Monday, August 17, 2026
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NI ACT: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला…चेक की रकम और नोटिस में अंतर घातक, केस होगा खारिज

NI ACT: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, चेक बाउंस मामलों में अगर चेक की रकम और नोटिस में लिखी रकम अलग हो तो पूरा मामला ही कानूनी तौर पर खत्म हो जाएगा।

नोटिस की शर्तों का सख्ती से पालन होना जरूरी है

चीफ जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस एन.वी. अंजरिया की बेंच ने कहा कि एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत केस तभी बनता है जब नोटिस में वही रकम मांगी जाए जो चेक में लिखी है। कोर्ट ने इसे “फैटल” (घातक) करार दिया। कोर्ट की टिप्पणी, “डिमांड नोटिस, जिसमें चेक की रकम मांगी जाती है, धारा 138 के अपराध का मुख्य तत्व है। अगर रकम में अंतर है तो पूरा केस ही खारिज हो जाएगा।” “नोटिस में वही रकम होनी चाहिए जो डिसऑनर्ड चेक की है। अलग रकम लिखी तो नोटिस ही अवैध मानी जाएगी।” “यहां तक कि टाइपिंग की गलती भी डिफेंस नहीं बन सकती। नोटिस की शर्तों का सख्ती से पालन होना जरूरी है।”

मामला क्या था?

केस 1 करोड़ रुपये के चेक बाउंस से जुड़ा था। लेकिन शिकायतकर्ता ने नोटिस में रकम 2 करोड़ रुपये लिख दी। दलील दी गई कि यह “टाइपिंग एरर” था।

यह रहा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि टाइपिंग मिस्टेक भी नोटिस को अवैध बना देती है। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दर्ज शिकायत खारिज करने के आदेश को बरकरार रखा। अपीलें खारिज की गईं।

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