Wednesday, October 28, 2026
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Animal Rights: कुत्ते बेजान चीजें नहीं, वे नाम भी जानते हैं…देखिए मिष्टी, कोको और कॉटन को उनके दत्तक माता-पिता को सौंपने की कहानी

Animal Rights: दिल्ली हाई कोर्ट ने पशुओं के अधिकारों और मनुष्यों के साथ उनके भावनात्मक जुड़ाव पर एक बेहद संवेदनशील फैसला सुनाया है।

हाईकोर्ट के जस्टिस गिरीश कठपालिया की बेंच ने तीन टॉय पोमेरेनियन (Toy Pomeranian) कुत्तों मिष्टी, कोको और कॉटन की कस्टडी को लेकर चल रहे विवाद को सुलझाते हुए उन्हें उनके एडॉप्टिव पेरेंट्स (Petitioner) को सौंपने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जानवर कोई “निर्जीव वस्तु” (Inanimate objects) नहीं हैं और उनकी कस्टडी का फैसला केवल मालिकाना हक के आधार पर नहीं, बल्कि उनके कल्याण और भावनाओं के आधार पर होना चाहिए।

मामला यह था? (The Custody Battle)

  • रेस्क्यू: प्रतिवादी (मूल मालिक) के घर पर पुलिस ने छापा मारा था, जहाँ कुत्ते बेहद खराब स्थिति में पाए गए थे। पुलिस ने उन्हें रेस्क्यू कर एक NGO को सौंप दिया।
  • गोद लेना: NGO ने इन कुत्तों की कस्टडी याचिकाकर्ताओं (Petitioners) को दे दी, जिन्होंने उन्हें पाल-पोसकर बड़ा किया।
  • विवाद: बाद में मूल मालिक ने ट्रायल कोर्ट से कुत्तों की वापसी की मांग की, जिसे कोर्ट ने मान लिया। इस फैसले के खिलाफ दत्तक माता-पिता ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

कोर्ट की भावुक टिप्पणी…वो बेजुबान सदमे में होंगे

  • जस्टिस कठपालिया ने जानवरों और इंसानों के बीच के रिश्ते को कानून की शुष्क धाराओं से ऊपर रखा।
  • भावनात्मक बंधन: पालतू जानवर और उसे गोद लेने वाले व्यक्ति के बीच बनने वाले भावनात्मक बंधन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
  • निर्जीव नहीं: कोर्ट ने कहा कि कुत्तों की कस्टडी को किसी बेजान वस्तु (जैसे कार या फर्नीचर) की तरह नहीं देखा जा सकता।
  • वॉयसलेस एनिमल्स: मुख्य मुद्दा उन बेजुबान जानवरों का ‘भावनात्मक सदमा’ (Emotional Trauma) है, जिससे वे अपने दत्तक माता-पिता से अलग होने के बाद गुजर रहे होंगे।

अदालत में समझौता और फैसला

  • कोर्ट रूम में एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब मूल मालिक को हिंदी में पूरी स्थिति समझाई गई।
  • कंडीशन: मूल मालिक इस बात पर सहमत हो गया कि कुत्तों के कल्याण के हित में वे याचिकाकर्ताओं के पास ही रहें।
  • शर्त: यदि वह ट्रायल कोर्ट से क्रूरता के मामले में बरी हो जाता है, तो कुत्तों के कल्याण को देखते हुए कस्टडी पर दोबारा विचार किया जाएगा।
  • सुरक्षा बांड: हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता प्रत्येक कुत्ते के लिए ₹50,000 का ‘सुपुर्दरीनामा’ (Bond) जमा करेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें ट्रायल कोर्ट में पेश करेंगे।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
कुत्तों के नाममिष्टी, कोको और कॉटन (तीनों फीमेल पोमेरेनियन)।
पहचानये तीनों अपने नाम पुकारने पर जवाब देते हैं।
कानूनी धारापशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 11 के तहत मामला।
ऐतिहासिक संदर्भपंजाब-हरियाणा HC का ‘लाइका’ (सर्विस डॉग) मामला, जहाँ कुत्ते के गायब होने पर पुलिसकर्मी की सजा को कम किया गया।

वेलफेयर ही सर्वोपरि है

दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला जानवरों को संपत्ति के बजाय संवेदनशील प्राणी मानने की दिशा में एक बड़ा कदम है। कोर्ट ने यह संदेश दिया है कि न्याय करते समय केवल कागजी मालिक नहीं, बल्कि उस बेजुबान की खुशी और उसकी देखभाल करने वाले के साथ उसके जुड़ाव को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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