Friday, October 9, 2026
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CCTV in Police Stations: अंडर सेक्रेटरी नहीं, गृह सचिव आएं…पूछा- चीनी कैमरों की सुरक्षा का क्या मामला है?

CCTV in Police Stations: सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी पुलिस थानों में CCTV कैमरे लगाने की योजना के क्रियान्वयन में हो रही देरी और प्रशासनिक लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने थानों में सीसीटीवी न होने पर खुद संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए सुनवाई की। कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा इस महत्वपूर्ण बैठक में केवल ‘अंडर सेक्रेटरी’ स्तर के अधिकारी को भेजने पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने केंद्रीय गृह सचिव (Union Home Secretary) को मंगलवार को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है ताकि इस योजना को लागू करने में उनकी सीधी मदद ली जा सके।

चीनी कैमरों पर सुरक्षा चिंता (Security Concerns over Chinese CCTV)

  • सुनवाई के दौरान जस्टिस मेहता ने एक हालिया मीडिया रिपोर्ट का जिक्र किया।
  • डेटा लीक का खतरा: कोर्ट ने पूछा कि क्या केंद्र ने पड़ोसी देश (चीन) की कंपनी द्वारा बनाए गए कैमरों को हटाने के निर्देश दिए हैं? आरोप है कि ये कैमरे डेटा कैप्चर कर उसे बाहर भेज रहे हैं।
  • केंद्र का जवाब: एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) राजा ठाकरे ने कहा कि अभी तक इस संबंध में कोई औपचारिक (Formal) आदेश पास नहीं हुआ है, लेकिन मामला विचाराधीन है।

केरल मॉडल की तारीफ (The Kerala Model)

  • एमीकस क्यूरी (अदालती मित्र) सिद्धार्थ दवे ने कोर्ट को The Kerala Model के बारे में बताया।
  • सबसे बेहतर सेटअप: केरल ने पुलिस थानों में सीसीटीवी लगाने और सेंट्रलाइज्ड डैशबोर्ड (Centralised Dashboard) बनाने में सबसे अच्छा काम किया है।
  • कोर्ट का सवाल: जस्टिस नाथ ने कहा, “अगर केरल का सेटअप सबसे अच्छा है, तो दूसरे राज्य इसका अनुसरण क्यों नहीं कर सकते?” कोर्ट ने इस मॉडल को पूरे देश में लागू करने पर चर्चा करने को कहा।

सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश (History of the Case)

  • सुप्रीम कोर्ट ने 2018 से ही पुलिस थानों में सीसीटीवी अनिवार्य करने के लिए कई आदेश दिए हैं।
  • मानवाधिकारों की रक्षा: 2018 में पहली बार मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकने के लिए सीसीटीवी का आदेश दिया गया था।
  • कवरेज एरिया: दिसंबर 2020 में कोर्ट ने कहा था कि थानों के हर एंट्री-एग्जिट पॉइंट, मुख्य गेट, लॉक-अप, कॉरिडोर, लॉबी और रिसेप्शन पर कैमरे होने चाहिए।
  • तकनीकी मानक: सिस्टम में नाइट विजन और ऑडियो की सुविधा होनी चाहिए। साथ ही, डेटा का स्टोरेज कम से कम एक साल तक रखने की क्षमता होनी चाहिए।
  • जांच एजेंसियां: यह नियम केवल पुलिस थानों पर ही नहीं, बल्कि CBI, ED और NIA जैसे केंद्रीय कार्यालयों पर भी लागू होता है।

आज की कार्यवाही के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

विषयविवरण
कोर्ट का आदेशकेंद्रीय गृह सचिव कल (मंगलवार) कोर्ट में पेश हों।
नाराजगी का कारणहाई-लेवल मीटिंग में जूनियर अधिकारियों (Under Secretary) को भेजना।
फंडिंगकेंद्र सरकार इस योजना के लिए 60% फंड दे रही है।
उद्देश्यसेंट्रलाइज्ड डैशबोर्ड बनाना ताकि दिल्ली से ही थानों की निगरानी हो सके।

निष्कर्ष: पारदर्शिता की ओर कदम

सुप्रीम कोर्ट का यह कदम पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और ‘कस्टोडियल टॉर्चर’ (हिरासत में प्रताड़ना) को रोकने की दिशा में मील का पत्थर है। गृह सचिव की उपस्थिति से यह उम्मीद है कि सीसीटीवी बुनियादी ढांचे के मानकीकरण (Standardisation) और इसके प्रभावी कार्यान्वयन की समय सीमा तय हो सकेगी।

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