CAG Report on Army: संसद में 30 मार्च 2026 को पेश की गई भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने भारतीय सेना के प्रशासनिक और चिकित्सा ढांचे में कई गंभीर कमियों को उजागर किया है।
कैग की रिपोर्ट मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों पर केंद्रित है: वेतन एवं लेखा कार्यालय (PAO), मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेज (MES) के कॉन्ट्रैक्ट और मिलिट्री अस्पतालों का प्रबंधन।रिपोर्ट में सेना के रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण की वकालत की गई है और मिलिट्री अस्पतालों के रखरखाव में भारी लापरवाही पर चिंता जताई गई है।
वेतन और भत्तों में गड़बड़ी (Pay & Allowances)
- ऑडिट में पाया गया कि बड़ी संख्या में सेना के जवानों को उनके हक का पैसा समय पर और सही तरीके से नहीं मिल रहा है।
- रिटायरमेंट पर झटका: समय पर खातों का निपटारा (PFSA) न होने के कारण, कई अधिकारियों और जवानों के रिटायरमेंट के वक्त एक साथ बड़ी रिकवरी की गई, जिससे उन्हें भारी मानसिक और वित्तीय परेशानी हुई।
- IT सिस्टम की विफलता: आईटी सिस्टम में सही बिज़नेस रूल्स न होने के कारण गलत भुगतान हुए। कैग ने ‘डोल्फिन/सुलेखा’ (DOLPHIN/SULEKHA) और ‘अरमान’ (ARPAN) जैसे ऐप्स के बीच तालमेल बेहतर करने की सिफारिश की है।
मिलिट्री अस्पतालों की खस्ता हालत (Military Hospitals)
- रिपोर्ट में सैन्य अस्पतालों (MH) के बुनियादी ढांचे में “गंभीर कमियां” पाई गई हैं।
- जर्जर इमारतें: आधुनिकीकरण में देरी के कारण नई तकनीक और विशेषज्ञताएं नहीं जोड़ी जा सकीं। जून 2022 में MH लैंसडाउन का एक हिस्सा गिर गया था, फिर भी नियमित ‘स्ट्रक्चरल ऑडिट’ नहीं किया जा रहा है।
- सुरक्षा में चूक: कई अस्पतालों में वेंटिलेशन (HVAC) और अग्निशमन (Firefighting) प्रणालियों का अभाव है। एक्सरे मशीनें बिना अनिवार्य लाइसेंस के चल रही हैं।
- कचरा प्रबंधन: बायो-मेडिकल वेस्ट (BMW) नियम 2016 और गर्भपात (MTP) नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।
दवाओं की भारी किल्लत (Medicine Shortage)
- सशस्त्र बल चिकित्सा भंडार डिपो (AFMSD) दवाओं की मांग पूरी करने में विफल रहे हैं।
- मांग और आपूर्ति: डिपो अस्पतालों से आने वाली दवाओं की एक-तिहाई मांग और ‘कॉमन ड्रग लिस्ट’ (CDL) की जरूरतें पूरी नहीं कर सके।
- पैसे की बर्बादी: दो डिपो में एक्सपायरी से पहले दवाओं को न बदलने के कारण ₹13.52 करोड़ का सार्वजनिक धन फंस गया।
साइट रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण (Digitisation of Records)
- मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेज (MES) के कॉन्ट्रैक्ट्स की जांच में कई चीजें पाईं गईं।
- दस्तावेजों में कमी: साइट डॉक्यूमेंट्स के रखरखाव में खामियों के कारण ठेकेदारों की जवाबदेही तय करना मुश्किल हो गया है।
- सिफारिश: कैग ने रक्षा मंत्रालय को सभी साइट रिकॉर्ड्स का डिजिटलीकरण करने और काम के प्रकार के अनुसार साइट लैब और चार्ट्स के नियमों में बदलाव करने की सलाह दी है।
निष्कर्ष: सुधार की आवश्यकता
कैग की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी कमान (Western Command) ने नियंत्रण मानकों के पालन में सबसे खराब प्रदर्शन किया है। हालांकि, रक्षा मंत्रालय ने कुछ ऑडिट आपत्तियों पर सुधारात्मक कदम उठाना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि सीमा पर तैनात जवानों को घर पर प्रशासनिक जटिलताओं और जर्जर स्वास्थ्य सुविधाओं से बचाना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

