Bar News: सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की सभी राज्य बार काउंसिल्स को एक बार फिर सख्त चेतावनी दी है।
पश्चिम बंगाल बार काउंसिल के खिलाफ केस पर सुनवाई
न्यायमूर्ति जे.बी. पर्डीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ पश्चिम बंगाल बार काउंसिल के खिलाफ दायर एक अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका एक नवप्रवेशित विधि स्नातक ने दायर की थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि नामांकन प्रमाणपत्र लेने और अपने मूल शैक्षणिक दस्तावेज वापस पाने के लिए उससे ₹4,650 अतिरिक्त राशि मांगी गई। अदालत ने कहा, वे वकीलों से नामांकन शुल्क (Enrollment Fee) के रूप में ₹750 से अधिक राशि नहीं वसूल सकतीं। अदालत ने साफ कहा कि यदि भविष्य में किसी भी राज्य बार काउंसिल द्वारा कानूनी सीमा से अधिक शुल्क वसूलने की बात सामने आई, तो सीधे अवमानना कार्रवाई की जाएगी।
याचिकाकर्ता का दावा
याचिकाकर्ता ने बताया कि अतिरिक्त राशि को “लाइब्रेरी डेवलपमेंट फीस”, “बिल्डिंग फंड” और “एडवोकेट वेलफेयर फंड” जैसे शीर्षकों के तहत मांगा गया था, और भुगतान न करने पर उसके दस्तावेज लौटा देने से इंकार कर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख
पीठ ने कहा, “हम स्पष्ट करते हैं कि यदि भविष्य में यह पाया गया कि कोई भी राज्य बार काउंसिल वैधानिक सीमा से अधिक शुल्क वसूल रही है, तो उस संस्था के जिम्मेदार अधिकारी को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया जाएगा।” कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को निर्देश दिया कि वह सभी राज्य बार काउंसिल्स को लिखित सर्कुलर जारी करे और सुनिश्चित करे कि वे अगस्त 2024 के निर्णय का पूरी तरह पालन करें।
चार सप्ताह की मोहलत
अदालत ने बीसीआई को आदेश दिया कि यह पूरा कार्य चार सप्ताह के भीतर पूरा किया जाए और राज्य बार काउंसिल्स से लिखित जवाब भी प्राप्त किए जाएं। पीठ ने कहा, “हम बार काउंसिल ऑफ इंडिया को अंतिम अवसर दे रहे हैं कि वह इस मुद्दे को सभी राज्य बार काउंसिल्स के साथ गंभीरता से उठाए और लिखित सर्कुलर के माध्यम से उन्हें सूचित करे। सर्कुलर प्राप्त होते ही राज्य बार काउंसिल्स को तुरंत जवाब देना होगा।”
दस्तावेज जब्त करने पर रोक
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि कोई भी राज्य बार काउंसिल आवेदक के दस्तावेजों को किसी भी कारण से जब्त नहीं कर सकती। कोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता के सभी मूल दस्तावेज तुरंत वापस किए जाएं। कोर्ट ने कहा, “एक बार जब आवेदक द्वारा वैधानिक रूप से निर्धारित शुल्क जमा कर दिया जाए, तो उसके दस्तावेज तुरंत लौटाए जाएं। किसी भी अतिरिक्त भुगतान की मांग को लेकर दस्तावेज रोकना पूर्णतः अवैध होगा।”
‘ऑप्शनल फीस’ भी गैरकानूनी
सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि कर्नाटक बार काउंसिल द्वारा ‘ऑप्शनल फीस’ के नाम पर अतिरिक्त राशि वसूली जा रही है। इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि कोई भी राज्य बार काउंसिल किसी भी नाम से अतिरिक्त या वैकल्पिक शुल्क नहीं ले सकती।
यह है पृष्ठभूमि
अगस्त 2024 के गौरव कुमार बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एडवोकेट्स एक्ट, 1961 की धारा 24 के तहत नामांकन शुल्क सामान्य वर्ग के लिए अधिकतम ₹750 और अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के लिए ₹125 से अधिक नहीं हो सकता। इसके बावजूद कई राज्य बार काउंसिल्स इस निर्देश का पालन नहीं कर रही थीं, जिसके चलते यह अवमानना मामला सामने आया। गौरतलब है कि इसी वर्ष जनवरी में बीसीआई ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दायर कर नामांकन शुल्क ₹25,000 तक बढ़ाने की अनुमति मांगी थी।
S U P R E M E C O U R T O F I N D I A
CONTEMPT PETITION (CIVIL) Diary No.59883/2025
PRIYADARSHINI SAHA VERSUS PINAKI RANJAN BANERJEE
(IA No. 263941/2025 – APPLICATION FOR PERMISSION)
Writ Petition(Civil) No.774/2025
(FOR ADMISSION)
(IA No. 194481/2025 – EXEMPTION FROM FILING O.T. & IA
No. 194480/2025 – GRANT OF INTERIM RELIEF)

