Assault case: सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब पुलिस के उन अफसरों की कड़ी आलोचना की, जिन पर एक कर्नल से पार्किंग विवाद में मारपीट का आरोप है।
हाईकोर्ट ने सोच-समझकर आदेश दिया है: सुप्रीम कोर्ट
शीर्ष कोर्ट ने कहा कि सेना -40 डिग्री तापमान में सीमा पर तैनात रहती है, तभी आप अपने घरों में चैन से सो पाते हैं। ऐसे में सेना के लोगों के प्रति सम्मान दिखाना चाहिए। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने सोच-समझकर आदेश दिया है और इसमें दखल देने की जरूरत नहीं है।
यह है मामला
यह घटना 13 और 14 मार्च की रात पटियाला में हुई थी। कर्नल पुष्पिंदर सिंह बाथ और उनके बेटे पर पंजाब पुलिस के 12 अफसरों ने एक ढाबे पर पार्किंग को लेकर हमला किया। कर्नल बाथ ने आरोप लगाया कि चार इंस्पेक्टर रैंक के अफसर और उनके हथियारबंद साथी बिना किसी उकसावे के उन पर टूट पड़े। उन्होंने उनका आईडी कार्ड और मोबाइल छीन लिया और फर्जी एनकाउंटर की धमकी दी। यह सब सार्वजनिक जगह पर और सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में हुआ।
चंडीगढ़ पुलिस की जांच पर भी सवाल
हाईकोर्ट ने 3 अप्रैल को यह मामला चंडीगढ़ पुलिस को सौंपा था और चार महीने में जांच पूरी करने को कहा था। लेकिन याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि तीन महीने बीतने के बावजूद न तो किसी आरोपी को गिरफ्तार किया गया और न ही किसी को जांच में शामिल किया गया। याचिका में कहा गया कि जांच एजेंसी ने न तो कोई गैर-जमानती वारंट जारी किया, न ही किसी आरोपी को भगोड़ा घोषित किया और न ही कोई अन्य कानूनी कार्रवाई की। इससे साफ है कि जांच एजेंसी ने जानबूझकर गंभीरता नहीं दिखाई। कर्नल बाथ ने शुरू से ही मांग की थी कि यह मामला पंजाब पुलिस के बजाय किसी स्वतंत्र एजेंसी, खासकर सीबीआई को सौंपा जाए, क्योंकि उन्हें निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं थी।
“जब युद्ध होता है, तब आप सेना के अफसरों की तारीफ करते हैं। लेकिन यहां आपके एसएसपी कहते हैं कि अग्रिम जमानत खारिज होने के बावजूद पुलिस अफसरों को गिरफ्तार नहीं कर पा रहे। यह कानून का मजाक है।”
- सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
“आपकी जमानत खारिज हो चुकी है, फिर भी आप खुले घूम रहे हैं। कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हुई। यह अराजकता बर्दाश्त नहीं की जा सकती। हम इस अपील को भारी जुर्माने के साथ खारिज कर रहे हैं। अब सीबीआई ही जांच करेगी। सेना आपकी रक्षा करती है और तिरंगे में लिपटकर लौटती है।”
- जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा, न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट
“अगर आपके पास छिपाने को कुछ नहीं है, तो स्वतंत्र जांच से डर क्यों?”
- जस्टिस संजय कुमार, न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट

