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Court News: ऐसा केस, जिसकी नौ साल तक नहीं हुई जांच, अदालत ने यह की टिप्पणी…

Court News: राउज एवेन्यू के विशेष सीबीआई अदालत ने वर्ष 2015 के मनोज वशिष्ठ मुठभेड़ मामले की जांच नौ साल तक न करने पर सीबीआई अदालत के उप महानिरीक्षक (डीआईजी) से विस्तृत जवाब मांगा है।

किसी भी केस या रिपोर्ट को उसके तार्किक निष्कर्ष तक ले जाना होता है

अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) ज्योति माहेश्वरी ने कहा, किसी व्यक्ति या पीड़ित द्वारा दर्ज की गई किसी भी केस या रिपोर्ट को उसके तार्किक निष्कर्ष तक ले जाना होता है। अगर सीबीआई वैधानिक बाध्यताओं के कारण, उक्त केस की जांच नहीं कर सकती थी, तो इस बारे में एक सूचना या लिखित रिपोर्ट दर्ज या भेजनी चाहिए थी और मामले को किसी अन्य जांच एजेंसी को स्थानांतरित किया जाना चाहिए था, जिसे इसकी जांच करने का अधिकार हो। अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 7 फरवरी तय करने का आदेश दिया है। अदालत ने उक्त एफआईआर के संबंध में सीबीआई द्वारा प्रस्तावित कार्रवाई की जानकारी देने का भी आदेश दिया है ।

अन्य एजेंसी को भी नहीं दी जांच…

अदालत ने इस तथ्य को गंभीरता से लिया कि जांच न तो की गई और न ही किसी अन्य एजेंसी को स्थानांतरित की गई। हालांकि, एक साल से अधिक समय से उक्त एफआईआर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यह और भी दुर्भाग्यपूर्ण है, खासकर 04/05 फरवरी 2021 के पत्र के आलोक में, जिसमें सीबीआई ने खुद दिल्ली पुलिस को सूचित किया था कि उसके द्वारा केस संख्या 640/2015, पीएस-बागपत में क्लोजर रिपोर्ट दायर की गई थी। अदालत ने कहा कि भले ही यह महज लापरवाही का मामला हो, लेकिन इसके बारे में एक सच्ची तस्वीर अदालत के संज्ञान में लाई जानी चाहिए थी।

पीएस बागपत की स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट दायर करें

अदालत ने इस परिस्थिति में जांच की स्थिति पर एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी। उन्होंने निर्देश दिया कि डीआईजी, सीबीआई द्वारा एफआईआर संख्या 640/2015, पुलिस स्टेशन (पीएस) बागपत की स्थिति के बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट दायर की जाए, जिसे कथित तौर पर 25 अक्टूबर 2015 को सीबीआई को स्थानांतरित कर दिया गया था और यदि सीबीआई इसकी जांच नहीं कर सकती थी, तो सीबीआई द्वारा इस संबंध में संबंधित जांच एजेंसियों को कोई सूचना क्यों नहीं दिया गया।

16 मई 2015 को केस दर्ज हुआ था

16 मई, 2015 को राजेंद्र नगर दिल्ली के सागर रत्ना रेस्टोरेंट में कथित फर्जी मुठभेड़ में मारे गए मनोज कुमार वशिष्ठ के परिवार के सदस्यों द्वारा दर्ज की गई शिकायत पर बागपत उत्तर प्रदेश के पुलिस स्टेशन में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी , जिसे कथित तौर पर दिल्ली पुलिस के विशेष सेल द्वारा अंजाम दिया गया था।

मृतक की पत्नी ने दायर की विरोध याचिका

सीबीआई अदालत में मृतक मनोज कुमार वशिष्ठ की पत्नी प्रियंका शर्मा द्वारा विरोध याचिका दायर किया गया। अदालत ने विरोध याचिका पर रिपोर्ट के लिए मामले को चार मार्च 2025 को सूचीबद्ध किया है। याचिकाकर्ता के वकील परीक्षित शर्मा ने प्रस्तुत किया कि पीएस बागपत की एफआईआर की स्थिति या परिणाम जानना आवश्यक होगा, जिसे अंततः जांच के लिए सीबीआई को स्थानांतरित कर दिया गया था, और वर्तमान समापन रिपोर्ट से निकटता से जुड़ा हुआ है। 

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