Dharavi Redevelopment: बॉम्बे हाई कोर्ट ने धारावी पुनर्विकास परियोजना (Dharavi Redevelopment Project – DRP) को रोकने की कोशिश करने वाली ‘धारावी कोली जमात ट्रस्ट’ की याचिका को “पूरी तरह से गलत और विलंबित” बताते हुए खारिज कर दिया है।
हाईकोर्ट के जस्टिस मकरंद एस. कर्णिक और जस्टिस श्रीराम एम. मोडक की बेंच ने धारावी कोली जमात ट्रस्ट की उस रिट याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें धारावी कोलीवाड़ा की बाहरी सीमाओं के सीमांकन होने तक पुनर्विकास कार्य पर रोक लगाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोलीवाड़ा की सीमाओं के सीमांकन (Demarcation) के नाम पर इतने बड़े पुनर्विकास प्रोजेक्ट को अधर में नहीं लटकाया जा सकता।
ट्रस्ट का दावा और कोर्ट की टिप्पणी
- दावा: ट्रस्ट का आरोप था कि अधिकारी पिछले 15 वर्षों से कोलीवाड़ा की सीमाओं का निर्धारण करने में विफल रहे हैं। उन्होंने मांग की थी कि कोलीवाड़ा क्षेत्र को ‘गांवठान’ (पुरानी बस्ती) की तरह मानकर उसे पुनर्विकास परियोजना से बाहर रखा जाए।
- कोर्ट का जवाब: हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता का यह दावा कि 2 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र पर उनका मछली पकड़ने और संबद्ध गतिविधियों का विशेष अधिकार है, अब स्वीकार्य नहीं है। समय बीतने के साथ यह क्षेत्र झुग्गियों और अन्य योजनाओं का क्लस्टर बन चुका है।
2016 का नोटिफिकेशन और कानूनी स्थिति
- कोर्ट ने अपने फैसले में महाराष्ट्र सरकार के पुराने आदेशों का हवाला दिया।
- अंतिम निर्णय: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा 3 मार्च, 2016 को जारी नोटिफिकेशन अब अंतिम (Final) हो चुका है। इसके तहत विकास कार्य शुरू हो चुका है और अब इसे चुनौती देना “बहुत देर” (Belated stage) हो चुकी है।
- MLRC बनाम स्लम एक्ट: ट्रस्ट ने महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता (MLRC) के तहत सर्वेक्षण की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने कहा कि स्लम एक्ट (Slum Act) के तहत धारावी का विस्तृत सर्वेक्षण पहले ही पूरा किया जा चुका है।
जमीन का बदलता स्वरूप
- अदालत ने इस बात पर गौर किया कि कोलीवाड़ा की वह जमीन जिस पर पारंपरिक अधिकारों का दावा किया जा रहा है, अब वैसी नहीं रही।
- अतिक्रमण: लंबे समय से इन जमीनों पर अतिक्रमण और झुग्गियों का विस्तार हो चुका है, जिससे उन्होंने अपना मूल ‘कोलीवाड़ा’ चरित्र खो दिया है।
- विकास की बाधा: कोर्ट ने कहा, “इस स्तर पर इन जमीनों पर दावा करना धारावी पुनर्विकास परियोजना (DRP) को पूरी तरह से विफल कर देगा, जो जनहित में नहीं है।”
केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| बिंदु | विवरण |
| याचिकाकर्ता | धारावी कोली जमात ट्रस्ट। |
| प्रतिवादी | महाराष्ट्र सरकार और DRP प्राधिकरण। |
| विवादित क्षेत्र | लगभग 2 लाख वर्ग मीटर की भूमि। |
| कोर्ट का आदेश | याचिका “मेरिट विहीन” (Without merit) बताकर खारिज। |
| महत्वपूर्ण टिप्पणी | सीमांकन के नाम पर पुनर्विकास को रोकना “पूरी तरह से गलत अवधारणा” है। |
मुंबई के मेकओवर की राह साफ
बॉम्बे हाई कोर्ट का यह फैसला धारावी पुनर्विकास परियोजना के लिए एक बड़ी जीत है। कोर्ट ने स्पष्ट संदेश दिया है कि व्यक्तिगत या सामुदायिक दावों के आधार पर, जो समय पर नहीं उठाए गए, शहर के सबसे बड़े पुनर्विकास प्रोजेक्ट को बाधित नहीं किया जा सकता। अब M/s. नवभारत मेगा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (NMDPL) के माध्यम से परियोजना का काम बिना किसी कानूनी बाधा के आगे बढ़ सकेगा। यह फैसला उन हजारों निवासियों के लिए भी राहत की खबर है जो बेहतर आवास और सुविधाओं के लिए धारावी के कायाकल्प का इंतजार कर रहे हैं।

