Delhi HC: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक याचिकाकर्ता के खिलाफ ₹10,000 के जमानती वारंट जारी किए हैं।
कड़कड़डूमा कोर्ट के एक जिला जज ने भेजा संदेश
याचिकाकर्ता पर अाराेप है कि उसने कथित रूप से जिला न्यायाधीश के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की और अदालत की कार्यवाही को “स्टूपिड प्रोसीडिंग्स” कहकर शारीरिक रूप से पेश होने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और मनोज जैन की पीठ ने यह आदेश पारित किया, जब वह कड़कड़डूमा कोर्ट के एक जिला जज द्वारा भेजे गए संदर्भ पर स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
कई चेतावनियों के बावजूद भी नहीं सुधरा
अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, संबंधित व्यक्ति ने ट्रायल कोर्ट की सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बार-बार कार्यवाही में बाधा डाली, न्यायाधीश के खिलाफ आपत्तिजनक बातें कहीं और अदालत के निर्देशों का खुला उल्लंघन किया। कई चेतावनियों के बावजूद उसके अनुशासनहीन रवैये के चलते जिला जज ने यह मामला हाईकोर्ट को भेजा। इस पर अदालत ने आदेश दिया कि ₹10,000 के जमानती वारंट संबंधित थाना प्रभारी के माध्यम से जारी किए जाएं और अगली सुनवाई पर उसकी उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
मई 2025 में कारण बताओ नोटिस जारी किया था
हाईकोर्ट ने मई 2025 में कारण बताओ नोटिस (Show-Cause Notice) जारी कर पूछा था कि उसके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए। अगस्त में अदालत ने उसकी सहायता के लिए एक लीगल एड काउंसल भी नियुक्त किया था। इसके बावजूद जब वह न तो शारीरिक रूप से और न ही ऑनलाइन सुनवाई में शामिल हुआ, तो अदालत ने 9 अक्तूबर को उसे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया था। लेकिन 6 नवम्बर की सुनवाई में उसने फिर से वर्चुअली उपस्थिति दर्ज कराई और अदालत से कहा कि वह “स्टूपिड प्रोसीडिंग्स” में भाग नहीं लेना चाहता।
अवहेलना मामले में जज बाेले
उपरोक्त परिस्थितियों को देखते हुए, अदालत के पास अब कोई अन्य विकल्प नहीं बचा है सिवाय इसके कि उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए बाध्यकारी कार्रवाई की जाए।

