Delhi High Court
Flight duty norms: दिल्ली हाई कोर्ट ने Federation of Indian Pilots (FIP) से पूछा कि वह किस आधार पर DGCA के खिलाफ अवमानना कार्यवाही चाह रहा है।
नॉर्म्स को लागू करने में “जानबूझकर अवहेलना” कहां हुई
हाईकोर्ट ने कहा, जबकि अदालत द्वारा मंज़ूर किए गए नए Flight Duty Time Limit (FDTL) नॉर्म्स को लागू करने में “जानबूझकर अवहेलना” कहां हुई है। FIP की दलील थी कि DGCA ने अदालत को इस साल अप्रैल में आश्वासन दिया था कि वह FDTL नॉर्म्स को 1 जुलाई से 1 नवंबर तक चरणबद्ध तरीके से लागू करेगा, लेकिन कई एयरलाइंस—जैसे एयर इंडिया और स्पाइसजेट—को अब भी पुराने नॉर्म्स से हटने नहीं दिया जा रहा है।
जस्टिस अमित शर्मा ने कहा,
“आज आप अदालत से अवमानना शुरू करने की मांग कर रहे हैं। मैं फिर पूछ रहा हूँ—कहां है जानबूझकर अवहेलना? अदालत ने तो सिर्फ टाइमलाइन का पालन करने को कहा था।”
DGCA ने यह दी दलील
DGCA की ओर से कहा गया कि उसके पास छह महीने की सीमित अवधि के लिए छूट देने का अधिकार है और यह समीक्षा के अधीन है। अदालत ने FIP को पहले के आदेश पेश करने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई 15 दिसंबर को तय की। यह अवमानना याचिका उस पृष्ठभूमि में दायर की गई है, जब DGCA ने FDTL में कुछ ढील दी है—जैसे ज्यादा नाइट लैंडिंग की अनुमति और Boeing 787 ड्रीमलाइनर (दो-पायलट ऑपरेशन) के लिए ड्यूटी टाइम बढ़ाना।
यह है फेडरेशन का आरोप
FIP का आरोप है कि DGCA एयरलाइंस को लगातार छूट दे रहा है और “सुरक्षा से ज्यादा व्यावसायिक हितों को महत्व दिया जा रहा है”। DGCA ने इससे पहले बताया था कि 22 प्रस्तावित क्लॉज में से 15 को 1 जुलाई से लागू कर दिया गया है और बाकी 1 नवंबर से प्रभावी होंगे। नए CAR-2024 नियमों में पायलटों के लिए अधिक विश्राम समय का प्रावधान है, जिसे पायलट थकान को लेकर उठी चिंताओं के बाद संशोधित किया गया। शुरुआती योजना थी कि ये नियम 1 जून 2024 से लागू हों। यह मामला इंडियन कमर्शियल पायलट्स एसोसिएशन, इंडियन पायलट्स गिल्ड और FIP की याचिकाओं के बाद आया।






