Conjugal Life: सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के उस फैसले को खारिज कर दिया है, जिसमें एक आरोपी पति को अग्रिम जमानत इस शर्त पर दी गई थी।
यह शर्त आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 438(2) के तहत नहीं आती
पति ने कहा था कि वह अपनी पत्नी के साथ वैवाहिक संबंध बहाल करेगा और उसे सम्मानपूर्वक रखेगा। कोर्ट ने कहा कि यह शर्त आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 438(2) के तहत नहीं आती और इससे आगे चलकर नया विवाद खड़ा हो सकता है।
फैसला मेरिट के आधार पर करना चाहिए था…
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने कहा कि पति-पत्नी के बीच पहले से दूरी रही है और वे कुछ समय से अलग रह रहे हैं। ऐसे में यह शर्त लगाना कि पति पत्नी को सम्मानपूर्वक रखेगा, भविष्य में और कानूनी विवाद पैदा कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट को अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला उसके मेरिट के आधार पर करना चाहिए था, न कि ऐसी शर्त लगाकर जो कानून में स्पष्ट रूप से नहीं दी गई है।
गंभीर धाराओं में दर्ज है केस
आरोपी पति के खिलाफ आईपीसी की धारा 498ए (क्रूरता), 323 (चोट पहुंचाना), 313 (बिना सहमति गर्भपात कराना), 506 (धमकी देना), 307 (हत्या की कोशिश), 34 (साझा इरादा) और दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत केस दर्ज है।
हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत दी थी, लेकिन शर्त के साथ
आरोपी ने झारखंड हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दी थी। हाईकोर्ट ने उसे यह कहते हुए जमानत दी थी कि वह अपनी पत्नी के साथ वैवाहिक संबंध बहाल करे और उसे सम्मानपूर्वक रखे। इस शर्त से असहमति जताते हुए आरोपी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- शर्त पूरी न होने पर नया विवाद खड़ा हो सकता है
कोर्ट ने कहा कि अगर बाद में यह कहा जाए कि आरोपी ने शर्त पूरी नहीं की, तो जमानत रद्द करने की अर्जी दी जा सकती है। इससे हाईकोर्ट को तथ्यात्मक विवादों में उलझना पड़ेगा, जो अग्रिम जमानत के मामले में उचित नहीं है।
फैसला: हाईकोर्ट में फिर से सुनी जाएगी जमानत याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला रद्द करते हुए मामला फिर से सुनवाई के लिए हाईकोर्ट को भेज दिया है। अब हाईकोर्ट आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका पर बिना किसी शर्त के, केवल मेरिट के आधार पर फैसला करेगा।
SLP (Crl.) No. 4862 OF 2025
ANIL KUMAR VERSUS THE STATE OF JHARKHAND & ANR.

