Allotment of Lawyers’ Chambers Rules: दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच (जस्टिस वी. कामेश्वर राव और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा) ने उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें शाहदरा (कड़कड़डूमा), द्वारका और रोहिणी जिला अदालतों में चैंबर आवंटन के लिए केवल दिल्ली (NCT) का निवासी होने की शर्त को चुनौती दी गई थी।
दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत मामले को अपने पोर्टफोलियो कमेटी (Portfolio Committee) के पास भेजा है, जो यह तय करेगी कि क्या दिल्ली के जिला न्यायालयों में वकीलों के चैंबर आवंटन के लिए NCR (नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद आदि) में रहने वाले वकील भी पात्र हो सकते हैं। यदि पोर्टफोलियो कमेटी निवास की शर्त को हटा देती है, तो यह उन हजारों वकीलों के लिए एक बड़ी राहत होगी जो रोजाना गाजियाबाद या गुरुग्राम से दिल्ली की अदालतों में वकालत करने आते हैं, लेकिन दिल्ली का पता न होने के कारण चैंबर से वंचित रह जाते हैं।
यह है विवाद का मुख्य कारण
- याचिकाकर्ता की दलील: एक वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि केवल दिल्ली में रहने वाले वकीलों को चैंबर देना और नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम या फरीदाबाद जैसे NCR शहरों में रहने वालों को बाहर रखना असमानता है।
- तर्क: याचिका में कहा गया कि कई बार NCR के ये इलाके दिल्ली के ही अन्य हिस्सों की तुलना में कोर्ट परिसरों के ज्यादा करीब होते हैं। ऐसे में निवास के आधार पर भेदभाव करना असंवैधानिक है।
सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का संदर्भ
- सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के वकील ने सुप्रीम कोर्ट के ‘गोपाल झा बनाम सुप्रीम कोर्ट (2019)’ मामले का हवाला दिया।
- SC का रुख: उस मामले में शीर्ष अदालत ने माना था कि दिल्ली के आसपास शहरी विस्तार (Urban Expansion) को देखते हुए निवास-आधारित पात्रता की शर्तों पर पुनर्विचार करने का समय आ गया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम फैसला संबंधित ‘अलॉटमेंट कमेटियों’ पर ही छोड़ दिया था।
यह रहा हाई कोर्ट का आदेश
- दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले को सीधे तय करने के बजाय इसे प्रशासनिक स्तर पर सुलझाने का निर्णय लिया।
- कमेटी करेगी फैसला: कोर्ट ने मामले को अपनी पोर्टफोलियो कमेटी (Portfolio Committee) के पास भेज दिया है, जो जिला अदालतों के कामकाज की देखरेख करती है।
- नीतिगत निर्णय: कमेटी अब इस बात पर विचार करेगी कि क्या नियमों में बदलाव कर NCR निवासियों को भी चैंबर आवंटन की दौड़ में शामिल किया जा सकता है।
आइए, आपको बताते हैं अभी चैंबर आवंटन की प्रक्रिया
दिल्ली की जिला अदालतों (जैसे साकेत, पटियाला हाउस, रोहिणी आदि) में वकीलों को चैंबर आवंटित करने के लिए ‘Allotment of Lawyers’ Chambers Rules’ लागू होते हैं। हालांकि हर कोर्ट के लिए कुछ स्थानीय नियम अलग हो सकते हैं, लेकिन मुख्य शर्तें आमतौर पर एक जैसी होती हैं।
चैंबर आवंटन के लिए वर्तमान मुख्य नियम और शर्तें
- बार एसोसिएशन की सदस्यता: आवेदक वकील का उस संबंधित जिला अदालत की बार एसोसिएशन (जैसे Saket Bar Association या Delhi Bar Association) का सक्रिय सदस्य (Active Member) होना अनिवार्य है।
- नियमित वकालत (Regular Practice): केवल सदस्य होना काफी नहीं है; वकील को यह साबित करना होता है कि वह मुख्य रूप से उसी अदालत में वकालत करता है। इसके लिए पिछले कुछ वर्षों के वकालतनामे (Vakalatnamas) या अदालती आदेशों की कॉपियां सबूत के तौर पर देनी पड़ती हैं।
- दिल्ली में निवास (NCT of Delhi Residence): जैसा कि अभी विवाद चल रहा है, वर्तमान नियमों के अनुसार आवेदक का दिल्ली (NCT) का निवासी होना और वहां का वैध निवास प्रमाण पत्र (Voter ID, Aadhaar आदि) देना आवश्यक है। इसी नियम को अब चुनौती दी जा रही है।
- पंजीकरण (Enrollment): वकील का बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD) के साथ पंजीकृत होना अनिवार्य है।
- एक वकील, एक चैंबर: एक वकील को पूरी दिल्ली में केवल एक ही चैंबर आवंटित किया जा सकता है। यदि किसी वकील के पास पहले से ही किसी अन्य कोर्ट (जैसे दिल्ली हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट) में चैंबर है, तो वह जिला अदालत में आवेदन नहीं कर सकता।
- वरिष्ठता (Seniority): जब चैंबरों की संख्या कम और आवेदन ज्यादा होते हैं, तो आवंटन वरिष्ठता सूची (Seniority List) के आधार पर किया जाता है। इसमें बार एसोसिएशन की सदस्यता की तिथि और वकालत के वर्षों को आधार माना जाता है।
यह है चैंबर आवंटन की प्रक्रिया
- आवेदन: बार एसोसिएशन या अलॉटमेंट कमेटी समय-समय पर आवेदन मांगती है।
- स्क्रूटनी: एक कमेटी आवेदनों की जांच करती है कि वकील ने पर्याप्त संख्या में केस लड़े हैं या नहीं।
- पैनल की मंजूरी: पोर्टफोलियो जज और जिला जज की अध्यक्षता वाली कमेटी अंतिम सूची को मंजूरी देती है।
विवाद का मुख्य बिंदु
वकीलों का तर्क है कि नोएडा या गुरुग्राम से आने वाले वकील दिल्ली के वकीलों जितनी ही मेहनत और केस लड़ते हैं, इसलिए केवल “घर का पता” दिल्ली के बाहर होने के कारण उन्हें बुनियादी सुविधा (चैंबर) से वंचित करना गलत है।
IN THE HIGH COURT OF DELHI AT NEW DELHI
CORAM: HON’BLE MR. JUSTICE V. KAMESWAR RAO
HON’BLE MS. JUSTICE MANMEET PRITAM SINGH ARORA
- W.P.(C) 2473/2026 CM APPL. 12042/2026
SH PIYUSH GUPTA ADVOCATE …..Petitioner versus THE CHAMBER ALLOTMENT COMMITTEE & ORS……Respondent

