Cases against lawmakers: बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र, गोवा और केंद्रशासित प्रदेशों—दादरा-नगर हवेली, दमण और दीव—के सांसदों और विधायकों पर लंबित मुकदमों को लेकर गंभीर चिंता जताई।
राज्य सरकार से पूछे सवाल
मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और जस्टिस एन.जे. जमादार की बेंच को सरकारी वकील मनकुंवर देशमुख ने आंकड़ों की सूची सौपी—जिसमें बताया गया कि कुल 478 केस लंबित हैं। हाईकोर्ट ने पूछा कि इन स्टे को हटवाने के लिए राज्य क्या कर रहा है? देशमुख ने कहा कि अदालतों को जल्द सुनवाई के आदेशों की जानकारी दी जाएगी।
कितने केस कहां अटके हैं? हाईकोर्ट के सामने रिपोर्ट
- 132 मामलों में अभी तक आरोपी कोर्ट के सामने उपस्थित नहीं हुए हैं।
- 45 केस विभिन्न आवेदन/अर्जी सुनवाई में उलझे हुए हैं।
- 144 मामलों में गवाही दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है।
- 32 मामलों में अंतिम बहस जारी है।
- 16 केस हाईकोर्ट और 5 केस जिला अदालतों द्वारा स्थगित (स्टे) किए गए हैं।
हाईकोर्ट का स्पष्ट रोडमैप: तय समय में करें निपटारा
बेंच ने निर्देश दिए:
- जहां ट्रायल चल रहा है — 1 महीने में फैसला करें, सभी निचली अदालतें एक महीने में ऐसे सभी चल रहे मामलों को खत्म करें और फैसले तेज़ी से सुनाएं।
- जहां आरोपी की गवाही (साक्ष्य) रिकॉर्डिंग लंबित — 3 महीने में निपटाएं, महाराष्ट्र, गोवा और अन्य UT की अदालतें ऐसे मामलों में तीन महीने के भीतर फैसला सुनाएं।
CrPC की धारा 313 पर भी अहम दिशा-निर्देश
धारा 313 CrPC के तहत अदालत को आरोपी से सवाल पूछकर उसके खिलाफ सबूतों का स्पष्टीकरण लेना होता है—जो ट्रायल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कोर्ट ने कहा, आरोपी जमानत पर हो-उन्हें नोटिस भेजकर जल्द से जल्द तारीख तय करें। आरोपी जेल में हो तो उसके बयान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से रिकॉर्ड किए जा सकते हैं; कोर्ट में लाने की ज़रूरत नहीं।
चार हफ्ते में चार्ज फ्रेम करें
जिन मामलों में अभी आरोप तय नहीं हुए हैं, वहां ट्रायल कोर्ट चार सप्ताह के भीतर चार्ज फ्रेम करने की कोशिश करें।
स्टेटस रिपोर्ट 1 महीने में जमा करें
राज्य सरकार को निर्देश दिया गया है कि एक महीने में अद्यतन स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपे। यह स्वत: संज्ञान (suo motu) केस अब 19 दिसंबर को फिर सुना जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट का 2021 का आदेश
2021 में सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की हाईकोर्ट्स को निर्देश दिया था कि वे MPs और MLAs पर दर्ज मामलों की pendency की समीक्षा करें और इन्हें जल्द से जल्द निपटाएं। इसी के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेकर PIL दायर की थी।

