Tuesday, September 8, 2026
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Cyber Fraud Ruling: सिर्फ ऐप डाउनलोड करना लापरवाही नहीं…₹20 के बिजली बिल के चक्कर में गंवाए ₹2 लाख, SBI के छूटे पसीने, जानें

Cyber Fraud Ruling: राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की अपील को खारिज करते हुए उसे साइबर धोखाधड़ी के शिकार एक ग्राहक को ₹1.99 लाख वापस करने का आदेश दिया है।

आयोग के प्रेसिडिंग मेंबर AVM जे. राजेंद्र (रिटायर्ड) और जस्टिस अनूप कुमार मेंदिरत्ता की बेंच ने कहा कि बैंकों को यह साबित करना होगा कि ग्राहक ने लापरवाही की है; केवल अनुमान के आधार पर ग्राहक को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि ग्राहक समय पर धोखाधड़ी की रिपोर्ट करता है, तो बैंक अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता।

धोखाधड़ी का जाल (The Fake Bill Trap)

  • घटना: बेंगलुरु निवासी प्रदोष कुमार बनर्जी को जुलाई 2022 में एक फर्जी SMS मिला, जिसमें बिजली कटने की चेतावनी दी गई थी।
  • प्रोसेस: दिए गए नंबर पर कॉल करने पर उन्हें बिजली विभाग के असली दिखने वाले एक ऐप को डाउनलोड करने के लिए कहा गया।
  • धोखाधड़ी: बनर्जी ने केवल ₹20 का भुगतान करने की कोशिश की, लेकिन बिना किसी OTP साझा किए उनके खाते से पहले ₹25,000 और फिर ₹1,99,000 निकाल लिए गए।

RBI की ‘जीरो लायबिलिटी’ (Zero Liability) पॉलिसी

  • आयोग ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 6 जुलाई, 2017 के सर्कुलर का हवाला दिया।
  • नियम: यदि किसी थर्ड-पार्टी ब्रीच के कारण अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन होता है और ग्राहक 3 कार्य दिवसों के भीतर इसकी सूचना बैंक को दे देता है, तो ग्राहक की देनदारी शून्य (Zero) होती है।
  • त्वरित रिपोर्टिंग: बनर्जी ने उसी दिन साइबर पुलिस और SBI की हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई थी। बैंक ने ₹25,000 तो वापस कर दिए थे, लेकिन बाकी रकम देने से इनकार कर दिया था।

कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां

  • बैंक का बचाव खारिज: SBI ने दलील दी थी कि बिना OTP शेयर किए फ्रॉड नहीं हो सकता, लेकिन बैंक इसके पक्ष में कोई सबूत नहीं दे सका।
  • लापरवाही की परिभाषा: कोर्ट ने कहा, “केवल ऐप डाउनलोड करना ग्राहक की लापरवाही नहीं माना जा सकता।”
  • बैंक की चूक: जब बैंक ने पहले ₹25,000 वापस कर दिए थे, तो इससे यह साबित हो गया कि बैंक ने खुद माना था कि रिपोर्टिंग समय पर हुई थी।

NCDRC का अंतिम आदेश (The Final Order)

आदेशविवरण
रिफंड राशि₹1,99,000 (पूरी धोखाधड़ी वाली राशि)।
मुआवजा₹25,000 (मानसिक प्रताड़ना के लिए)।
समय सीमा4 सप्ताह के भीतर भुगतान करना अनिवार्य है।
पेनाल्टीदेरी होने पर 8% वार्षिक ब्याज देना होगा।

डिजिटल बैंकिंग में ग्राहकों की जीत

यह फैसला बढ़ता हुआ साइबर अपराध के दौर में ग्राहकों के लिए एक बड़ा कवच है। यह स्पष्ट करता है कि तकनीकी खामियों और हैकिंग के मामलों में बैंक अपनी सुरक्षा प्रणाली की विफलता का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल सकते।

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