HomeBREAKING INDIAArunachal Contract Row: प्रदेश के वर्ष 2015 से 2025 तक के वर्क...

Arunachal Contract Row: प्रदेश के वर्ष 2015 से 2025 तक के वर्क ऑर्डर्स खंगालेगी CBI, सीएम पेमा खांडू काे बड़ा झटका, पढ़ें

Arunachal Contract Row: अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के लिए एक बड़ा झटका देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनके रिश्तेदारों को सरकारी ठेके (Government Contracts) दिए जाने के आरोपों की CBI जांच के आदेश दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की बेंच ने ‘सेव मोन रीजन फेडरेशन’ और ‘वॉलंटरी अरुणाचल सेना’ द्वारा दायर जनहित याचिकाओं (PILs) पर यह कड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने सीबीआई को इस मामले की प्रारंभिक जांच (Preliminary Inquiry) के लिए 16 हफ्ते का समय दिया है।

जांच का दायरा (Scope of the Probe)

  • समय सीमा: सीबीआई 1 जनवरी, 2015 से 31 दिसंबर, 2025 के बीच जारी किए गए सभी वर्क ऑर्डर्स और टेंडर्स की जांच करेगी।
  • समय सीमा: एजेंसी को 2 सप्ताह के भीतर जांच शुरू करनी होगी और 16 सप्ताह में अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपनी होगी।
  • आरोप: आरोप है कि खांडू की पत्नी, भाई और भतीजे से जुड़ी कंपनियों को नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों रुपये के ठेके दिए गए।

भाई-भतीजावाद के गंभीर आरोप (Allegations of Favouritism)

  • याचिकाओं में लगभग 1,200 करोड़ रुपये के घपले का दावा किया गया है।
  • कंपनियां: सीएम की पत्नी से जुड़ी फर्म ‘ब्रांड ईगल्स’ और भतीजे की ‘अलायंस ट्रेडिंग कंपनी’ को विशेष फायदा पहुँचाने का आरोप है।
  • बिना टेंडर के काम: रिपोर्ट के अनुसार, तवांग जिले में ही 146 कॉन्ट्रैक्ट्स (कीमत ₹383.74 करोड़) सीएम के करीबियों को दिए गए। इनमें से 59 ठेके तो सीधे ‘वर्क ऑर्डर’ के जरिए दिए गए, यानी कोई टेंडर ही नहीं निकाला गया।
  • नियमों का उल्लंघन: कम से कम 11 ऐसे वर्क ऑर्डर पाए गए जो ₹50 लाख की उस सीमा से ज्यादा थे, जो बिना टेंडर के काम देने के लिए तय की गई थी।

किस तरह के काम दिए गए?

इन ठेकों में बुनियादी ढांचे से जुड़े लगभग हर क्षेत्र के काम शामिल थे। इनमें सड़कों, पुलों और नालों का निर्माण, सिंचाई चैनल और बिजली लाइनों का रखरखाव, कम्युनिटी हॉल, सांस्कृतिक केंद्र और पर्यटन सुविधाओं का निर्माण, तवांग में एक युद्ध स्मारक (War Memorial) का निर्माण।

फैसले के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

विषयविवरण
जांच एजेंसीकेंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI)।
अवधि10 साल (2015 से 2025 तक के ठेके)।
मुख्य आरोपीपेमा खांडू के रिश्तेदार और उनकी कंपनियां।
कोर्ट का निर्देशअगर प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी मिली, तो नियमित FIR और कानूनी कार्रवाई होगी।

निष्कर्ष: सुशासन और पारदर्शिता की कसौटी

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश पूर्वोत्तर राज्यों में सरकारी ठेकों के वितरण में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। पेमा खांडू, जो लंबे समय से राज्य की राजनीति में मजबूत पकड़ रखते हैं, के लिए यह जांच अग्निपरीक्षा साबित हो सकती है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि ‘स्थानीय उद्यमियों’ को बढ़ावा देने के नाम पर करीबियों को फायदा पहुँचाना कानूनन गलत है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
haze
32 ° C
32 °
32 °
35 %
2.6kmh
40 %
Mon
36 °
Tue
38 °
Wed
36 °
Thu
34 °
Fri
36 °

Recent Comments