Tuesday, September 29, 2026
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Bank loan fraud case: 21 साल पहले फर्जी दस्तावेजों पर लिया था होम लोन; यह है पूरा मामला

Bank loan fraud case: अहमदाबाद की एक विशेष सीबीआई (CBI) अदालत ने करीब दो दशक पुराने बैंक धोखाधड़ी मामले में सजा का एलान किया है।

विजया बैंक से होम लोन लेने से जुड़ा है मामला

अदालत ने मामले में तीन लोगों को दोषी करार देते हुए 3-3 साल की कैद की सजा सुनाई है। यह मामला फर्जी दस्तावेजों के जरिए विजया बैंक से होम लोन लेने से जुड़ा है। अदालत ने बालमुकुंद मिठाईलाल दुबे, धर्मेश धैर्य और अल्पेश अश्विनभाई ठाकर पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। हालांकि, इस पूरे घोटाले का मुख्य आरोपी जयेश प्रजापति कभी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा और वह अब भी फरार है।

क्या था 4.78 लाख का यह घोटाला?

-यह मामला मार्च 2004 का है, जिसकी जांच सीबीआई ने दिसंबर 2009 में शुरू की थी।
-फर्जी पहचान: मुख्य आरोपी जयेश प्रजापति ने विजया बैंक के अज्ञात अधिकारियों के साथ मिलकर साजिश रची। उसने अपनी नौकरी और सैलरी से जुड़े फर्जी दस्तावेज बैंक में जमा किए।
-प्रॉपर्टी के झूठे पेपर: ‘जलविहार सोसाइटी’ के एक फ्लैट के नाम पर फर्जी कागजात दिखाकर 4 लाख 78 हजार रुपये का होम लोन हासिल किया।
-पैसों की हेराफेरी: जांच में सामने आया कि आरोपियों ने बैंक को धोखा देने के लिए एक फर्जी बैंक खाता भी खोला था, जिसमें लोन की राशि ट्रांसफर कर निकाल ली गई।

बैंक को हुआ करीब 8 लाख का नुकसान

सीबीआई के अनुसार, लोन की किस्तें और ब्याज न चुकाने के कारण विजया बैंक को कुल 7,85,109 रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ। जांच एजेंसी ने 31 दिसंबर 2010 को आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, जिस पर अब 16 साल बाद फैसला आया है।

मुख्य आरोपी अब भी फरार

मामले का मास्टरमाइंड जयेश प्रजापति साल 2004 से ही फरार है। सीबीआई उसे कभी गिरफ्तार नहीं कर पाई, इसलिए उसके खिलाफ अलग से कार्रवाई जारी है। कोर्ट ने बाकी तीन सह-आरोपियों को दस्तावेजों में हेराफेरी और बैंक के साथ धोखाधड़ी करने का दोषी माना।

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