Thursday, October 1, 2026
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Justice for Soldiers: सरहद पर लड़ने वाले को घर पर हक के लिए न लड़ना पड़े; लेह में बोले CJI सूर्यकांत

Justice for Soldiers: लेह की बर्फीली चोटियों के बीच भारतीय सेना के जवानों को संबोधित करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने एक अत्यंत भावुक और महत्वपूर्ण बयान दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के CJI सूर्यकांत ने न्यायपालिका और सशस्त्र बल के बीच के गहरे संबंध पर जोर देते हुए कहा कि जहाँ अदालतें संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करती हैं, वहीं सैनिक उन परिस्थितियों का निर्माण करते हैं जिनमें ये मूल्य जीवित रह सकें। उन्होंने कहा कि देश के प्रहरियों को एक साथ दो मोर्चों पर जंग लड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए—एक सरहद पर और दूसरी अपने कानूनी अधिकारों के लिए घर पर।

दोहरी जंग का अंत (No More Two Battles)

  • कानून की पहुंच: “एक सैनिक सरहद पर तैनात होता है, वह हर समय कानून के पास नहीं चल सकता, इसलिए कानून को सैनिक तक पहुँचना चाहिए।
  • बुनियादी संघर्ष: वर्दी पहनने का मतलब यह नहीं कि जीवन की सामान्य मुश्किलें खत्म हो गई हैं। एक जवान जमीन के विवाद, पेंशन की देरी, वैवाहिक कलह या प्रशासनिक उदासीनता का शिकार हो सकता है।
  • संवैधानिक कर्तव्य: सैनिकों को समय पर कानूनी सहायता देना केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि राज्य का संवैधानिक और नैतिक कर्तव्य है।

वीर परिवार सहायता योजना’ का प्रभाव

  • CJI ने नालसा (राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण) के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में अपनी एक बड़ी उपलब्धि का जिक्र किया।
  • मुफ्त कानूनी सहायता: सेवारत कर्मियों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के लिए ‘वीर परिवार सहायता योजना’ शुरू की गई।
  • आंकड़े: अब तक देश भर में 14,929 लाभार्थियों की मदद की जा चुकी है।
  • नेटवर्क: देश भर में 438 लीगल सर्विसेज क्लिनिक काम कर रहे हैं, जिनमें सभी 34 राज्य सैनिक बोर्ड और 404 जिला सैनिक बोर्ड शामिल हैं।
  • भरोसे की संस्कृति: इस योजना में 1,123 लोगों की टीम तैनात है, जिनमें 378 सदस्य सैन्य पृष्ठभूमि से हैं, ताकि जवानों के साथ विश्वास और सहानुभूति का रिश्ता बना रहे।

ऐतिहासिक संदर्भ: रेजांग ला के वीरों को नमन

CJI ने 1962 के रेजांग ला युद्ध के बलिदानों को याद किया। उन्होंने मेजर शैतान सिंह भाटी और 13 कुमाऊं की चार्ली कंपनी के 114 जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि देश की संप्रभुता और शांति की रक्षा के बिना स्वतंत्रता’ या ‘न्याय के कोई मायने नहीं हैं।

कोर्ट और सैनिक: एक ही उद्देश्य

CJI के अनुसार, कोर्ट और सैनिक का काम करने का तरीका अलग हो सकता है, लेकिन उद्देश्य एक ही है, देश की रक्षा और न्याय सुनिश्चित करना। उन्होंने आश्वासन दिया कि संस्थाएं जवानों के हितों की रक्षा उतनी ही तत्परता से करेंगी जितनी तत्परता से जवान सरहदों की रक्षा करते हैं।

निष्कर्ष: सम्मान और सुरक्षा

CJI सूर्यकांत का यह संबोधन सेना के प्रति न्यायपालिका के गहरे सम्मान को दर्शाता है। वीर परिवार सहायता योजना के माध्यम से अब जवानों को पेंशन, जमीन विवाद और बच्चों के स्कूल एडमिशन जैसे मुद्दों के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, बल्कि कानून खुद उनके द्वार तक पहुंचेगा।

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