Thursday, September 24, 2026
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Child Marriage: 12 साल की उम्र में हुई थी शादी…अब कोर्ट ने दी आजादी, वह फिर से जाएगी स्कूल

Child Marriage: राजस्थान के जोधपुर में एक युवती ने एक दशक लंबी कानूनी लड़ाई जीतकर अपनी बाल विवाह की बेड़ियों को तोड़ दिया है।

फैमिली कोर्ट के जज वरुण तलवार ने इस विवाह को शून्य (Annul) घोषित करते हुए कहा कि बाल विवाह बच्चों के वर्तमान और भविष्य दोनों को बर्बाद कर देता है। पीड़िता की यह जीत केवल उसकी निजी जीत नहीं है, बल्कि उन हजारों बच्चों के लिए एक मिसाल है जो आज भी इन कुप्रथाओं में फंसे हैं।

बचपन में जो हुआ, उसका अहसास अब हुआ

  • शादी: 2016 में जब पीड़िता केवल 12 साल की थी, तब समाज के बड़ों के दबाव में उसकी शादी कर दी गई थी।
  • कारण: यह शादी ‘मौसर’ (मृत्युभोज) की एक कुप्रथा से जुड़ी थी, जहाँ परिवार में किसी की मृत्यु के बाद होने वाले सामूहिक भोज के दौरान बच्चों की शादियां कर दी जाती हैं।
  • मजबूरी: पीड़िता बताती है कि उस वक्त वह स्कूल जाती थी और उसे समझ भी नहीं था कि उसके साथ क्या हो रहा है। उसके माता-पिता भी सामाजिक बहिष्कार के डर से कुछ नहीं बोल पाए।

संघर्ष की कहानी: जब ‘गौने’ का दबाव बढ़ा

  • जब पीड़िता बड़ी हुई और ससुराल वालों ने उसे साथ ले जाने (Conjugal life) का दबाव बनाया, तब उसने विद्रोह किया।
  • मदद: उसने पुलिस से संपर्क किया, जहाँ से उसे ‘सारथी ट्रस्ट’ की सोशल एक्टिविस्ट कृति भारती का साथ मिला।
  • परिवार का साथ: शुरुआत में परिवार डरा हुआ था, लेकिन पीड़िता की बड़ी बहन (जिसका खुद बाल विवाह हुआ था) ने माता-पिता को मनाया।
  • कानूनी जीत: कोर्ट में पीड़िता ने अपने उम्र के दस्तावेज पेश किए। हालांकि ससुराल वालों ने दावा किया कि शादी बालिग होने पर हुई थी, लेकिन वे इसे साबित नहीं कर पाए।

अब क्या है पीड़िता का सपना?

  • पीड़िता ने कक्षा 7 के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी, लेकिन अब उसने फिर से किताबें उठा ली हैं।
  • ओपन स्कूलिंग: वह अब ओपन बोर्ड से सेकेंडरी परीक्षाओं की तैयारी कर रही है।
  • आत्मनिर्भरता: वह अपनी बड़ी बहन का सपना पूरा करना चाहती है, पढ़ लिखकर खुद के पैरों पर खड़ा होना।

एक्टिविस्ट का दर्द: “रिश्ता छोड़ना आसान नहीं होता”

कृति भारती ने बताया कि लड़के वाले आसानी से शादी तोड़ने को तैयार नहीं होते। यह उनके लिए ‘ईगो’ और ‘परंपरा’ की बात होती है। ऐसे केस हाथ में लेने का मतलब है गालियां, अपमान और सामाजिक विरोध का सामना करना।

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