Friday, June 19, 2026
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DIGITAL ARREST: डिजिटल अरेस्ट पर बड़ा कदम: बैंक या सिम कंपनी की गलती हुई तो पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा

DIGITAL ARREST: देश में बढ़ते ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक हाई-लेवल कमेटी का गठन किया है।

गृह मंत्रालय (MHA) ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया

गृह मंत्रालय (MHA) ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि यह कमेटी इस तरह के साइबर अपराधों को रोकने और अपराधियों पर नकेल कसने के लिए बनाई गई है। बता दें कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ एक खतरनाक साइबर फ्रॉड है, जिसमें ठग खुद को पुलिस, सीबीआई या सरकारी अधिकारी बताकर वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित को डराते हैं और उसे घंटों घर में कैद (बंधक) रहने पर मजबूर कर पैसे वसूलते हैं।

कमेटी में शामिल होंगे दिग्गज विभाग

गृह मंत्रालय के अनुसार, स्पेशल सेक्रेटरी (इंटरनल सिक्योरिटी) की अध्यक्षता में बनी इस कमेटी में इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY), विदेश मंत्रालय, कानून मंत्रालय, आरबीआई (RBI), सीबीआई (CBI), एनआईए (NIA) और दिल्ली पुलिस के अधिकारी शामिल हैं। यह कमेटी हर दो हफ्ते में बैठक करेगी।

बैंक और टेलीकॉम कंपनियों की जवाबदेही होगी तय

कमेटी की पहली बैठक में कुछ अहम सुझावों पर चर्चा हुई है:

-मुआवजे का प्रावधान: यदि बैंक की लापरवाही या टेलीकॉम कंपनी की गलती (जैसे गलत तरीके से सिम जारी करना) की वजह से किसी के साथ फ्रॉड होता है, तो पीड़ित को मुआवजा दिया जा सकता है। कमेटी का मानना है कि सिस्टम की विफलता का खामियाजा आम आदमी को नहीं भुगतना चाहिए।

  • SIM कार्ड पर सख्ती: दूरसंचार विभाग (DoT) नए नियम ला रहा है, जिसमें एक व्यक्ति के नाम पर कई सिम जारी होने और सिम कार्ड जारी करने में होने वाली लापरवाही पर लगाम कसी जाएगी।
  • पैसे की तुरंत रिकवरी: साइबर क्राइम पोर्टल (1930 हेल्पलाइन) को अपग्रेड किया जा रहा है ताकि फ्रॉड होते ही पैसा तुरंत फ्रीज किया जा सके और उसे पीड़ित के खाते में वापस लाने के लिए SOP तैयार की जा सके।

सुप्रीम कोर्ट ने लिया था संज्ञान

पिछले साल दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के एक बुजुर्ग दंपति की शिकायत पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सीबीआई को ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामलों की देशभर में जांच करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि इस आधुनिक साइबर अपराध से निपटने के लिए उनके पास क्या योजना है। गृह मंत्रालय ने कोर्ट से आगे की रिपोर्ट देने के लिए एक महीने का समय मांगा है।

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