Supreme Court View
JUDICIARY SERVICE: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, वेटिंग लिस्ट (रिजर्व लिस्ट) में शामिल उम्मीदवार तब नियुक्ति का दावा नहीं कर सकते, जब उस लिस्ट की कानूनी वैधता (Validity) समाप्त हो चुकी हो।
चयन प्रक्रिया का एक समय पर पूरा होना जरूरी
अदालत ने कहा कि चयन प्रक्रिया का एक समय पर पूरा होना जरूरी है और वेटिंग लिस्ट को नियुक्तियों के लिए ‘अनंत स्टॉक’ की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने राजस्थान हाई कोर्ट के उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें पुरानी वेटिंग लिस्ट के आधार पर नियुक्तियां देने की बात कही गई थी।
मुकदमेबाजी से बढ़ रहा है विवाद
देश भर में लंबित सर्विस से जुड़े मामलों पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा:
- तनावपूर्ण स्थिति: जजों ने अपने अनुभव के आधार पर कहा कि सर्विस से जुड़े विवाद बार-बार होने वाली मुकदमेबाजी के कारण और भी गंभीर हो जाते हैं। इससे उम्मीदवारों के बीच हमेशा अनिश्चितता और तनाव की स्थिति बनी रहती है।
- समय पर चयन है उद्देश्य: न्यायपालिका को सेवा नियमों की व्याख्या इस तरह करनी चाहिए जिससे चयन प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य पूरा हो— यानी योग्य उम्मीदवारों का चयन और समय पर उनकी नियुक्ति।
यह था मामला
यह विवाद राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा 2013 से 2019 के बीच जूनियर लीगल ऑफिसर (JLO) और असिस्टेंट स्टैटिस्टिकल ऑफिसर (ASO) के पदों के लिए निकाली गई भर्तियों से जुड़ा था। कुछ उम्मीदवार वेटिंग लिस्ट की वैधता खत्म होने के बाद भी उसके आधार पर नियुक्ति की मांग कर रहे थे, जिसे हाई कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था।
यह रही कोर्ट की अहम टिप्पणी
बेंच ने कहा कि चयन प्रक्रिया को एक अंतिम मुकाम (Finality) तक पहुंचना चाहिए। अगर एक बार लिस्ट की समय सीमा समाप्त हो गई, तो उसके जरिए पदों को भरना नियमों के खिलाफ है। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका को जमीनी हकीकतों को ध्यान में रखकर ही नियमों की व्याख्या करनी चाहिए।





