Supreme-Court
Bail Rule: सुप्रीम कोर्ट ने 15 सितंबर 2025 को साफ कर दिया कि हाईकोर्ट अपने ही आदेश को वापस लेकर (recall करके) पहले खारिज की गई अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) याचिका को बहाल कर राहत नहीं दे सकता।
पहले आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की थी
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की बेंच ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के 7 फरवरी 2025 के आदेश को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने पहले आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की थी, लेकिन बाद में आदेश वापस लेकर उसे जमानत दे दी थी। यह फैसला गुरविंदर सिंह की अपील पर आया, जिसने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
यह है पूरा मामला
17 जनवरी 2025 को हाईकोर्ट ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद आरोपी की नई याचिका पर हाईकोर्ट ने अपना पुराना आदेश वापस लिया और जमानत दे दी।अपीलकर्ता के वकील ने दलील दी कि यह प्रक्रिया कानून में कहीं मान्य नहीं है। एक बार आदेश आ जाने के बाद मामला समाप्त हो जाता है, उसे दोबारा बहाल नहीं किया जा सकता। आरोपी की ओर से कहा गया कि आदेश वापस लेने के लिए ठोस कारण दर्ज किए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
बेंच ने कहा—“एक बार अग्रिम जमानत खारिज करने का आदेश पारित होने के बाद, वह मामला समाप्त हो जाता है। हाईकोर्ट उसे वापस लेकर दोबारा जमानत नहीं दे सकता। सुप्रीम कोर्ट ने 7 फरवरी 2025 का आदेश रद्द कर दिया। 17 जनवरी 2025 का पुराना आदेश (जिसमें अग्रिम जमानत खारिज हुई थी) बहाल कर दिया गया। कोर्ट ने कहा कि पक्षकार अब अन्य वैधानिक उपायों का सहारा ले सकते हैं।
CRIMINAL APPEAL NO. OF 2025 (@ SPECIAL LEAVE PETITION(CRIMINAL)NO.3843/2025)
GURVINDER SINGH APPELLANT(S) VERSUS JASBIR SINGH @ JASVIR SINGH & ANR. RESPONDENT(S) R1: JASBIR SINGH @ JASVIR SINGH
R2: STATE OF PUNJAB






