने) का कोई रीयल-टाइम मॉड्यूल क्यों नहीं है? |
| अगली सुनवाई | 25 अक्टूबर 2026 |

